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5 छोटी-छोटी, मगर मोटी कहानियां

कहानियां शब्दों की मोहताज नहीं होतीं. इसलिए कम पढ़ाया जाए और ज्यादा व्याख्या के लिए छोड़ दिया जाए, तो बेहतर है.

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aajtak.in [Edited By: कुलदीप मिश्र]नई दिल्ली, 15 May 2015
5 छोटी-छोटी, मगर मोटी कहानियां Short Stories

कहानियां शब्दों की मोहताज नहीं होतीं. इसलिए जितना कम पढ़ाया जाए और जितना ज्यादा व्याख्या के लिए छोड़ दिया जाए, असर उतना ज्यादा होता है. आपके लिए पेश हैं पांच बेहद छोटी कहानियां, जिन्हें पढ़कर उन हालात के बारे में आप देर तक सोच सकते हैं.

1. उसका प्यार उसकी पकड़ में था. उसे बस थोड़ा हौसला जुटाना था; और एक प्लान बनाना था अपनी पत्नी से छुटकारा पाने का.

2. 5 साल का एक बच्चा समंदर किनारे नंगे पांव घूम रहा था. समंदर की लहरें आतीं और उसके पैर भिगोकर चली जातीं. वह लहरों से एक ही बात बार-बार कहता, 'तुमने मेरे मां-बाप को मुझसे छीना है. हजार बार भी पैर छूकर माफी मांगों, तो तुम्हें माफ नहीं करूंगा.'

3. उसने अपने मोबाइल पर टाइप किया, तलाक...तलाक...तलाक और ड्राफ्ट में सेव करके रख लिया. (- नीधीश त्यागी)

4. वह दीन-हीन क्लर्क घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया. मीलों दूर, घर पर उसकी पत्नी इंतजार कर रही थी, कि उसका पति बेटी के कैंसर के इलाज के लिए रुपये लेकर आता ही होगा.

5. 'अमीरों के घर में पैदा हुआ है, उसकी जिंदगी शाही होगी.' इधर पड़ोसियों ने यह खुसफुस की, उधर जन्नत में कहीं तीन अजन्मी बहनों के आंसू बह निकले.

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