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साल 2012: सायना के रंग में रंगा भारतीय बैडमिंटन

भारतीय बैडमिंटन की उम्मीदों का बोझ उठा रही सायना नेहवाल देश की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में सफल रहीं. ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनकर उन्होंने इतिहास रचते हुए इस साल को अपने और बैडमिंटन के प्रशंसकों के लिए यादगार बना दिया.

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Sahitya Aajtak 2018
भाषानई दिल्ली, 28 December 2012
साल 2012: सायना के रंग में रंगा भारतीय बैडमिंटन

भारतीय बैडमिंटन की उम्मीदों का बोझ उठा रही सायना नेहवाल देश की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में सफल रहीं. ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनकर उन्होंने इतिहास रचते हुए इस साल को अपने और बैडमिंटन के प्रशंसकों के लिए यादगार बना दिया.

दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी सायना ने लंदन ओलंपिक में तीसरे स्थान के प्ले आफ में चीन की दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी शिन वैंग के घुटने की चोट के कारण बीच मुकाबले से हटने पर कांस्य पदक जीता था. सायना ने हालांकि साल के अंत में विवाद को जन्म दे दिया, जब अपनी वर्ष की अंतिम प्रतियोगिता केएल गर्ग सैयद मोदी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन टूर्नामेंट के पहले दौर में ही मैच प्वाइंट पर होने के बावजूद वह मुकाबले से हट गईं.

पुरुष एकल में देश के शीर्ष खिलाड़ी पी कश्यप ने भी लंदन खेलों के दौरान क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाला पहला भारतीय पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा.

उभरती हुई खिलाड़ी पीवी सिंधू ने भी अपने प्रदर्शन से इस साल काफी वाहवाही लूटी जब वह चाइना मास्टर्स और मलेशिया ओपन ग्रां प्री गोल्ड के सेमीफाइनल जबकि इंडियन ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में सफल रही. सिंधू ने चाइना मास्टर्स में लंदन ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता चीन की शुएरुई ली को भी हराया.

कोर्ट पर भारतीय खिलाड़ियों की सफलता का असर राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में भी देखने को मिला जब कश्यप और अश्विनी पोनप्पा को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए अजरुन पुरस्कार से नवाजा गया.

भारतीय बैडमिंटन पर हालांकि विवादों का साया भी रहा. सायना के विवाद के अलावा महिला खिलाड़ी प्राजक्ता सावंत ने मुख्य राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद पर भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया जिसमें स्टार खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने भी अपनी साथी खिलाड़ी का साथ दिया. भारतीय बैडमिंटन में हालांकि यह साल भी साइना के रंग में रंगा रहा. पिछले साल लचर प्रदर्शन करने वाली सायना ने इस साल ओलंपिक पदक के अलावा चार खिताब जीते.

ओलंपिक जीतना सायना का सपना था. वह चार साल पहले बीजिंग ओलंपिक में भी क्वार्टर फाइनल में पहुंची लेकिन पदक से दूर रही. इस भारतीय खिलाड़ी ने हालांकि इस बार अपना सपना साकार कर लिया. वह हालांकि भाग्यशाली रही क्योंकि वह कांस्य पदक के प्ले आफ में जब वैंग के खिलाफ 0-1, 18-21 से पिछड़ रही थी तब चीन की खिलाड़ी ने घुटने की चोट के कारण मैच से हटने का फैसला किया.

बाइस वर्षीय सायना ने इसके अलावा स्विस ओपन, थाईलैंड ओपन, इंडोनेशिया ओपन और डेनमार्क ओपन का खिताब जीता जबकि वह फ्रेंच ओपन के फाइनल में हारी. उन्होंने बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज फाइनल्स और मलेशिया के ओपन के सेमीफाइनल में जगह बनाई जबकि आल इंग्लैंड के क्वार्टर फाइनल में पहुंची.

दूसरी तरफ पुरुष एकल में कश्यप ने इंडिया ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचकर ओलंपिक के लिए अंतिम लम्हों पर क्वालीफाई किया और खेलों के महाकुंभ के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर इतिहास रचने में सफल रहे. कश्यप को हालांकि अंतिम आठ के मुकाबले में शीर्ष वरीय मलेशिया के ली चोंग वेई के हाथों 19-21, 11-21 से शिकस्त का सामना करना पड़ा.

कश्यप इंडोनेशिया ओपन और ऑस्ट्रिया इंटरनेशनल चैलेंज के भी सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहे जबकि चाइना ओपन में उन्होंने क्वार्टर फाइनल का सफर तय किया. उन्होंने साल की शुरुआत दुनिया के 29वें नंबर के खिलाड़ी के रूप में की जबकि उनकी मौजूदा रैंकिंग 20 है. ओलंपिक में गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की महिला युगल जोड़ी तीन में से दो मैच जीतने के बावजूद ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई जबकि गुट्टा और वी दीजू की मिश्रित युगल जोड़ी अपने तीनों मैच हार गई. गुट्टा ने ओलंपिक के बाद छह महीने तक ब्रेक लेने का फैसला किया जिससे पोनप्पा को नयी साथी की तलाश करनी पड़ी.

भारत के लिए युवा सिंधू ने भी चमक बिखेरी. उन्होंने चाइना मास्टर्स के सेमीफाइनल में पहुंची और क्वार्टर फाइनल में उन्होंने ओलंपिक चैम्पियन ली शुएरुई को कड़े मुकाबले में 21-19, 9-21, 21-16 से शिकस्त दी. सिंधू मलेशिया ओपन ग्रां प्री के सेमीफाइनल जबकि इंडिया ओपन के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने में भी सफल रही. उन्होंने एशिया अंडर 19 खिताब भी जीता.

मुख्य राष्ट्रीय कोच गोपीचंद का हैदराबाद में अपनी निजी अकादमी चलाने का ममला इस साल अंत में गरमा गया जब प्राजक्ता ने उन पर भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया.

इस आरोप के बाद भारतीय खिलाड़ियों में भी मतभेद देखने को मिले जब गुट्टा ने प्राजक्ता जबकि साइना ने गोपीचंद का समर्थन किया.

प्राजक्ता को गोपीचंद की अकादमी में लगे ट्रेनिंग शिविर में प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई थी जिसके बाद उन्होंने मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. अदालत ने इसके बाद प्राजक्ता को ट्रेनिंग शिविर में हिस्सा लेने की स्वीकृति दी और फिर गोपीचंद के अकादमी चलाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि गोपीचंद के अपनी निजी अकादमी चलाने और चयन पैनल का प्रमुख होने में हितों के टकराव की संभावना नजर आती है.

अदालत ने गुट्टा के बयान पर गौर करते हुए कहा था, ‘उनके निजी शिविर में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को चुना जा सकता है. वह अच्छे कोच हो सकते हैं लेकिन इससे चयन की निष्पक्षता प्रभावित होती है.’ इस बीच इस साल हुई राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में पुरुष और महिल एकल वर्ग के खिताब कश्यप और सयाली गोखले ने जीते. कश्यप ने फाइनल में अजय जयराम जबकि गोखले ने सिंधू को हराया.

मिश्रित युगल खिलात अपर्णा बालन और अरुण विष्णु ने जीता. पुरुष और महिला युगल खिताब क्रमश: मनु अत्री और सुमित रेड्डी तथा अपर्णा बालन और एन सिक्की रेड्डी के नाम रहे.

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