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सर्जिकल स्ट्राइक: कुत्तों को भगाने को सेना ले गई थी तेंदुए का पेशाब

aajtak.in [Edited by:अंकुर कुमार ]
12 September 2018
सर्जिकल स्ट्राइक: कुत्तों को भगाने को सेना ले गई थी तेंदुए का पेशाब
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भारतीय सेना ने 28-29 सितंबर 2016 की रात को पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी. सर्जिकल स्ट्राइक के दो साल बाद इस घटना का वीडियो सामने आया था. अब इस घटना से जुड़ा एक रोचक किस्‍सा सामने आया है. (प्रतीकात्‍मक फोटो)
सर्जिकल स्ट्राइक: कुत्तों को भगाने को सेना ले गई थी तेंदुए का पेशाब
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पूर्व नगरोटा कॉर्प्स कमांडर ले. जनरल राजेंद्र निंबोरकर ने अब यह किस्‍सा पब्‍ल‍िक किया है.
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पुणे के थोर्ले बाजीराव पेशवे प्रतिष्ठान में अपने सम्‍मान समारोह में उन्‍होंने बताया कि कैसे पाकिस्तान की सीमा में 15 किलोमीटर अंदर जाने के बाद कुत्तों को शांत रखने के लिए तेंदुए के मल-मूत्र का इस्तेमाल किया गया.
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पूर्व नगरोटा कॉर्प्स कमांडर ले. जनरल राजेंद्र निंबोरकर ने बताया कि जूलॉजी और एनिमल बिहेवियर पर उनको काफी समझ थी. साथ ही सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक से पहले इलाके की रेकी करने के साथ ही वहां के बायोडायवर्सिटी को भी बारीकी से समझा था. (प्रतीकात्‍मक फोटो)
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सर्जिकल स्ट्राइक में एक खतरा कुत्‍तों से भी था, सेना को समझ थी कि कुत्‍ते भनक लगते ही पाकिस्‍तानी सेना और आतंकियों को सतर्क कर सकते हैं. निंबोरकर ने बताया कि सेना को पता था कि सर्जिकल स्ट्राइक के रास्ते के गांवों से निकलते वक्त कुत्ते भौंकना शुरू कर सकते हैं और हमला कर सकते हैं. (प्रतीकात्‍मक फोटो)
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इससे निपटने के लिए हमारी टुकड़ियां तेंदुए का मल-मूत्र लेकर गईं. उसे गांव के बाहर छिड़क दिया जाता था. यह काम कर गया, क्योंकि तेंदुए अक्सर कुत्तों पर हमला करते हैं. तेंदुए से डरकर कुत्‍ते उस इलाके से दूर रहते हैं जहां उनकी गंध हो. (प्रतीकात्‍मक फोटो)
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यही नहीं निंबोरकर ने बताया कि इस ऑपरेशन को काफी सीक्रेट रखा गया था. उनकी टुकड़ियों को सर्जिकल स्‍ट्राइक की जानकारी ए‍क हफ्ते से थी, लेकिन जगह की बात नहीं बताई गई थी. एक दिन पहले ही बताया गया.
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बता दें कि 18-19 सितंबर, 2016 को उरी बेस कैंप पर आतंकवादियों ने हमला किया था. इस हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे. इसी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी.
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इसके बाद 28-29 सितंबर 2016 की रात को  सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया. एक टीम दुश्मन के रडारों की पकड़ से दूर आसमान में तैयार 30 जाबांज भारतीय कमांडो की थी. कलाश्निकोव, टेवर्स, रॉकेट प्रोपेल्ड गन्स, हथियारों से लैस 35,000 फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे उतरते हुए सब कुछ इतने पिन ड्रॉप साइलेंस के साथ हुआ कि जमीन पर किसी को हल्की सी भी भनक नहीं लगे. ठीक उसी वक्त जमीन पर भारतीय सेना के बहादुर स्पेशल फोर्सेज के 7 दस्ते एलओसी के पार पाकिस्तानी बैरीकेड्स से रेंग-रेंग कर आगे बढ़ते हुए. इस ऑपरेशन में कुल 150 जवान शामिल थे. घातक जाबांजों की ये आठों टीम बिना कोई आहट दिए पीओके स्‍थ‍ित टारगेट ठिकानों पर पहुंच गए. फिर अचानक धमाके, स्मोक बमों से हर तरफ धुआं और गोलीबारी कर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया.
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हमले से पहले आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स पर खुफिया एजेंसियां एक हफ्ते से नजर रखे हुए थीं. रॉ और मिलिट्री इंटेलिजेंस पूरी मुस्तैदी से आतंकवादियों की एक-एक हरकत पर नजर रखे हुए थी. सेना ने हमला करने के लिए कुल छह कैंपों का लक्ष्य रखा था. हमले के दौरान इनमें से तीन कैंपों को पूरी तरह तबाह कर दिया. हमले में पाकिस्तानी सेना के दो जवान भी मारे गए. साथ ही इस ऑपरेशन में हमारे दो पैरा कमांडोज भी लैंड माइंस की चपेट में आने के कारण घायल हुए.
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भारतीय सेना के द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक में करीब 50 आतंकी मारे गए थे और कई आतंकी कैंप पूरी तरह से तबाह भी हुए थे.
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पूरे ऑपरेशन के दौरान रात में तत्‍कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, और तत्‍कालिन सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ऑपरेशन की निगरानी करते रहे. इस दौरान ऑपरेशन की जानकारी लगातार प्रधानमंत्री मोदी को भी दी जा रही थी. अजित डोभाल ने रात ही में अपनी अमेरिकी समकक्ष सूसन राइस से भी बातचीत कर उनको भरोसे में लिया.(प्रतीकात्‍मक फोटो)
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