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गुस्ताब जैनुक: काफ्का के संस्मरण

संस्मरण की एक ऐसी ही किताब गुस्ताव जैनुक की है, जिन्होंने फ्रांज काफ्का से हुई मुलाकातों की बातचीत को लिखा है. किताब का नाम 'काफ्का के संस्मरण' हैं.

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Sahitya Aajtak 2018
aajtak.in [Edited By: स्नेहा]नई दिल्‍ली, 10 April 2015
गुस्ताब जैनुक: काफ्का के संस्मरण गुस्ताव जैनुक की किताब काफ्का के संस्मरण

संस्मरण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह अतीत के दरवाजे खोलते हुए वर्तमान को प्रभावित करना चाहती है. उसमें भी अगर संस्मरण किसी ऐसे लेखक का हो , जिसकी कृतियों ने विश्व साहित्य पर अपनी मजबूत छाप छोड़ी हो तो तब उसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है .

संस्मरण की एक ऐसी ही किताब गुस्ताव जैनुक की है, जिन्होंने फ्रांज काफ्का से हुई मुलाकातों की बातचीत को लिखा है. किताब का नाम 'काफ्का के संस्मरण' हैं. इस किताब का हिंदी अनुवाद वल्लभ सिद्धार्थ ने किया है.

इस किताब की खासियत यह है कि आपको काफ्का की रचनाओं को पढ़े बगैर ही उनके बारे में बहुत कुछ जानने का मौका मिलता है. इस किताब में काफ्का की बातचीत लेखक से ज्यादा एक दर्शनशास्त्री की तरह है, जो अपनी हर बात पर आपको सोचने के लिए विवश करता है.

पढ़िये इस किताब की महत्वपूर्ण पंक्तियां:

'कितनी बार न्याय के नाम पर अन्याय नहीं होता, पुण्य का झंडा उठाकर पाप नहीं चलता, पतन को उत्थान के रूप में पेश नहीं किया जाता? अब तो यह साफ-साफ दिखने लगा है कि युद्ध ने इस संसार को सिर्फ जलाया और तार-तार ही नहीं किया, उसे प्रज्वल्लित भी कर दिया है. हम देख रहे हैं कि यह मनुष्य का मनुष्य के लिए बुना गया जाल है. बर्फानी-मशीनी मानवों की दुनिया, जिसकी ऐशपरस्ती और मकसद हमें लगातार कमजोर और अपमानित करते हैं. '

' मरना एक मानवीय प्रक्रिया है, इसलिये मनुष्य मरते हैं, लेकिन बंदर समूची मानव जाति में जीवित रहता है......यह अतीत से प्राप्त एक कठघरे के अलावा कुछ नहीं, जिसमें भविष्य की सपनीली सलाखें जुड़ी हुई हैं.'

'मैं एस्कीमों नहीं, लेकिन आज के बहुसंख्यक लोगों की तरह मैं भी घोर शीत में रहता हूं. जबकि हमारे पास न तो एस्कीमों जैसे रोएंदार पोशाक हैं, न उन जैसे जीने के दूसरे साधन. उनकी तुलना में हम एकदम नंगे हैं. आज की दुनिया में गर्म वे ही हैं, जो भेड़ों की खाल में हैं.'

'सच जो जीवन की कुछ अमूल्य चीजों में से एक है, खरीदा नहीं जा सकता है. प्रेम और सौंदर्य की तरह सच भी मनुष्य को एक भेंट के रूप में मिलता है मगर अखबार एक जिंस है, जिसे खरीदा और बेचा जा सकता है.'

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