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मैं नहीं गया किसी मस्जिद तक, मुझे मत मारो

पेशावर हमले के बाद एक कविता, 'मैं दंगाई नहीं, मुझे मत मारो.'

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aajtak.in [Edited By: कुलदीप मिश्र]नई दिल्ली, 17 December 2014
मैं नहीं गया किसी मस्जिद तक, मुझे मत मारो Pakistan Peshawar Attack

मैं दंगाई नहीं
मैं आज तक
नहीं गया
किसी मस्जिद तक
किसी मंदिर के अंदर क्या है
मैंने नहीं देखा,
सुनो
रुको
मुझे गोली न मारो
भाई
तुम्हें तुम्हारे मजहब का वास्ता
मत तराशो
अपने चाकू मेरे सीने पर,
जाने दो मुझे
मुझे
तरकारियां ले जानी हैं
मां
रोटिया बेल रही होंगी!

पेशावर हमले पर यह कविता हमें आज तक के पाठक अमित आनंद ने भेजी है. आप भी कविताएं या कहानियां लिखते हैं तो उसे booksaajtak@gmail.com पर भेज सकते हैं.

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