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मैं प्यार की ख़ुशबू हूं, महकूंगा जमानों तक: पंकज उधास से खास बातचीत

मखमली आवाज वाले मशहूर गजल गायक पंकज उधास अपनी नई पेशकश के साथ तैयार हैं. उनकी नई गजल एलबम रविवार को नोएडा के जीआईपी मॉल में रिलीज होगी. इसी सिलसिले में हमारी उनसे बात हुई.

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aajtak.in
कुलदीप मिश्रनई दिल्ली, 04 July 2015
मैं प्यार की ख़ुशबू हूं, महकूंगा जमानों तक: पंकज उधास से खास बातचीत Pankaj Udhaas

मखमली आवाज वाले मशहूर गजल गायक पंकज उधास अपनी नई पेशकश के साथ तैयार हैं. उनकी नई गजल एलबम रविवार को नोएडा के जीआईपी मॉल में रिलीज होगी. इस एलबम में सिर्फ एक ही गजल है और इस तरह की यह संभवत: पहली एलबम है. यह गजल शायर और गीतकार आलोक श्रीवास्तव ने लिखी है.

इसी सिलसिले में हमारी पंकज उधास से बात हुई. उन्होंने अपनी नई पेशकश के साथ गजल की दुनिया के मौजूदा स्वरूप पर भी बात की और अपने बरसों के अनुभव और यादगार किस्से साझा किए. पेश हैं बातचीत के अंश:

इस एलबम के बारे में बताएं. सिंगल गजल एलबम लाने के पीछे क्या ख्याल था?
गजलों की दुनिया में रवायत रही है ऐसी एलबम बनाने की, जिसमें सात-आठ गाने होते हैं. लोगों ने पुरानी गजलों के कवर वर्जन अलग से गाए हैं, लेकिन एक नई गजल को 'गजल सिंगल' के तौर पर लाने का तजुरबा शायद किसी ने नहीं किया. इसे सिंगल के तौर पर लाने की बड़ी वजह यह थी कि अदबी तौर पर, यानी पोएटिक नजरिये से आलोक भाई ने बहुत उम्दा गजल कही है. इसका हर मतला और हर शेर लाजवाब है. तो हमने सोचा कि एक ही गजल को हाईलाइट करें.

एलबम का नाम है 'ख्वाबों की कहानी'. ये आपका चुना नाम है या उसी गजल का हिस्सा है?
(शेर पढ़ते हैं) 'तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक, मेरी तो निगाहें हैं, सूरज के ठिकानों तक.' जाहिर तौर पर यह गजल सपनों की कहानी है. इसके साथ-साथ एक मिसरे में एक जगह आता भी है, 'टूटे हुए ख्वाबों की इक लंबी कहानी है.'

गजल के वीडियो के बारे में बताइए.
कुशल श्रीवास्तव ने यह वीडियो डायरेक्ट किया है, जो जेपी दत्ता के साथ जुड़े रहे हैं. वह राजस्थान की पृष्ठभूमि को पर्दे पर उकेरने में माहिर हैं. राजस्थान के लैंडस्केप के जरिये उन्होंने गजल को बखूबी बयान किया है. कुछ हिस्सा बाड़मेर में शूट हुआ है और कुम्हलगढ़ में.

आलोक श्रीवास्तव को ही क्यों चुना इस गजल के लिए?
दरअसल ये पूरा प्रोजेक्ट एक इत्तेफाक है. आलोक भाई को काफी समय से जानता हूं. उन्होंने एक टीवी शो के लिए टाइटल सॉन्ग लिखा था. उन्होंने मुझसे कहा कि आप धुन बनाइए और इसे गाइए. इसी सिलसिले में हम मुंबई में मिले. हम बैठे हुए बात कर रहे थे तो आलोक भाई ने गजल का मतला और दो-चार शेर सुनाए. मैंने कहा कि इसे रिकॉर्ड करना चाहिए. तो यहीं से बात शुरू हुई और अब बहुत जल्द आपके सामने होगी.

