एडवांस्ड सर्च

Advertisement

जेटली बोले, ज्यादा छूट न दे पाने का अफसोस

आज तक से एक्सक्लूसिव बातचीत में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अफसोस जताया है कि वह देश के आयकरदाता को ज्यादा छूट नहीं दे सके. उन्होंने कहा कि टैक्स स्लैब में मन मुताबिक छूट नहीं दे पाने का अफसोस है. काश मुझे बेहतर विरासत मिली होती है तो करदाताओं को 50 हजार रुपये से ज्यादा की छूट देता.
जेटली बोले, ज्यादा छूट न दे पाने का अफसोस वित्त मंत्री अरुण जेटली
राहुल कंवल [Edited By: संदीप कुमार सिन्हा]नई दिल्ली, 11 July 2014

आज तक से एक्सक्लूसिव बातचीत में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अफसोस जताया है कि वह देश के आयकरदाता को ज्यादा छूट नहीं दे सके. उन्होंने कहा कि टैक्स स्लैब में मन मुताबिक छूट नहीं दे पाने का अफसोस है. काश मुझे बेहतर विरासत मिली होती है तो करदाताओं को 50 हजार रुपये से ज्यादा की छूट देता.

राहुल कंवल से एक्सक्लूसिव बातचीत में अरुण जेटली ने कहा, 'आजादी के बाद यह पहला मौका है जब किसी वित्त मंत्री ने एक बार में टैक्स स्लैब में 50 हजार रुपये की छूट दी है. इसके अलावा मैंने 80C के जरिए किए जाने वाली बचत पर 50 हजार रुपये की छूट दी. मैंने हाउसिंग लोन पर भी 50 हजार रुपये की छूट दी. इस तरह से तीन श्रेणी में 50-50 हजार रुपये की छूट दी. इस फैसले का असर करोड़ों लोगों पर होगा. 5 से 45 हजार तक की बचत होगी, जिसका फायदा करोड़ों लोगों को होगा. मुझे खेद सिर्फ एक बात का है कि अगर मुझे बेहतर विरासत मिली होती तो इस दिशा में और बड़ा फैसला कर पाता.'

महंगाई और देश में सूखे की संभावना के सवाल पर उन्होंने कहा, 'सप्लाई का प्रत्यक्ष असर महंगाई पर पड़ता है. आयात किए जाने वाले तेल की भूमिका रहती है. पिछले साल नवंबर-दिसंबर में प्याज के दाम 80-90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे पर सरकार इसे कम करने में विफल रही. वहीं हमारी सरकार के दौरान प्याज 18 से बढ़कर 25 रुपये प्रति किलो ही हुआ था कि हमने कार्रवाई की. हमारी सरकार प्रो-एक्टिव है, इसका सकारात्मक तो असर पड़ेगा ही. सूखे को भी लेकर हमने योजना बना रखी है. फिलहाल इस प्लान को सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है. अगस्त तक अगर बारिश अच्छी हो जाती है तो सूखा नहीं पड़ेगा. मध्य-पूर्व एशिया में भी स्थिति सुधरी है, तेल की कीमतों में गिरावट आई है. इसका असर धीरे-धीरे पड़ेगा.'

अरुण जेटली ने कहा, 'लोगों के अच्छे दिन तब आएंगे जब देश के अच्छे दिन आएंगे. यूपीए सरकार ने अर्थव्यवस्था को खराब स्थिति में पहुंचा दिया. आज अपनी पीठ थपथपाते हैं पर सच्चाई यही है. अर्थव्यवस्था से लोगों का विश्वास उठा. उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे. हमारी कर नीति पर से लोगों का विश्वास उठ गया. लोगों ने निवेश करना बंद कर दिया. स्थानीय निवेशक विदेशों में पैसा लगाने लगे. आम आदमी के ऊपर बोझ बढ़ता रहा. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में विकास स्थिर हो गया. सरकार की कमाई कम हो गई. सिर्फ 45 दिनों में इस स्थिति से देश को बाहर निकालना था. हमारे पास कोई चारा नहीं था. यह तो आरंभ है इस यात्रा का. यह अंत नहीं है.'

उन्होंने कहा, 'इसकी शुरुआत हो गई है. हमारा उद्देश्य है कि कर नीति की स्थिरता को बनाएं. निवेश के लिए दरवाजे खोलें. सरकार की नीतियों में स्पष्टता लाएं ताकि हमारे उद्योगों में पैसा लगे. ऊंचे कर से उद्योग नहीं बढ़ते. इसलिए सब्सिडी देना जरूरी है. इंफ्रास्ट्रक्चर और समाज के हर दिशा में काम करना है. यही हमने किया. शुरुआत अच्छी रही. हम नहीं चाहते थे कि आम आदमी पर कोई बोझ पड़े. छोटे करदाताओं को लाभ मिलता रहे, यही किया है.'

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay