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घरों में ताबूत, दफनाने की जगह नहीं, कोरोना से यहां ऐसे हैं हालात

aajtak.in
17 March 2020
घरों में ताबूत, दफनाने की जगह नहीं, कोरोना से यहां ऐसे हैं हालात
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कोरोना वायरस के संक्रमण के डर ने लोगों को अकेले जीने और तन्हाई में ही मरने पर मजबूर कर दिया है. चीन के बाद कोरोना वायरस का नया गढ़ बन चुके इटली में हालात इतने भयावह हैं कि यहां लोग अपनों के अंतिम संस्कार में भी शरीक नहीं हो पा रहे हैं. कोरोना वायरस के खौफ के आगे तमाम सामाजिक ताने-बाने और सदियों से चले आ रहे रीति-रिवाज भी पीछे छोड़ने पड़ रहे हैं.
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न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इटली में कोरोना वायरस के संक्रमण से हुईं मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में कई प्रांतों में शवों के अंतिम संस्कार में भी देरी हो रही है. इटली के बर्गेमो कस्बे के एक अस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित 85 वर्षीय रेंजो कार्लो टेस्टा ने बुधवार को अंतिम सांसें लीं लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी उनका मृत शरीर अंतिम संस्कार के लिए इंतजार कर रहा है. कब्रिस्तान को पहले ही लोगों के लिए बंद किया जा चुका है.

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टेस्टा की 50 वर्षीय पत्नी फ्रैंका स्टेफनली अपने पति का अंतिम संस्कार सारे रीति-रिवाजों के साथ करना चाहती थीं. लेकिन कोरोना संक्रमण रोकने के लिए इटली में लगाई गईं तमाम पाबंदियों की वजह से पारंपरिक रूप से अंतिम संस्कार गैर-कानूनी हो गया है. यहां अंतिम संस्कार समेत किसी भी प्रक्रिया के लिए लोग एक जगह जमा नहीं हो सकते हैं. वैसे भी, फ्रैंका और उनके बेटे खुद बीमार हैं और उन्हें कोरोना संक्रमण के शक में एकांत जगह पर रखा गया है इसलिए वह अपने पति के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाईं. स्टेफनली कहती हैं, ये बेहद अजीब है. मैं नहीं बता सकती कि मैं किन अनुभवों से गुजर रही हूं. ये गुस्सा नहीं है. ये वायरस के सामने हमारी बेबसी है.
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यूरोप में कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित इटली की सड़कें पहले ही खाली हैं और दुकानें बंद पड़ी हैं जबकि 6 करोड़ नागरिक अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं. इटली में यूरोप की सबसे बुजुर्ग आबादी बसती है और कोरोना बुजुर्गों को ही सबसे आसानी से अपना शिकार बना रहा है. इटली में इस महामारी का अंदाजा यहां हो रही मौतों से लगाया जा सकता है. इटली में अब तक 2100 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं जो चीन के बाहर का सबसे बड़ा आंकड़ा है. सोमवार को ही यहां 300 से ज्यादा लोगों की मौतें हो गईं.
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इटली के लॉमबार्डी इलाके के बर्गेमो कस्बे के हालात सबसे खराब हैं. यहां लगातार मौतों की वजह से लाशों के ढेर लगते जा रहे हैं. बर्गेमो में सोमवार तक संक्रमण के कुल 3760 मामले सामने आ चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि ये कोरोना वायरस का केंद्र बन चुका है. यहां के अस्पतालों के शवगृह भर चुके हैं. बर्गेमो के मेयर गियार्गियो गोरी को इसी सप्ताह स्थानीय कब्रिस्तान को बंद करने का अध्यादेश जारी करना पड़ा. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब कब्रिस्तान को बंद किया गया है. हालांकि, मेयर ने यह आश्वासन दिया कि मार्चुरी (शवगृह) अभी भी ताबूतों को स्वीकार करेगा. इनमें से कई शवों को बर्गेमो के चर्च ऑफ ऑल सेंट्स भेजा जाएगा. ये चर्च एक बंद कब्रिस्तान में ही स्थित है जहां पहले से ही लकड़ी के ताबूतों के ढेर लगे हुए हैं.