आपकी गाई गजलों में आपके दिल के करीब कौन सी है?
ये मुश्किल सवाल है. कई गजलें हैं. कोई एक चुननी हो तो 'दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है'.

अच्छे मुकाम वाले गजल गायकों में हिंदुस्तान में आप इकलौते हैं. गजल सुनने वालों और गजल के मौजूदा परिदृश्य को आप कैसे देखते हैं?
इस बात को मैंने और मेरे साथियों ने बड़े गौर से समझने की कोशिश की है. हमेशा ही फिल्मी संगीत का प्रभुत्व रहा है. लेकिन एक समय था जब फिल्मों में मजरूह सुल्तानपुरी, साहिर और शैलेंद्र जैसे लोग गाने लिखते थे. यानी तब फिल्मी गीतों में भी गजल और कविता थी. तो हमारे सुनने वाले ज्यादा अंतर नहीं करते थे. फिर एक ऐसा दौर आया 90 के बाद जब सिनेमा का संगीत भारतीय संगीत से दूर होता गया. अब तो फिल्मी संगीत ने गजलों-भजनों और कव्वालियों से अलग ही कोई विधा पकड़ ली है. नौजवानों को अब वही सब पसंद आता है.  नई नस्ल के बच्चों का हमारे म्यूजिक से डिसकनेक्ट हो गया है. दूसरा फर्क जुबान का भी है. उर्दू तो छोड़िए अब तो बच्चे हिंदी से भी दूर होते जा रहे हैं.

लोग दिन में फिल्मी संगीत सुनते होंगे, लेकिन रात में जब इश्क सताता है तो गजल ही लगाते हैं.
(हंसते हैं.) हां यही बात मैं एक पत्रकार मित्र से कुछ दिन पहले कह रहा था. आदमी धूमधड़ाके से थक जाता है तो यहीं लौट आता है. गजल का मुकाम नहीं खत्म हुआ है. आज गजल प्राथमिकता भले ही न हो, पर पहला विकल्प जरूर है.

इस दौर में कोई आपसे फिल्म में गाने को कहे, आपके मिजाज का कोई गाना, तो गाएंगे?
जरूर गाना चाहूंगा. पर सच तो यही है मौजूदा माहौल में गुंजाइश बहुत कम बची है.

आपने तमाम शो दुनिया भर में किए हैं. कोई यादगार किस्सा शेयर करना चाहेंगे?
हां तमाम किस्से हैं. एक बार न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर में प्रोग्राम था. प्रोग्राम के बाद एयरपोर्ट जाना था. जिन्हें लेकर जाना था, उन्होंने गाड़ी कहीं दूर पार्क कर दी थी. तो तय हुआ कि टैक्सी से चला जाए. हमने टैक्सी ली. एयरपोर्ट पहुंचना था तो हमने टैक्सी वाले से गाड़ी थोड़ी तेज चलाने को कहा, तो अगला पलटकर क्या कहता है, 'जरा आहिस्ता चल.'

मैं हैरान रह गया क्योंकि यह तो मेरी गाई गजल है, 'दर्द की बारिश सही मद्धम, जरा आहिस्ता चल.' तो मैंने कहा कि भाई लगते तो गोरे हो, हिंदी जानते हो? उसने बताया कि वह अफगानी है और मेरा फैन है. बोला-'आपके प्रोग्राम के बारे में पता चला तो रात से यहां टैक्सी लगाकर बैठा हूं.' हमें एयरपोर्ट छोड़कर वह गले मिल गया और टैक्सी का किराया भी नहीं लिया.

एलबम 5 जुलाई को दोपहर 12 बजे नोएडा के 'द ग्रेट इंडिया पैलेस मॉल' में रिलीज की जाएगी. इस रिलीज-इवेंट का रेडियो पार्टनर Oye FB और ऑनलाइल पार्टनर aajtak.in है.

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