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भारत से बराबरी करते-करते बांग्लादेश से पिछड़ गया पाकिस्तान

प्रज्ञा बाजपेयी
11 February 2019
भारत से बराबरी करते-करते बांग्लादेश से पिछड़ गया पाकिस्तान
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बांग्लादेश की पहचान में गरीबी, विशाल आबादी और प्राकृतिक आपदा कभी स्थायी हुआ करती थी. पिछले दो सालों से बांग्लादेश म्यांमार से आए लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या से भी परेशान है. लेकिन बांग्लादेश को समस्याओं को पीछे छोड़कर अतीत से बाहर निकलना आता है. कुछ अर्थशास्त्री तो इसे अगला एशियाई शेर कहने लगे हैं.


(Photo: Reuters)

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 बांग्लादेश की पिछले साल आर्थिक वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही जो भारत की 8.0 फीसदी की आर्थिक वृद्धि से भी ज्यादा पीछे नहीं है. हैरानी की बात ये है कि बांग्लादेश इस मामले में पाकिस्तान को बहुत पीछे छोड़ चुका है. पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 5.8 फीसदी ही है. बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति कर्ज (434 डॉलर) पाकिस्तान के प्रति व्यक्ति कर्ज ($974) से आधा है.

बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार 32 अरब डॉलर पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार 8 अरब डॉलर के मुकाबले चार गुना ज्यादा है.

(Photo: Reuters)
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बांग्लादेश तरक्की की एक नई कहानी लिख रहा है. साल 2018 में ही बांग्लादेश के खाते एक बड़ी उपलब्धि भी दर्ज हुई जब यूएन ने 2024 तक बांग्लादेश को अल्पविकसित देशों की सूची से विकासशील देशों की श्रेणी में डालने की बात कही.

(Photo: Reuters)
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बांग्लादेश की इस तरक्की के पीछे निर्यात का बढ़ना है जो 1971 में शून्य से बढ़कर 2018 में 35.8 अरब डॉलर पहुंच गया है. बांग्लादेश में कपास का उत्पादन नहीं होता है लेकिन टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बांग्लादेश सिर्फ चीन से पीछे है. वहीं, पाकिस्तान का कुल निर्यात 24.8 अरब डॉलर का ही है. 

IMF के आकलन के मुताबिक, बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था 180 अरब डॉलर से बढ़कर 2021 तक 322 अरब डॉलर की हो जाएगी. इसका मतलब यह है कि औसतन एक बांग्लादेशी एक पाकिस्तानी के बराबर समृद्ध होगा और अगर पाकिस्तानी रुपए का आगे भी अवमूल्यन होता है तो 2020 तक बांग्लादेशी तकनीकी रूप से ज्यादा समृद्ध हो जाएंगे.

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कई और पैमानों पर अगर पाकिस्तान और बांग्लादेश की तुलना की जाए तो चौंकाने वाले आंकड़े मिलते हैं. पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश जब पाकिस्तान का हिस्सा था तो इसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था) की 1951 में आबादी 4.2 करोड़ थी जबकि पश्चिमी पाकिस्तान की आबादी 3.37 करोड़ थी लेकिन आज बांग्लादेश की आबादी 16.5 करोड़ है जबकि पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ है. बांग्लादेश में बढ़ती आबादी पर लगाम लगाने के लिए कई कैंपेन चलाए गए जिसका असर भी देखने को मिल रहा है जबकि पाकिस्तान में जनसंख्या वृद्धि को लेकर आज भी कोई भी कैंपेन नजर नहीं आता है.

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स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें तो भी बांग्लादेश का प्रदर्शन कम शानदार नहीं है. बांग्लादेश में पाकिस्तान के मुकाबले शिशु मृत्यु दर कम है. बांग्लादेश में जीवन प्रत्याशा (72.5 साल) पाकिस्तान में जीवन प्रत्याशा (66.5 साल) से कहीं ज्यादा है. ILO के मुताबिक, बांग्लादेश में रोजगाररत महिलाओं का प्रतिशत (33.2) है जबकि पाकिस्तान की 25.1 फीसदी महिलाएं ही रोजगार में हैं.

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पाकिस्तान का 'गरीब भाई' कैसे इतनी तेजी से समृद्ध हो रहा है? यह एक जटिल पहेली इसलिए भी है क्योंकि बांग्लादेश के पास ऐसी कोई भू-राजनीतिक पूंजी भी नहीं है जिसे वह अमेरिका, चीन या सऊदी अरब को बेच सके. बांग्लादेश के पास ना कोई परमाणु हथियार हैं, ना ही भारी-भरकम सेना है और ना ही खास बौद्धिक संपदा. यहां तक कि अपने जन्म के समय बांग्लादेश के पास प्रशिक्षित ब्यूरोक्रेसी भी नहीं थी. बांग्लादेश के पास ब्यूरोक्रेसी के नाम पर बस भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक पूर्व सदस्य था.

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पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, छोटे कद के और सांवले रंग के बंगालियों को पाकिस्तानी सिर्फ जूट-चावल उगाने और मछलियां पकड़ने के काम के लायक ही समझते थे. पाकिस्तानी रेडियो पर बंगाली लहजा सुनकर उनका मजाक उड़ाते थे. पाकिस्तानियों को लगता था कि अच्छे और असली मुस्लिम वही हैं जो लंबे-चौड़े, गोरे हों और अच्छी उर्दू बोलते हों. लेकिन आज वही बंगाली पाकिस्तानियों को पीछे छोड़ रहे हैं.

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1971 में पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना. पाकिस्तान के लिए यह एक बड़े सबक की तरह था लेकिन अब भी अधिकतर पाकिस्तानियों को यही लगता था कि बांग्लादेश आर्थिक रूप से अपना अस्तित्व नहीं बचा पाएगा और वापस पाकिस्तान की शरण में लौटने को मजबूर हो जाएगा.

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लोगों को लगा कि अब पाकिस्तान अपने कुछ खास लोगों को दुलारना छोड़कर सभी की भलाई के लिए कदम उठाएगा और अपनी विविधता से भरी संस्कृतियों को सम्मान देगा लेकिन इनमें से कुछ भी नहीं हुआ.

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पाकिस्तान ने इसे अपनी प्रतिष्ठा पर चोट की तरह लिया और बदले की आग में जलते हुए केवल भारत से हिसाब बराबर करने के बारे में सोचता रहा. आत्मसमर्पण के 6 सप्ताह बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की न्यूक्लियर बम के लिए की गई गोपनीय कॉल मुल्तान बैठक की तरफ बढ़ गई. प्रशासन के केंद्रीयकरण से उपजे स्थानीय लोगों की खिलाफत से पाकिस्तान ने कोई सबक नहीं लिया.

1973 में भुट्टो ने बलूचिस्तान में NAP सरकार को बर्खास्त कर दिया और सैन्य कार्रवाई का आदेश दे दिया. नतीजतन स्थानीय विद्रोह की शुरुआत हो गई जो फिर कभी नहीं बुझी. ऐसा करके जुल्फिकार ने अपने लिए ही फांसी का फंदा तैयार कर लिया था.

(Photo: Reuters)
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आज बांग्लादेश और पाकिस्तान की पहचान एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है क्योंकि दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को तय करने का नजरिया अलग है. बांग्लादेश मानव विकास और आर्थिक वृद्धि में अपना भविष्य देखता है. बांग्लादेश की सरकार निर्यात बढ़ाने, बेरोजगारी हटाने, स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने, कर्ज घटाने जैसे लक्ष्य तय करती है. किसी भी देश से विवाद की स्थिति में भी इस देश की प्राथमिकता बदलती नहीं है.

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पाकिस्तान के लिए विकास बाद में आता है. पाकिस्तान अपनी आधी से ज्यादा ताकत भारत पर खर्च करने में लगा रहता है. पाकिस्तान के अफगानिस्तान और ईरान से रिश्ते बिगड़े हुए हैं क्योंकि पाक दोनों पर भारत के करीब होने का आरोप लगाता रहता है.

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विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान के लिए यह समझना जरूरी है कि CPEC (चाइना-पाक इकनॉमिक कॉरिडोर) हो या ना हो, भारत से टैंक से टैंक और मिसाइल से मिसाइल की बराबरी करना असंभव है. असलियत यह है कि वह बांग्लादेश से भी पीछे छूट रहा है. अमेरिका, चीन और सऊदी अरब का बोला गया इमला लिखकर पाकिस्तान शायद कहीं ना पहुंच पाए.

(Photo: Reuters)
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