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चर्च के पादरी मार्को बर्गेमिली ने कहा, बदकिस्मती से हमें नहीं पता कि हम उन्हें कहां रखें. हर रोज सौ से ज्यादा लोगों की मौतें हो रही हैं और हर एक शव के दाह-संस्कार में एक घंटे से ज्यादा का वक्त लगता है. यहां अजीब स्थिति पैदा हो गई है. अंतिम संस्कार में काफी वक्त लगता है और मरने वालों की तादाद ज्यादा है.
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पिछले सप्ताह ही इटली में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए एक आपातकालीन राष्ट्रीय कानून लागू किया गया है, जिसके तहत किसी भी निजी समारोह या धार्मिक समारोह पर बैन है. अधिकारियों ने अंतिम संस्कार के दौरान सिर्फ चुनिंदा परिजनों को शामिल होने और पादरियों को प्रार्थना करने की अनुमति दी है. जोगनो गांव में लगातार हो रही मौतों की वजह से पादरी को भी एक रिवाज बदलने का फैसला करना पड़ा. उन्होंने तय किया कि मौत की सूचना देने के लिए इस्तेमाल होने वाली घंटी को अब वह दिन में सिर्फ एक बार ही बजाएंगे.
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कोरोना वायरस के संक्रमण के डर की वजह से परिवार के सदस्यों को भी संक्रमित शख्स से दूर रखा जा रहा है. ऐसे में संक्रमित शख्स जीवन के आखिरी पलों में परिजनों और दोस्तों से मिले बिना ही दुनिया को अलविदा कहने को मजबूर हैं. सेने के मेयर गियार्गियो वालोती की भी पिछले शुक्रवार को मौत हो गई. उनकी उम्र 70 साल थी. उनके बेटे एलेसैंड्रो का कहना है कि बर्गिमो के मुख्य अस्पताल में जिस दिन उनके पिता की मौत हुई, उसी दिन 90 और लोगों की भी मौत हुई. वह कहते हैं, यह वायरस इस घाटी में नरसंहार कर रहा है, हर परिवार अपने किसी करीबी को खोता जा रहा है. बर्गेमो में शवों के इतने ढेर लग गए हैं कि लोगों को समझ ही नहीं आ रहा कि उनका क्या करें.
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बर्गेमो के बाहर एक छोटे से गांव फियाबियो में शनिवार को एक एंबुलेंस लूका करारा के कोरोना से संक्रमित पिता को लेने आई. अगले दिन उनकी मां को भी अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद लूका को अलग जगह रख दिया गया और वह अपने माता-पिता से आखिरी बार भी नहीं मिल सके. उनके माता-पिता के शव अस्पताल के शवगृह में दाह संस्कार की प्रतीक्षा में हैं. लूका कहते हैं, मुझे बहुत अफसोस है कि वे अब भी वहां है, अब भी अकेले हैं.
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इसी गांव के रहने वाले लूका गी पाल्मा के पिता विटोरियो की भी कोरोना वायरस की चपेट में आने से मौत हो गई है. जब उन्होंने फ्यूनरल होम को फोन मिलाया तो जवाब मिला कि शवों के लिए उनके पास जगह नहीं बची है. इसके बाद उन्होंने पाल्मा के घर पर एक ताबूत, कुछ मोमबत्तियां, एक क्रॉस और मॉर्चुरी रेफ्रिजरेटर भिजवा दिया ताकि वह अपने घर में अपने पिता के शव को कुछ वक्त के लिए रख सकें.
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हालांकि, दक्षिणी इटली में जहां रोमन कैथोलिक परंपराएं बेहद मजबूत हैं, वहां लोग तमाम पाबंदियों के बावजूद अंतिम संस्कार के रिवाज को निभाना नहीं छोड़ रहे हैं. स्थानीय अधिकारियों ने एक शोकसभा में गए 48 लोगों को नियमों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है और अब उन्हें तीन महीने की जेल हो सकती है.
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यहां के कुछ पादरी लोगों को उम्मीद बंधा रहे हैं कि यह मुश्किल वक्त गुजर जाएगा लेकिन फिलहाल लोग संयम और सावधानी से काम लें.
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