एडवांस्ड सर्च

Advertisement

चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?

aajtak.in
19 May 2020
चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
1/11
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 12 अप्रैल को ट्वीट कर भारत सरकार को आगाह किया था कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान भारत में आर्थिक मंदी का फायदा उठा विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों को सस्ते में टेकओवर कर सकती हैं. राहुल गांधी ने कहा था कि ऐसा होने से रोकने के लिए एफडीआई के नियम को बदलने की जरूरत है. दो दिन बाद ही भारत सरकार ने यह फैसला लिया कि भारत की सीमा से लगे जिन देशों से भी एफडीआई आएगी, उनका ऑटोमैटिक रूट बंद किया जाता है और अब भारत सरकार की मंजूरी जरूरी होगी.
चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
2/11
विश्लेषकों का मानना है कि भारत सरकार ने यह कदम मुख्य रूप से चीन के लिए उठाया था क्योंकि भारतीय कंपनियों के सस्ते में टेकओवर होने का डर चीन से ही था. दो दिन बाद भारत में चीन के राजदूत की इस पर प्रतिक्रिया भी आई और उन्होंने कहा कि यह निवेश के सामान्य नियमों के खिलाफ है.
चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
3/11
दरअसल, चीन का ये डर केवल भारत को लेकर ही नहीं है. यह डर यूरोप में भी है और अब यूरोपीय यूनियन में भी चीन के निवेश पर पाबंदी लगाने की बात उठ रही है. जर्मनी के सीनियर कंजरवेटिव नेता और यूरोपीय यूनियन की संसद में सेंटर-राइट राजनीतिक समूह यूरोपियन पीपल्स पार्टी के प्रमुख मैनफ्रेड वेबर ने मांग की है कि ईयू को अस्थायी रूप से यूरोप में चीनी कंपनियों के टेकओवर पर पाबंदी लगानी चाहिए.
चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
4/11
वेबर ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण बिजनेस में मंदी है इसलिए चीन की कंपनियां मजबूरी का फायदा उठाकर सस्ते में यूरोप की कंपनियों को खरीद लेंगी. वेबर ने कहा है कि चीन पर कम से कम 12 महीने की पाबंदी लगनी चाहिए.
चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
5/11
वेबर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, ''हमलोग देख रहे हैं कि चीन की कंपनियां अपनी सरकार के सहयोग से यूरोप की कंपनियों को खरीदने की कोशिश कर रही हैं. अगर ऐसा होता है तो यह बहुत ही सस्ता सौदा होगा. इसके साथ ही, भविष्य में इससे कई तरह की आर्थिक परेशानियां होंगी.''

चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
6/11
वेबर ने कहा कि ईयू को इससे बचने के लिए कोई रास्ता निकालना चाहिए और 'चीन शॉपिंग टूर' पर 12 महीने की पाबंदी लगानी चाहिए. हमें अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी. जब तक कोरोना वायरस के संक्रमण पर लगाम नहीं लग जाती है तब तक चीन को रोकना जरूरी है.'' चीन और यूरोपीय यूनियन में 2013 से ही व्यापक निवेश समझौते पर बात चल रही है.

चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
7/11
वेबर ने कहा है, ''चीन भविष्य में हमारा सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी बनने वाला है. यह चुनौती सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक तीनों स्तरों पर होगी. मेरा मानना है कि चीन में एक ऐसी सरकार है जो मनमानी करती है और यूरोप का वो रणनीतिक प्रतिस्पर्धी है. वो अपनी शक्ति का विस्तार करना चाहता है और अमेरिका की जगह लेने की कोशिश कर रहा है. यूरोप को चीन के मामले में गंभीर होने की जरूरत है.''
चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
8/11
पिछले महीने ही जर्मनी ने घरेलू कंपनियों को बचाने के लिए एफडीआई के नियमों को कड़ा किया था. जर्मनी ने यूरोपीय यूनियन से बाहर के निवेशकों के लिए अपनी कंपनियों के टेकओवर के नियम को सख्त कर दिया है. जर्मनी ने यह कदम तब उठाया है जब ईयू में चीन के साथ रिश्तों पर फिर से विचार करने की मांग उठ रही है. जर्मनी के अधिकारियों का कहना है कि 2016 में बावरियन रोबोटिक्स फर्म कुका की चीनी टेकओवर जर्मनी को जगाने वाला साबित हुआ है.
चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
9/11
कोरोना वायरस की महामारी के बीच चीन पर दुनिया भर के देशों का शक बढ़ा है. यहां तक कि उसके निवेश को भी शक की निगाह से देखा जा रहा है. चीन के साथ कभी जिन देशों के द्विपक्षीय संबंध अच्छे थे, अब वो भी शक कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया भी उन्हीं देशों में से एक है. ऑस्ट्रेलियाई बीफ और जौ का चीन सबसे बड़ा खरीदार है लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस को लेकर वैश्विक जांच की बात कही तो चीन बिदक गया और आयात बंद करने की धमकी दी है.
चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
10/11
चीन ने कहा है कि वह ऑस्ट्रेलिया से जौ आयात पर 80 फीसदी टैरिफ लगाने जा रहा है. इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के चार मीट प्रोसेसिंग प्लांट्स से बीफ आयात पर भी बैन लगा दिया है. अब लोगों का शक यकीन में बदलने लगा है कि चीन कोरोना महामारी पर ऑस्ट्रेलिया की राजनीतिक राय को लेकर उसे सजा देने की कोशिश कर रहा है.
चीन के खिलाफ भारत के इस कदम को कई देश क्यों अपनाने लगे?
11/11
उसी तरह अमेरिका ने भी और कई तरह के टैरिफ लगाने की बात कही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो चीन से हर तरह के रिश्ते तोड़ने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने फॉक्स बिजनेस नेटवर्क से यहां तक कह दिया था कि अगर चीन से अमेरिका हर तरह के संबंध तोड़ लेता है तो सालाना 500 अरब डॉलर का फायदा होगा.

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay