एडवांस्ड सर्च

नाट्य समीक्षा: युद्ध की विभीषि‍का को दर्शाती है 'गजब तेरी अदा'

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कमानी सभागार में बीते दिनों वामन केन्द्रे के निर्देशन में नाटक 'गजब तेरी अदा' का मंचन हुआ. 17वें भारत रंग महोत्सव के तहत प्रस्तुत इस नाटक को प्रथम विश्व युद्ध के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में तैयार किया गया है. यह नाटक 'ररिस्टोफेनिस' के नाटक 'लिसिस्त्राता' से प्रेरित है.

Advertisement
aajtak.in
अभिषेक रंजन [Edited By: स्वपनल सोनल] 25 February 2015
नाट्य समीक्षा: युद्ध की विभीषि‍का को दर्शाती है 'गजब तेरी अदा' नाट्य मंचन का एक दृश्य

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कमानी सभागार में बीते दिनों वामन केन्द्रे के निर्देशन में नाटक 'गजब तेरी अदा' का मंचन हुआ. 17वें भारत रंग महोत्सव के तहत प्रस्तुत इस नाटक को प्रथम विश्व युद्ध के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में तैयार किया गया है. यह नाटक 'ररिस्टोफेनिस' के नाटक 'लिसिस्त्राता' से प्रेरित है.

नाटक की कहानी युद्ध से होने वाली कई प्रकार की विभीषिका को दर्शाती है. हालांकि, नाटक के घटनाक्रम और स्थान दोनों ही काल्पनिक हैं. नाटक के माध्यम से निर्देशक वामन केन्द्रे ने राजाओं के मन में राज विस्तार के लिए न खत्म होने वाली अभिलाषा और उसके लिए लड़ी जाने वाली युद्ध और उससे भविष्य में उत्पन होने वाले खतरों को दिखाया है. नाटक में कलाकारों की एक मंडली है, जो राजा को इस सब के प्रति सचेत करते हैं लेकिन राजा उस पर ध्यान नहीं देता.

दूसरी ओर, कुछ भयभीत महिलाएं एकजुट होकर युद्ध बंद करने के लिए राजा और अपने पतियों के खि‍लाफ हो जाती हैं. इन महिलाओं ने मिलकर प्रण किया कि जब तक उनके पति युद्ध बंद नहीं कर देते, तब तक वे अपने पति के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाएंगी. उन्हें अपने शरीर को हाथ भी नहीं लगाने देंगी. अहिंसात्मक ढ़ग से अपनाए गए इस अनोखे विरोध से हिंसा पसंद राजा और युद्ध प्रिय सैनिक हथियार डाल देते हैं.

नाटक का संगीत भी काफी अच्छा है. पूरे नाटक में एक लयबद्धता है जो दर्शकों को नाटक के अंत तक बांधे रखता है. नाटक में कहीं कोई भटकाव नहीं दिखता. संगीत, संवाद, अभिनय इस नाटक की जान है. इस नाटक का अंत मानवता और शांति की गुहार के साथ होती है. 2014 प्रथम विश्व युद्ध का शताब्दी वर्ष था. इस नाटक के माध्यम से नाटककार ने इस युद्ध में शहीद हुए सैनिकों और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि दी है.

-अभिषेक रंजन, भारतीय भाषा केंद्र जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र हैं.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay