एडवांस्ड सर्च

Advertisement

धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह

प्रज्ञा बाजपेयी
13 August 2019
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
1/15
जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के भारत सरकार के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने शुक्रवार को अपने दोस्त चीन का रुख किया. कुरैशी ने यह भी दावा किया कि चीन ने पाकिस्तान को पूरी मदद का आश्वासन दिया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भी पाकिस्तान चीन के भरोसे कश्मीर का मुद्दा उठाने का दम भर रहा है लेकिन सवाल ये उठता है कि चीन कितनी मजबूती से और कितने लंबे वक्त तक कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देगा?
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
2/15
बीजिंग की सबसे ज्यादा आपत्ति भारत सरकार के लद्दाख क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के फैसले को लेकर है जहां अक्साई चिन पर वह अपना क्षेत्रीय दावा पेश करता रहा है. चीन की सरकार के प्रवक्ता ने भारत के फैसले को अस्वीकार्य बताते हुए कहा था कि कश्मीर क्षेत्र में वैध अधिकारों और हितों की लड़ाई में वह पाकिस्तान की मदद करेगा.   
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
3/15
पाकिस्तान के विदेश मंत्री के चीन दौरे के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग ली के साथ सोमवार को बीजिंग में मुलाकात की. साझा प्रेस वार्ता में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, ‘बातचीत के दौरान अक्साई चिन का मसला भी उठा, चीन को चिंता थी कि अनुच्छेद 370 की वजह से भारत-चीन की सीमा पर असर पड़ सकता है. लेकिन, उन्होंने साफ किया कि भारत का फैसला अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुछ असर नहीं डालेगा. इससे सिर्फ भारत के अंदर ही राज्य में असर होगा’.
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
4/15
चीन ने क्षेत्रीय मुद्दों पर हमेशा पाकिस्तान का ही साथ दिया है. वर्तमान में कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर पाकिस्तान और चीन ने कब्जा कर रखा है. ऐसे में चीन की परेशानी केवल पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं है.

धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
5/15
चीन अरुणाचल प्रदेश में करीब 90,000 वर्ग किमी पर अपना दावा पेश करता है. दूसरी तरफ, भारत अक्साई चिन पठार के 38,000 वर्गकिमी के क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता पेश करता है. चीन और भारत के बीच तमाम क्षेत्रीय विवाद रहे हैं. कई बार दोनों देशों के बीच सीमा विवाद संघर्ष की तरफ भी बढ़ता नजर आ चुका है.
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
6/15
अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के तुरंत बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था, चीन ने हमेशा भारत के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में स्थित चीन-भारत सीमा के पश्चिमी खंड में भारतीय पक्ष पर आपत्ति जताई है. यह स्थिति अटल है और किसी भी तरह से कभी नहीं बदली है. हाल ही में भारत ने एकतरफा कानूनी बदलाव कर चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन किया है. भारत का कदम अस्वीकार्य है और इसका कोई भी कानूनी असर नहीं होगा.
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
7/15
क्षेत्रीय विवाद
कश्मीर विवाद में चीन की पुरानी भूमिका रही है. 1962 में चीन ने कश्मीर से लगे हिस्से पर अपना कब्जा जमाया और पाकिस्तान के साथ संधि कर ली. वर्तमान में चीन और पाकिस्तान का व्यापार नवनिर्मित कराकोरम हाईवे से होता है जो पश्चिमी कश्मीर क्षेत्र में दोनों देशों को जोड़ता है. अरबों डॉलर की लागत से बने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर परियोजना के तहत इस सड़क को कई लेन वाले हाईवे में विकसित किया जा रहा है ताकि पूरे साल इस रास्ते से व्यापार हो सके.
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
8/15
चीन दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ज्यादा निवेश (57 अरब डॉलर) पाकिस्तान में कर रहा है. अपने ताकतवर पड़ोसी के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी की वजह से हिमालय के निचले क्षेत्र पर पाकिस्तान को अपना दावा मजबूत करने में मदद मिलती रही है.
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
9/15
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मोदी सरकार का लद्दाख को सीधे केंद्र से शासित करने का फैसला एक भू-राजनीतिक कदम था. थिंक टैंक इंटरनेशनल सिक्योरिटी स्टडीज में शोधकर्ता समीर पाटिल ने DW से बातचीत में कहा, लद्दाख में चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा था, खासकर इस क्षेत्र में चीन के आर्थिक पहल की वजह से. दूसरी तरफ, भारत सरकार की तरफ से भी क्षेत्र में दिलचस्पी की कमी दिखाई दे रही थी. मोदी सरकार का फैसला प्रशासनिक और भू-राजनीतिक फैक्टरों दोनों से प्रेरित है. नई दिल्ली को चिंता थी कि लद्दाख पर ध्यान ना दिए जाने की वजह से वहां चीन अपना प्रभाव बढ़ाने में कामयाब हो रहा है.

धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
10/15
हालांकि, सार्वजनिक तौर पर भारत ने इस बात को ज्यादा तूल नहीं दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लद्दाख को नया दर्जा विकास कार्यों में गति लाने के लिए दिया गया है. पटेल ने कहा, चीन को उम्मीद थी कि भारत दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय विवाद का समाधान नए बॉर्डर मैकेनिजम से करेगा, ना कि वह अकेले ही अपने घरेलू कानून के तहत कोई कदम उठा लेगा. जाहिर सी बात है कि कश्मीर पर मोदी सरकार के कदम से बीजिंग का पारा चढ़ गया है.
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
11/15
तमाम समस्याओं से घिरा हुआ है चीन

विदेश नीति के मामलों की विशेषज्ञ नारायणी बसु ने DW से कहा कि कश्मीर विवाद का भारत-चीन के रिश्ते पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है. बसु ने कहा, चीन इस वक्त तमाम घरेलू और वैश्विक मुद्दों पर फंसा हुआ है. बीजिंग के खिलाफ हॉन्ग कॉन्ग में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और दूसरी तरफ वह ताइवान की समस्या में भी उलझा है. यही नहीं, अमेरिका के साथ चीन का ट्रेड वॉर भी चल रहा है. दोनों तरफ से कूटनीतिक बयानबाजी होगी लेकिन कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आने वाला है.
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
12/15
ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं जिसे कश्मीर मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह का समर्थन नहीं मिल रहा है.

कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के मोदी सरकार के फैसले को लेकर वॉशिंगटन पहले ही पाकिस्तान को अपना रुख साफ कर चुका है. यूएस ने दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि वह कश्मीर मुद्दे पर अपने पुराने रुख पर कायम है. रूस और यूएई ने भी नई दिल्ली के कदम का समर्थन किया. पाकिस्तान के सहयोगी देश सऊदी अरब भी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा नहीं हुआ.
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
13/15
भारत का अक्सर विरोध करने वाले चीन ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की दोनों देशों की जिम्मेदारी है. कूटनीतिक तौर पर चीन ने इस्लामाबाद और नई दिल्ली दोनों पर जिम्मेदारी डाल दी. दूसरी तरफ, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बीजिंग दौरे में कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में भारत और चीन को स्थिरता कायम रखने में अपनी भूमिका अदा करने की जरूरत है.
धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
14/15
विश्लेषक बसु का मानना है कि मोदी के कश्मीर फैसले के बाद भारत-चीन के रिश्तों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ने वाला है. उन्होंने कहा, भारतीय पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के रिश्तों को इस तरह से ढाला है कि किसी भी विवाद की छाया सहयोग के क्षेत्रों पर ना पड़े. इसीलिए कूटनीतिक तौर पर पोस्चरिंग तो होगी लेकिन उससे ज्यादा कुछ नहीं होने वाला है.


धारा 370 हटने पर चीन की परेशानी की ये है असली वजह
15/15
हालांकि, विश्लेषक पाटिल का मानना है कि चीन कश्मीर मुद्दे का इस्तेमाल आर्थिक और व्यापार मुद्दों पर भारत पर दबाव डालने के लिए कर सकता है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के चीन दौरे के बाद इसी महीने पीएम मोदी जी-7 समिट के लिए पैरिस जाएंगे. अक्टूबर महीने में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मोदी के साथ एक अनौपचारिक समिट में भी हिस्सा लेंगे.
Advertisement
Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay