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कांग्रेस को बाहर से समर्थन देगी एनसीपी: भुजबल

महाराष्ट्र में सरकार गठन पर कोई फैसला नहीं हो पाया है. एनसीपी नेता छगन भुजबल ने कहा है कि अगर मुद्दे नहीं सुलझे, तो उनकी पार्टी कांग्रेस को बाहर से  समर्थन देगी.

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आज तक ब्‍यूरो/ भाषानई दिल्‍ली/ मुंबई, 03 November 2009
कांग्रेस को बाहर से समर्थन देगी एनसीपी: भुजबल

महाराष्ट्र में सरकार गठन पर अभी भी कोई फैसला नहीं हो पाया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता छगन भुजबल ने कहा है कि अगर मुद्दे नहीं सुलझे, तो उनकी पार्टी कांग्रेस को बाहर से  समर्थन देगी.

मुद्दे सुलझने के बाद ही सरकार में भागीदारी
भुजबल ने कहा कि प्रदेश में सरकार कांग्रेस की ही बनेगी. उन्‍होंने कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस से साथ मुद्दे सुलझने के बाद ही सरकार में शामिल होगी. उन्‍होंने मांग की कि पदों का बंटवारा वर्ष 1999 की तर्ज पर होना चाहिए. इससे पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल ने सरकार बनाने में हो रहे विलंब को देखते हुए कार्यवाहक मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल से मुलाकात की.

अहम पदों को लेकर खींचतान जारी
विधानसभा चुनावों के परिणाम की घोषणा 22 अक्तूबर को हो गई, लेकिन नई सरकार ने अब तक शपथ नहीं ली है. विभागों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और राकांपा के बीच चल रही खींचतान के कारण सरकार बनाने में देरी हो रही है.

सत्ता का फॉर्मूला अब भी उलझा
महाराष्ट्र में सत्ता का फॉर्मूला अब भी उलझा हुआ है. कांग्रेस और एनसीपी दोनों की नजरें कुछ मलाईदार विभागों पर गड़ी है. इधर सरकार बनाने के लिए दावा पेश करने की आज आखिरी तारीख है, ऐसे में कांग्रेस ने अपने तेवर में कुछ नरमी के संकेत दिए हैं.
 
मलाईदार पदों की चाहत कायम
महाराष्ट्र में मलाईदार पदों को लेकर मारामारी जारी है. सत्ता की साझेदारी का नया फॉर्मूला क्या हो, इस बात पर कांग्रेस औऱ एनसीपी में मतभेद अब भी बरकरार है, लेकिन मुश्किल ये है कि विधानसभा का कार्यकाल आज खत्म हो रहा है और नई सरकार के गठन का मामला और ज्यादा नहीं टाला जा सकता. ऐसे में खबर है कि रुख नरम करते हुए कांग्रेस गृह और एक्साइज मिनिस्ट्री एनसीपी को देने को तैयार हो गई है, लेकिन कुछ दूसरे अहम मंत्रालयों को लेकर मामला अब भी अटका हुआ है.

मंत्रियों की संख्‍या पर भी गतिरोध
कांग्रेस इस बार ग्रामीण विकास मंत्रालय अपने पास रखना चाहती है, जो कि फिलहाल एनसीपी के पास है. बदले में कांग्रेस ने पर्यावरण और वन मंत्रालय देने की पेशकश की है, लेकिन एनसीपी ग्रामीण विकास के बदले में शहरी विकास मंत्रालय जैसा अहम विभाग चाहती है. मामला इस बात पर भी अटका है कि किसके खाते में मंत्रियों के कितने पद जाएंगे. इस विधानसभा चुनाव में पिछले के मुकाबले 20 सीटें ज्यादा पाने वाली कांग्रेस 1999 के फॉर्मूले को मानने को तैयार नहीं है.

खींचतान जारी रहने के आसार
कांग्रेस औऱ एनसीपी के तेवर को देखते हुए लगता नहीं कि कैबिनेट के बंटवारे का मामला इतनी जल्दी सुलझेगा. ऐसे में मुमकिन है कि मुख्यमंत्री के शपथग्रहण के बाद भी कुछ दिनों तक ये खींचतान चलती रहे.

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