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पान खिला करते हैं प्रपोज, इस मेले में चुटकी में बन जाती है जोड़ी

aajtak.in [Edited By: श्यामसुंदर गोयल]
14 March 2019
पान खिला करते हैं प्रपोज, इस मेले में चुटकी में बन जाती है जोड़ी
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प्रेमी जोड़ों के म‍िलन के ल‍िए प्रस‍िद्ध भगोर‍िया उत्सव 14 मार्च से शुरू हो गया है. इन मेलों में आने वाले मौज-मस्ती का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देते. मेले में झूलों से लेकर आइस्क्रीम और गोलगप्पों का बाजार सजा रहता है. इस मेले में आने वाले युवा, युवत‍ियों को पान देते हैं, यद‍ि वह पान खा लेती है तो ये माना जाता है क‍ि युवती ने उस युवक को पसंद कर ल‍िया है.
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मजदूरी के लिए बाहर गए ग्रामीणों की आमद के साथ ही अब अंचल में भी ढोल-मांदल की गूंज के साथ उत्साह की कुर्राटी सुनाई देने लगी है. मजदूरी कर आए ग्रामीण अब होली तक यहीं रहेंगे.
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उधर, इस बार भगोरिया हाट राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार का जरिया भी बनेंगे. बाहर से आए ग्रामीणों को अपने पक्ष में करने के लिए के कांग्रेस-भाजपा दोनों ही पूरा जोर लगाएंगे.

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गुरुवार को पारा, समोई, सारंगी, हरिनगर और चेनपुरा में भगोरिया हाट लग रहे हैं,  जहां ग्रामीणों की कुर्राटी और ढोल-मांदल की थाम सुनाई देगी.
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भगोरिया उत्सव की शुरुआत 14 मार्च से हो रही है. इसकी हलचल पिछले एक सप्ताह से देखी जा रही है. बुधवार को छतरी चौक से लगाकर मुख्य बाजार तक के हिस्से में बड़ी संख्या में ग्रामीण खरीदारी करते नजर आए.
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आदिवासी संस्कृति के भगोरिया पर्व को लेकर अलग-अलग मत हैं. कुछ लोगों के अनुसार भगोरिया एक उत्सव है जो होली का ही एक रूप है यह प्रदेश के मालवा निमाड़ अंचल के आदिवासी इलाकों में धूमधाम से मनाया जाता है. होली के 1 सप्ताह पहले लगने वाले हाट-बाजार यहां मेले का रूप ले लेते हैं.
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भगोरिया मेले को लेकर मान्यता है कि इस मौके पर युवक-युवती एक दूसरे को पान खिला दें या एक दूसरे के गाल पर गुलाल लगा दें तो मान लिया जाता है कि दोनों में प्रेम हो गया है. इसके बाद वे दोनों मौका पाकर भाग जाते हैं और विवाह बंधन में बंध जाते हैं. भाग कर शादी करने के कारण ही इस पर्व को भगोरिया पर्व कहा जाता है.

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एक मान्यता ये भी है क‍ि झाबुआ जिले के भवन नामक स्थान से यह पर्व शुरू हुआ था इसलिए इसे भगोरिया कहा जाता है.
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वहीं एक मान्यता के अनुसार, पुराने समय में रिश्ता तय होने के बाद आमतौर पर दोनों परिवार के लोग मिल नहीं पाते थे. ऐसे में भगोरिया मेले के माध्यम से वर और वधू पक्ष के लोग एक-दूसरे को मिलते थे और विवाह की तैयारियां की जाती थीं.
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