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Opinion: सेंसेक्स की अभूतपूर्व उड़ान

शेयर बाजार नई बुलंदियों पर है और सोमवार को बीएसई सेंसेक्स ने 22,764 के ऊपर जाकर एक और नया रिकॉर्ड बनाया. पिछले कुछ महीनों से शेयर बाजार में बला की तेजी दिख रही है. विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की पराजय के बाद से ही सेंसेक्स ने ऊपर चढ़ना शुरू किया था और इतने दिनों में कई बार नई बुलंदियों को छूआ.

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मधुरेन्द्र सिन्हा [Edited By: सुवासित]नई दिल्‍ली, 04 July 2014
Opinion: सेंसेक्स की अभूतपूर्व उड़ान Symbolic Image

शेयर बाजार नई बुलंदियों पर है और सोमवार को बीएसई सेंसेक्स ने 22,764 के ऊपर जाकर एक और नया रिकॉर्ड बनाया. पिछले कुछ महीनों से शेयर बाजार में बला की तेजी दिख रही है. विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की पराजय के बाद से ही सेंसेक्स ने ऊपर चढ़ना शुरू किया था और इतने दिनों में कई बार नई बुलंदियों को छूआ.

खासकर विदेशी निवेशक जिन्हें एफआईआई कहा जाता है, बड़े पैमाने पर बाजार में पैसा लगा रहे हैं. सिर्फ अप्रैल महीने में ही उन्होंने 6,800 करोड़ रुपए बाजार में लगा दिए. जनवरी से अब तक उन्होंने 28,979 करोड़ रुपए बाजार में लगाए हैं. यह रकम बहुत बड़ी है और यह देखते हुए कि उधर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अब सुधार के संकेत मिल रहे हैं और वहां भी निवेश के दरवाजे खुल रहे हैं, बहुत हैरानी की बात है.

अमूमन अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सुधरने से निवेश का रुख उधर की ओर होना चाहिए था लेकिन फिलहाल गंगा उलटी बह रही है. साल भर पहले जो विदेशी निवेशक भारत से पलायन कर गए थे, अब यहां एक नई सरकार बनने की आहट से वापस लौट रहे हैं और वह भी धमाके के साथ.

बाजार के जानकारों का मानना है कि यूपीए-2 की अकर्मण्यता और फैसले न ले पाने की अपंगता ने इतने दिनों तक बाजार को बांध रखा था. उस दौरान निवेशक बाजार से दूर हो गए थे और धन कमाने के अन्य विकल्पों को तलाश रहे थे. उसका ही नतीजा था कि प्रॉपर्टी और सोने के दाम आसमान छूने लगे थे.

दरअसल निवेशक हमेशा धन कमाने के विकल्पों की तलाश करता रहता है. जब उसे लगा कि शेयर बाजार के और बढ़ने की गुंजाइश नहीं है तो वह सोने जैसे अनुपयोगी वस्तु में पैसे लगाने लगा जिसका नतीजा हुआ कि वह पीली धातु आसमान छूने लगी.

यही हाल प्रॉपर्टी का हुआ. यानी अन्य विकल्पों की ओर लोग ध्यान लगाते रहे. लेकिन अब सब कुछ बदल गया है और निवेशक वापस आ पहुंचे हैं. इसका ही परिणाम है कि सूचकांक यानी सेंसेक्स ऊंचाइयों पर जा पहुंचा है.

एक और बात है. शेयर बाजार हमेशा सेंटीमेंट पर चलते हैं और यहां वास्तविक घटनाओं का योगदान बहुत सीमित होता है. निवेशक और बाजार के खिलाड़ी आने वाले अच्छे या बुरे समय के हिसाब से ही धन लगाते हैं. यानी मुनाफे को पहले ही काउंट कर लिया जाता है. यही बात इस बार भी देखने को मिल रही है.

बाजार में यह धारणा है कि एनडीए की सरकार बनेगी. इससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाला समय कारोबार के अनुरूप होगा और अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी. नरेन्द्र मोदी के आने की संभावना से भी इसमें खासी तेजी आई है. बाजार के खिलाड़ी यह मान रहे हैं कि मोदी की सरकार मजबूत तो होगी ही, उसकी नीतियों में पारदर्शिता भी होगी. वो नीतियां जो लागू नहीं हो पाईं, अब लागू हो जाएंगी. देश को सुशासन मिलेगा जिसका वादा नरेन्द्र मोदी कर रहे हैं. और अगर यह नहीं हो पाया तो एक बार फिर शेयर बाजार रेत के किले की तरह ढह जाएगा. तब तक दिल थाम कर बैठिए और देखिए सेंसेक्स की कलाबाजियां.

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