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CAA का विरोध कर रहे देशों को विदेश मंत्री की खुली चुनौती

aajtak.in
07 March 2020
CAA का विरोध कर रहे देशों को विदेश मंत्री की खुली चुनौती
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नागरिकता संशोधन कानून और दिल्ली हिंसा को लेकर दुनिया के तमाम देशों की आलोचना पर विदेश मंत्री एस. जयंशकर ने जवाब दिया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में हुए 'ग्लोबल बिजनेस समिट' में कहा कि दुनिया का कोई भी देश हर किसी के लिए अपने दरवाजे नहीं खोलता है.
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नागरिकता कानून को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, हमने इस कानून के जरिए राज्यविहीन लोगों की संख्या घटाने की कोशिश की है और इसकी सराहना की जानी चाहिए. हर कोई जब नागरिकता पर फैसला करता है तो उसका एक संदर्भ और दायरा होता है. मुझे दुनिया का एक देश बता दीजिए जो कहता हो कि दुनिया के हर व्यक्ति का यहां स्वागत है. सीएए हमारा आंतरिक मसला है. इससे किसी देश का कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए.
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विदेश मंत्री से सवाल किया गया कि अगर भारत दुनिया को सीएए पर अपना पक्ष नहीं समझा पाया तो क्या होगा? उन्होंने कहा, 'मीडिया से हटकर भी दुनिया है. मैं दुनिया के देशों की सरकारों के साथ संपर्क में हूं. ब्रसेल्स में मैने 27 विदेश मंत्रियों से सीएए पर बातचीत की थी. सरकार और संसद के पास अधिकार हैं कि वे देश में नागरिकता की शर्तें निर्धारित कर सकें. हमने बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को शरण दी है, जिनके पास कोई नागरिकता नहीं थी.'

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जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के विरोध पर कहा कि वे पहले भी गलत साबित हो चुके हैं. उन्होंने कहा, संस्था सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे से ऐसे किनारा कर लेती है जैसे कि इसका पड़ोसी देश पाकिस्तान से कोई लेना-देना ही नहीं है. प्लीज, इस बात को समझिए कि वे (आतंकवादी) कहां से आ रहे हैं, यूएनएचआरसी का पुराना रिकॉर्ड देखिए कि उन्होंने कश्मीर मुद्दे को कैसे डील किया था.
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नागरिकता कानून और दिल्ली हिंसा की वजह से क्या भारत ने अपने दोस्त खोए हैं? इस सवाल के जवाब में एस. जयशंकर ने कहा, शायद अब हम यह जान पा रहे हैं कि हमारे असली दोस्त कौन हैं.
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एस. जयशंकर ने कहा, एक वक्त था जब भारत बहुत ही रक्षात्मक मुद्रा में रहा करता था, हमारी क्षमताएं कम थीं और खतरे ज्यादा थे इसलिए हमने तमाम चीजों से दूरी बनाए रखने की रणनीति अपनाई. लेकिन अब हम ये और नहीं कर सकते हैं क्योंकि हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं. अब दुनिया का रुख भी बदल चुका है.
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एस. जयशंकर ने कहा, मैं बहुत ही विश्वास के साथ ये बात कह सकता हूं कि आज जब आप भारतीय दूतावास जाते हैं तो वे खुलकर स्वागत करते हैं. भारतीय कारोबारियों को अब जो सहयोग मिलता है, वह कुछ साल पहले नहीं मिलता था.

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विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागेदारी (RCEP) को लेकर भी तमाम सवालों के जवाब दिए. उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते हमेशा व्यापारिक गणित के हिसाब से होने चाहिए ना कि राजनीतिक नैतिकता के आधार पर.
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उन्होंने कहा, जाहिर है कि वैश्वीकरण के दौर में कोई भी अर्थव्यवस्था खुद को एकदम अलग नहीं रख सकती है. लेकिन व्यापारिक समझौतों और इसकी शर्तों को हर देश के हिसाब से जरूर तय किया जाना चाहिए. हर समझौते में फायदा जरूर दिखना चाहिए और वह केवल किसी कोरी कल्पना पर आधारित नहीं हो सकती है.
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बता दें कि भारत ने नवंबर महीने में आरसीईपी से खुद को बाहर कर लिया था. आरसीईपी दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक साझेदारी है जिसके तहत इसमें शामिल देश एक-दूसरे को व्यापार में तमाम रियायतें देंगे. भारत को डर था कि इसमें शामिल होने से घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचेगा और देश का व्यापार घाटा बढ़ जाएगा. चीन समेत कई देशों की उत्पादन क्षमता भारत से बेहतर है, ऐसे में ये भी आशंका थी कि भारत दूसरे देशों का मुकाबला नहीं कर पाएगा.
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जयशंकर ने कहा कि देश को अपने बुनियादी ढांचे की क्षमता बढ़ाने के अलावा इसे वैश्विक मानकों के हिसाब से तैयार करना बाकी है. साथ ही, भारत को वैश्विक आपूर्ति चेन के साथ पूरी तरह से जोड़ना बाकी है यानी कि अभी भारत के लिए आसान वक्त नहीं है.
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मंत्री ने कहा, मौकों और खतरों के बीच चुनाव करने को लेकर बहस खुली हुई है. यहां तमाम लोगों की आजीविका दांव पर लगी हुई है और देश के बढ़ते व्यापार घाटा भी एक चिंता का विषय है. विदेश मंत्री ने कहा, मैं भारत के लिए एक ऐसी रणनीति का चुनाव नहीं कर सकता हूं जो भारतीय कारोबार के लिए खराब हो, ऐसा करके मैं अपनी राष्ट्रीय रणनीति को भी नुकसान पहुंचाऊंगा.


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