एडवांस्ड सर्च

'औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया'

8 मार्च को अब दुनिया 'महिला दिवस' के रूप में मनाती है. औरत के हक-हकूक के पक्ष में भी साहिर ने अपनी कलम खूब चलाई. उनकी नज्म 'औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया..' की प्रासंगिकता आज बढ़ गई है. साहिर अगर आज जिंदा होते, तो 94 वर्ष के होते, उन्हें याद करते हुए पढ़िए और सुनिए उनकी ख्यात नज़्म...

Advertisement
नंदलाल शर्मानई दिल्ली, 08 March 2015
'औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया' Sahir Ludhianavi

साहिर लुधियानवी मुख्‍य रूप से एक ऐसे शायर के रूप में प्रसिद्ध थे, जो आम आदमी की रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी परेशानियों और उनके सब्र के इम्तिहान के बारे में लिखते थे. उनका जन्म 8 मार्च 1921 में लुधियाना के एक जागीरदार घराने में हुआ था. 8 मार्च को अब दुनिया 'महिला दिवस' के रूप में मनाती है. औरत के हक-हकूक के पक्ष में भी साहिर ने अपनी कलम खूब चलाई. उनकी नज्म 'औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया..' की प्रासंगिकता आज बढ़ गई है. साहिर अगर आज जिंदा होते, तो 94 वर्ष के होते, उन्हें याद करते हुए पढ़िए और सुनिए उनकी मशहूर नज़्म...

औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया

औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया
जब जी चाहा कुचला मसला, जब जी चाहा धुत्कार दिया

तुलती है कहीं दीनारों में, बिकती है कहीं बाजारों में
नंगी नचवाई जाती है, ऐय्याशों के दरबारों में
ये वो बेइज्जत चीज है जो, बंट जाती है इज्जतदारों में

मर्दों के लिये हर जुल्म रवां, औरत के लिये रोना भी खता
मर्दों के लिये लाखों सेजें, औरत के लिये बस एक चिता
मर्दों के लिये हर ऐश का हक, औरत के लिये जीना भी सजा

जिन होठों ने इनको प्यार किया, उन होठों का व्यापार किया
जिस कोख में इनका जिस्म ढला, उस कोख का कारोबार किया
जिस तन से उगे कोपल बन कर, उस तन को जलील-ओ-खार किया

मर्दों ने बनायी जो रस्में, उनको हक का फरमान कहा
औरत के जिन्दा जल जाने को, कुर्बानी और बलिदान कहा
किस्मत के बदले रोटी दी, उसको भी एहसान कहा

संसार की हर एक बेशर्मी, गुर्बत की गोद में पलती है
चकलों में ही आ के रुकती है, फाकों में जो राह निकलती है
मर्दों की हवस है जो अक्सर, औरत के पाप में ढलती है

औरत संसार की किस्मत है, फिर भी तकदीर की हेती है
अवतार पैगंबर जनती है, फिर भी शैतान की बेटी है
ये वो बदकिस्मत मां है जो, बेटों की सेज पे लेटी

औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया
जब जी चाहा कुचला मसला, जब जी चाहा धुत्कार दिया

अब लताजी की आवाज में ये नज़्म

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay