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जब जंग की कगार पर पहुंच गए थे अमेरिका-नॉर्थ कोरिया

aajtak.in [ Edited By: आदित्य बिड़वई ]
12 June 2018
जब जंग की कगार पर पहुंच गए थे अमेरिका-नॉर्थ कोरिया
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन ने सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप में एक दूसरे से मुलाकात की. इसे ऐतिहासिक दो वजहों से कहा जा रहा है. पहली वजह यह कि परमाणु युद्ध की धमकियों के बीच यह मुलाकात हुई है. जबकि दूसरी अमेरिका के किसी सिटिंग राष्ट्रपति ने पहली बार किसी उत्तर कोरियाई नेता से मुलाकात की है.
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मालूम हो कि एक वक्त ऐसा भी था जब अमेरिका और नॉर्थ कोरिया जंग की कगार पर पहुंच गए थे. दरअसल, पिछले साल दोनों देशों के बीच हालत तब बिगड़ गए थे जब नॉर्थ कोरिया परमाणु से लैस मिसाइल टेस्ट करने वाला था.  

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यह पूरा विवाद 9 अप्रैल 2017 को शुरू हुआ. अमेरिका ने कोरियाई द्वीप के पास वेस्टर्न पैसेफिक ओशियन की ओर अपनी स्ट्राइक फोर्स भेजी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर दबाव बनाने की शुरुआत की. वे चाहते थे कि चीन नॉर्थ कोरिया पर एक्शन ले. यहां तक कहा था कि अगर चीन हस्तक्षेप नहीं करेगा तो अमेरिका अकेले इस समस्या का हल निकालेगा.
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फिर 14 अप्रैल को उत्तर कोरिया के संस्थापक किम सुंग के 105वें जन्मदिन पर परेड के दौरान नॉर्थ कोरिया की ओर से विध्वंसक हथियार का प्रदर्शन किया गया. इसमें KN-08 रॉकेट शामिल थे जो कि 7000 माइल्स उड़ान की क्षमता रखते हैं. ये हथियार लॉस एजेंलिस, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन डीसी तक हमले में सक्षम हैं. हालांकि, बाद में यह सवाल उठा था कि शायद ही ये हथियार वास्तविक हों. इस परेड के बाद नॉर्थ कोरिया ने दावा किया था कि वे कभी भी हमले के लिए तैयार है.
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इसके ठीक एक दिन बाद 15 अप्रैल को नॉर्थ कोरिया ने एक बार फिर मिसाइल टेस्ट किया. इसे अमेरिका ने उकसाने वाला कदम बताया. 17 अप्रैल को यूएस के वाइस प्रेसिडेंट माइक पेंस ने बयान जारी कर कहा कि धैर्य का इंम्तिहान खत्म हो चुका है. उन्होंने किम जोंग उन को चेतावनी देते हुए कहा था- ट्रंप को टेस्ट मत करें. इसके बाद ही योजना से पहले साउथ कोरिया में डिफेंस सिस्टम भेजा गया.
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19 अप्रैल को पेंस ने किम जोंग उन को चेतावनी दी थी कि अमेरिका किसी भी हमले को नाकाम कर देगा. उन्होंने एयरक्राफ्ट करियर से भेजे गए सैनिकों से बात भी की. लेकिन बात नहीं बनी. 28 अप्रैल को नॉर्थ कोरिया ने एक प्रोपैगेंडा फिल्म में दिखाया कि उसने कैसे अमेरिका के कैपिटोल में हमला कर दिया है. इसके बाद तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो गई.
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किम जोंग उन ने मई में चेतावनी दी कि वो जापान को परमाणु से केक के टुकड़ों में बांट देंगे. वहीं चेतावनी दी कि सपोर्ट करने वाले विरोधियों का भी वही बुरा हाल करेंगे.

