एडवांस्ड सर्च

2012: बरस भर होती रही असम की चर्चा

अंत के करीब पहुंच चुके वर्ष 2012 में असम में मूलनिवासी बोडो और प्रवासी अल्पसंख्यकों के बीच हुई भीषण हिंसा और छेड़छाड़ का एक मामला जहां राष्ट्रीय सुर्खियां बना वहीं जानलेवा बाढ़ और नौका हादसे में 100 लोगों की मौत राज्य के लिए गहरा घाव बन गई.

Advertisement
आज तक ब्यूरोगुवाहाटी, 28 December 2012
2012: बरस भर होती रही असम की चर्चा

अंत के करीब पहुंच चुके वर्ष 2012 में असम में मूलनिवासी बोडो और प्रवासी अल्पसंख्यकों के बीच हुई भीषण हिंसा और छेड़छाड़ का एक मामला जहां राष्ट्रीय सुर्खियां बना वहीं जानलेवा बाढ़ और नौका हादसे में 100 लोगों की मौत राज्य के लिए गहरा घाव बन गई.

मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के लिए उनके कार्यकाल का दूसरा वर्ष बहुत मुश्किल भरा रहा. जुलाई के आखिरी सप्ताह से चार बोडोलैंड भूभागीय प्रशासित जिलों (बीटीएडी) और धुबरी में हिंसा फैली.

बोडो और अल्पसंख्यक प्रवासियों के बीच टकराव में करीब 110 लोगों की जान गई, सैकड़ों लोग विस्थापित हो गए और अगस्त तक चली हिंसा में 4.85 लाख से ज्यादा लोगों को राहत शिविरों में शरण लेना पड़ा.

टकराव जमीन संबंधी मुद्दों को लेकर शुरू हुआ. बोडो लोगों ने कहा कि वह उस भूमि के मूल निवासी हैं और बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी उनकी जमीन पर कब्जा कर बस गए. अल्पसंख्यकों ने दावा किया कि टकराव के पीछे, विघटित हो चुके बोडो लिबरेशन टाइगर्स के कैडरों का हाथ था.

जुलाई महीने में शहर की व्यस्ततम जी एस रोड पर स्थित एक बार के बाहर भीड़ ने एक लड़की के साथ छेड़छाड़ की और टीवी के एक पत्रकार ने इसकी फिल्म बनाकर यू ट्यूब पर डाल दी जिससे खासा विवाद हुआ. घटना के सिलसिले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमें मुख्य आरोपी अमरज्योति कलीता और पत्रकार गौरवज्योति नियोग भी थे. कलीता और 10 अन्य को स्थानीय अदालत ने दोषी ठहराया और नियोग तथा तीन अन्य को बरी कर दिया.

इस घटना के चलते कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला हुआ और टीवी चैनल के प्रधान संपादक तथा नियोग को संस्थान से इस्तीफा देना पड़ा. चैनल गोगोई मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री की पत्नी का था इसलिए मंत्री ने भी इस्तीफा दिया पर मुद्दा सुलझा लिया गया.

राज्य में इस साल सर्वाधिक भीषण बाढ़ आई जिसमें 150 से अधिक लोगों की जान गई और 27 जिलों में से 25 जिलों की करीब 50 लाख की आबादी प्रभावित हुई.

ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों ने राज्य में तबाही मचा दी जिससे कई इलाके डूबे और फसल खराब हुई.

बाढ़ का कहर इस साल तीन बार टूटा और दुनिया का सबसे बड़ा रिहायशी नदी द्वीप माजुली भी नहीं बच पाया. न केवल द्वीप पानी में डूबा बल्कि व्यापक स्तर पर भूमि का क्षरण भी हुआ.

काजीरंगा नेशनल पार्क का 90 फीसदी भाग बाढ़ के पानी में डूबा और यहां के रिकॉर्ड 631 पशु इस तबाही की भेंट चढ़ गए. एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रख्यात काजीरंगा नेशनल पार्क में शिकारियों ने इस साल 20 से अधिक हाथियों को उनके दांतों के लिए मार डाला. बाजार में हाथी दांत की कीमत 80 लाख रूपये से एक करोड़ रूपये तक है.

गैंडों के शिकार के लिए राज्य के वन विभाग की खासी आलोचना हुई जिसके चलते वन मंत्री रॉकीबुल हुसैन ने पार्क के लिए मुख्य वन संरक्षक की नियुक्ति करने और वन गाडरें को एके 47 रायफलें देने सहित कई उपायों की घोषणा की.

तीस अप्रैल को राज्य में करीब 300 यात्रियों को लेकर जा रही एक नौका तूफान में फंस कर बांग्लादेश की सीमा से लगे धुबरी जिले में ब्रह्मपुत्र नदी में डूब गई. तलाशी अभियान कई सप्ताह चला.

इस आशंका के चलते बांग्लादेश सरकार से मदद मांगी गई कि शव पानी की धारा में बह कर पड़ोसी देश चले गए होंगे. लेकिन केवल 42 शव ही मिल सके। करीब 200 लोगों का पता नहीं चल पाया.

तीन दशक से राज्य में चल रहा उग्रवाद इस साल धीमा रहा और उल्फा तथा एनडीएफबी के साथ वार्ता प्रक्रिया शुरू हुई. यह बात अलग है कि वार्ता में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो पाई.

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay