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मसूद अजहर से चीन का वो डर जिससे नहीं आता भारत के साथ

aajtak.in [Edited By: प्रज्ञा बाजपेयी]
08 March 2019
मसूद अजहर से चीन का वो डर जिससे नहीं आता भारत के साथ
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पूरी दुनिया को दरकिनार कर जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को बचाने का काम चीन क्या सिर्फ अपने दोस्त पाकिस्तान के लिए कर रहा है? वैसे तो चीन तर्क देता रहा है कि वह आतंकियों पर प्रतिबंध तय करने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 कमिटी की वैधता और प्रामाणिकता को बनाए रखना चाहता है लेकिन असली वजहें कुछ और ही हैं.
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दरअसल, चीन दक्षिण एशिया में अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान का बचाव करने से ज्यादा अपने आर्थिक हितों को साधने में लगा हुआ है. चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चीन की महत्वाकांक्षी योजना बेल्ट ऐंड रोड (BRI) का अहम हिस्सा है. BRI के तहत चीन सड़क, रेल और समुद्रीय मार्ग से एशिया, यूरोप और अफ्रीका में अपनी पहुंच बनाएगा.
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चीन को अगले एक हफ्ते के भीतर मसूद अजहर पर फैसला करना है, ऐसे में उसे एक अलग चिंता सता रही है. चीन को डर है कि जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ किसी भी फैसले से उसका बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रभावित हो सकता है. चीन का CPEC प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है जो जैश-ए-मोहम्मद का निशाना बन सकता है.
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इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ बैन लगाने के प्रस्ताव पर समर्थन देने पर विचार कर रहा है लेकिन इसके साथ ही पाकिस्तान से सुरक्षा गारंटी लेने की भी कोशिश कर रहा है.
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सीपीईसी ना केवल पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलिगिट-बालटिस्तान से होकर गुजरता है बल्कि खैबर पख्तूनख्वा के मनसेरा जिले में भी फैला है. खैबर पख्तूनख्वा में ही बालाकोट स्थित है जहां पर कई आतंकी कैंप स्थित हैं. भारतीय वायु सेना ने पुलवामा हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े कैंप को तबाह कर दिया था.

चीन ने हाल ही में बालाकोट के नजदीक सीपीईसी के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया था. इसके अलावा, पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाला कराकोरम हाईवे भी मनसेरा से ही होकर गुजरता है.
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चीन के उप-विदेश मंत्री कॉन्ग शुआन्यू ने 5 से 6 मार्च तक पाकिस्तान के दौरे पर थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग ने इस दौरे में सीपीईसी की सुरक्षा को लेकर बातचीत की. सीपीईसी से जुड़ी परियोजनाओं में करीब 10,000 चीनी नागरिक काम कर रहे हैं जिनकी सुरक्षा भी दांव पर लगी हुई है.
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 13 मार्च की डेडलाइन को देखते हुए चीन के हर कदम पर भारत नजर रख रहा है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ्रांस ने रिजॉल्यूशन 1267 के तहत मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव रखा था जिसका समर्थन 3 अन्य स्थायी सदस्यों यूएस, यूके और रूस ने किया.
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भारत के मसूद अजहर को बैन करने की राह में एक मात्र रोड़ा बीजिंग ही है. चीन मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्तावों को 3 बार रोक चुका है लेकिन इस बार पुलवामा हमले के बाद यूएन में प्रस्ताव लाया गया है जिससे चीन पर दबाव है.
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने कहा है कि अगर 13 मार्च 2019 तक कोई भी देश प्रस्ताव का विरोध नहीं करता है तो मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया जाएगा.

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भारत ने हमेशा से यह महसूस किया है कि पाकिस्तानी सेना का इन आतंकी समूहों पर नियंत्रण चीनी हितों की सुरक्षा करने में मदद करता रहा है. हालांकि, बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में चीनी नागरिकों और मजदूरों के खिलाफ आतंकी हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं जो चीन के लिए चिंता का सबब बन गया है.
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चीन ने सीपीईसी के करीब 45 परियोजनाओं में करीब 40 अरब डॉलर का निवेश किया है जिसमें से आधे प्रोजेक्ट पूरे होने को हैं. चीन किसी भी सूरत में अपने भारी-भरकम आर्थिक और समय के निवेश की सुरक्षा चाहता है.

पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्तों की वजह से जैश जैसे आतंकी संगठनों से सीपीईसी परियोजना और उसमें काम कर रहे हजारों चीनी नागरिकों को सुरक्षा मिल जाती है. चीन की यह परियोजना बलूच अलगाववादियों के साथ-साथ पाकिस्तानी तालिबान के निशाने पर भी है जो चीन के शिनजियांग प्रांत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का विरोध करने का दावा कर रहे हैं. 2015 में पाकिस्तान ने सीपीईसी परियोजना की सुरक्षा में 20,000 जवानों की तैनाती की थी.
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मसूद अजहर से पहले बीजिंग जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद को आतंकी घोषित करने की कोशिशों को झटका दिया था लेकिन 26/11 के हमले के बाद 2008 में वैश्विक दबाव के बढ़ने के बाद बीजिंग को हाफिज सईद पर अंतराष्ट्रीय प्रतिबंध का समर्थन करना पड़ा था. अब देखना ये है कि पुलवामा हमले के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव से चीन को मसूद अजहर पर बैन लगाने को मजबूर कर पाता है या नहीं.
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