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इस बीच जून में नॉर्थ कोरिया ने धमकी दी कि वह ट्रंप का न्यूयॉर्क में घर उड़ा देगा और जुलाई में फिर ब्लैस्टिक मिसाइल का टेस्ट किया. इसकी रेंज 6700 किलोमीटर बताई गई जिसका मतलब था कि अलास्का भी इसकी जद में था. हवसांग 14 इंटरकंटिनेंटल मिसाइल के टेस्ट को नॉर्थ कोरिया ने ऐतिहासिक बताया. ट्रंप ने ट्वीट कर कहा था- क्या यह शख्स (किम जोंग उन) जिंदगी में कुछ अच्छा कर सकता है?
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नॉर्थ कोरिया के इस रुख के बाद 8 अगस्त को ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर उत्तर कोरिया ने अमेरिका को धमकाना जारी रखा है तो उसे ऐसे विध्वंस का सामना करना होगा जो दुनिया ने कभी नहीं देखा होगा. 10 अगस्त को उत्तरी कोरियाई मीडिया ने कहा कि वह चार रॉकेट लॉन्च करने की योजना बना रहा था. 11 अगस्त को ट्रंप ने उत्तर कोरिया को चेतावनी दी कि अगर उत्तर कोरिया अविवेकपूर्ण कार्रवाई करता है तो परमाणु हथियार संपन्न देश के खिलाफ सैन्य समाधान के इस्तेमाल की तैयारी की जाएगी.
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29 अगस्त को उत्तर कोरिया ने जापान के ऊपर से मिसाइल दागी. यह मिसाइल 2700 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए उत्तरी प्रशांत महासागर में जाकर गिरी. वहीं 31 अगस्त को उत्तर कोरिया की ओर से जापान के ऊपर से मिसाइल गुजारने के बाद अमेरिका ने अपनी ताकत दिखाई. कोरियाई सीमा के पास भारी बम गिराए.
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3 सितंबर को उत्तर कोरिया ने हाईड्रोजन बम का परीक्षण किया. ये पूरी तरह सफल रहा. इस धमाके की ताकत पिछले या पांचवें परीक्षण से 9.8 गुना ज्यादा थी. 4 सितंबर को अमेरिकी रक्षा सचिव जेम्स मैटीस ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उत्तर कोरिया अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए किसी भी तरह के नुकसान की स्थिति उत्पन्न करता है तो "भारी सैन्य प्रतिक्रिया" की जाएगी.

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6 सितंबर को उत्तर कोरिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका को "विनाशकारी परिणाम" का सामना करना पड़ेगा.
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वहीं 15 सितंबर को उत्तर कोरिया ने अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र समेत दुनिया के देशों की चेतावनी को दरकिनार करते हुए फिर से बैलिस्टिक मिसाइल दागा है. यह मिसाइल जापान के ऊपर से गुजरी और प्रशांत महासागर में जा गिरी. दक्षिण कोरिया और जापान ने इसकी जानकारी दी.
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19 सितंबर- UN के पहले भाषण में ट्रंप ने कहा कि अगर सुधरा नहीं उत्तर कोरिया, तो उसे नेस्तनाबूद कर देंगे. 25 सितंबर को उत्तर कोरिया ने अमेरिकी युद्धपोतों पर और डोनाल्ड ट्रंप पर हमला करने की धमकी दी.
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1 अक्टूबर को ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरन किम जोंग साथ बातचीत करने की कोशिश कर "अपना समय बर्बाद कर रहे हैं". 7 अक्टूबर को ट्रंप ने उत्तर कोरिया को खतरे की धमकी दी कि उत्तर कोरिया के साथ कूटनीतिक कोशिशें लगातार विफल हुई हैं, अब दुष्ट देश से निपटने पर "केवल एक चीज काम करेगी. 10 अक्टूबर को अमेरिकी मिलिट्री के बॉ़म्बर्स ने नॉर्थ कोरिया के पेनिसुला इलाके के ऊपर उड़ान भरी.
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