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चीन के सामने ये 4 मजबूरी, तभी पाकिस्तान के लिए छिड़कता है जान!

aajtak.in [Edited By: अमित दुबे]
02 May 2019
चीन के सामने ये 4 मजबूरी, तभी पाकिस्तान के लिए छिड़कता है जान!
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पिछले 10 सालों में चीन ने चार-चार बार जैश के सरगना मसूद अजहर को अंतराष्ट्रीय आतंकी बनने से बचाया. जब जब लगता था कि यूएन मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर देगा तब-तब ऐन वक्त पर चीन अपने वीटो का इस्तेमाल कर लेता था. बड़ा सवाल ये है कि आखिर चीन ऐसा कर क्यों रहा था? इसका सीधा सा जवाब है पैसा और पावर.   
चीन के सामने ये 4 मजबूरी, तभी पाकिस्तान के लिए छिड़कता है जान!
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दरअसल चीन ने पाकिस्तान में खरबों रुपये निवेश कर रखे हैं, इसलिए पाकिस्तान को नाराज नहीं कर सकता, और भारत में शांति हो ये चीन के हित में नहीं, लिहाजा वो पाकिस्तान के जरिए भारत को बस उलझाए रखना चाहता है. चीन आखिर पाकिस्तान का साथ देकर उसे क्यों बचा लेता है, इसी खास 4 वजह हैं.
चीन के सामने ये 4 मजबूरी, तभी पाकिस्तान के लिए छिड़कता है जान!
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PAK में अरबों डॉलर की चीनी निवेश (वजह नंबर 1)
पाकिस्तान में चीन सीपैक में 55 बिलियन डॉलर यानी 3.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है और कई प्रोजेक्ट्स में 46 बिलियन डॉलर यानी 3.2 लाख करोड़ रुपये खर्च कर चुका है. इसके अलावा पाक में पंजीकृत विदेशी कंपनियों में सबसे ज्यादा 77 चीन की हैं. वहीं ग्वादर पोर्ट के नजदीक चीन अपना पूरा का पूरा शहर बसा रहा है. यानी कुल मिलाकर चीन ने पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश कर रखा है. ऐसे में पाकिस्तान का साथ छोड़ने पर उसे मुश्किल हो सकती है.

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भारत को घेरने की कोशिश (वजह नंबर 2)
पूरे दक्षिण पूर्वी एशिया में चीन को टक्कर देने की ताकत अगर किसी के पास है तो वो भारत है. चीन उसे अपना सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिद्वंद्वी भी मानता है, इसलिए चीन चाहता है कि भारत और पाकिस्तान को आपस में उलझाकर रखा जाए. इस लिहाज से अगर वो मसूद के खिलाफ जाता तो भारत ना सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में मजबूत दिखता बल्कि पाकिस्तान के फ्रंट पर भी उसे राहत मिलती.
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चीनी जुल्मों सितम पर पाक खामोश (वजह नंबर 3)
खुद को मुसलमानों का हिमायती बताकर कश्मीर में युवाओं को बरगलाने वाला पाकिस्तान चीन में उईगर मुस्लिमों के मामले में आंख मूद लेता है. आपको बता दें कि चीन के उईगर मुसलमानों पर कई तरह के प्रतिबंध हैं. लेकिन इस मसले पर पाकिस्तान ने कभी चीन के खिलाफ आवाज नहीं उठाई. यही नहीं, इस्लामिक सहयोग संगठन के देशों में से सिर्फ पाकिस्तान ही इन प्रतिबंधों को सही मानता है, इसलिए चीन को इस मोर्चे पर भी पाक की जरूरत है.
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भारत के बढ़ते कद से चीन परेशान (वजह नंबर 4)
इसमें कोई शक नहीं है कि पिछले एक दशक से भारत ने आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर जो तरक्की की है. चीन उसे अपने लिए खतरा मानता है. साथ ही भारत-अमेरिका के अच्छे संबंध भी चीन के खिलाफ जाते हैं, इसलिए चीन ने मसूद अजहर को हथियार बना लिया है. जैसा भारत अजहर मसूद को समझता है, ठीक वैसे ही चीन दलाई लामा को मानता है और भारत ने दलाई लामा को शरण दे रखी है.
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चीन ये जानता है कि मसूद अजहर और पाकिस्तान में पलने वाले दूसरे आतंकी इंसानियत के लिए खतरा है. लेकिन वो भारत को अपने बराबर खड़ा होने से रोकना भी चाहता है. लिहाजा गाहे बगाहे वो पाकिस्तान में बैठे मसूद अजहर जैसे आतंकी को सहारा दे देता, जो आज नहीं तो कल उसे भी डसेंगे.
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