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हि‍मा ने तिरंगा ही नहीं असमिया संस्कृति के प्रतीक को भी लगाया गले

aajtak.in [Edited by:अंकुर कुमार ]
13 July 2018
हि‍मा ने तिरंगा ही नहीं असमिया संस्कृति के प्रतीक को भी लगाया गले
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हिमा दास रातों रात एथलेटिक्स की दुनिया में छा गईं. असम के एक साधारण किसान की बेटी हिमा आईएएएफ विश्व अंडर 20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप के महिला 400 मीटर फाइनल में खिताब के साथ विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं.
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रेस जीतने के बाद हिमा ने तिरंगा लेकर पूरे ग्रांउड का चक्कर लगाया. हालां‍कि हिमा ने इस जीत में अपने राज्य असम को भी हिस्सा बनाया.
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हिमा ने असम संस्कृति का प्रतीक असमिया गमछा भी ओढ़ा हुआ था. हिमा की जीत से पूरे देश के साथ असम में भी खुशी की लहर है. ऐसे में हिमा ने भी असम को अपनी जीत के साथ जोड़ा. 
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आपको बता दें कि असम की संस्कृति में ये गमछा काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है. हर पर्व त्योहार उल्लास के समय इसे ओढ़ा जाता है. पीएम मोदी भी जब असम दौरे पर गए थे तो उन्हें ये गमछा ओढ़ाया गया था. खास बात यह है कि इस गमछे को हाथों से महिलाओं द्वारा घरों में ही तैयार किया जाता है. बिहु के दौरान इस गमछे को असम में हर किसी के गले में देखा जा सकता है.
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आपको बता दें कि टेम्पेयर (फिनलैंड) में इस अभूतपूर्व सफलता के बाद एथलेटिक्स जगत में 18 साल की हिमा लगातार सुर्खियों में हैं. हिमा से पहले भारत की किसी भी महिला ने विश्व चैंपियनशिप के किसी भी स्तर पर गोल्ड मेडल नहीं जीता था. हिमा ने 51.46 सेकेंड के समय के साथ गोल्ड मेडल पर  कब्जा किया. वह हालांकि 51.13 सेकेंड के अपने निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से पीछे रहीं.
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आपको बता दें कि हिमा ने कभी भी एथलेटिक्स में किस्मत आजमाने का सोचा नहीं था, वह तो लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थीं. इस दौरान कोच निपोन ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उसकी जिद की वजह से वह ट्रैक पर उतर आईं और कड़ी मेहनत के बाद इतिहास रचने में कामयाब हुईं.
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कोच निपोन दास, जो पिछले साल जनवरी में हिमा से जुड़े थे, कहा, 'उसका (हिमा का) आत्मविश्वास ही उसकी सफलता का आधार बना. वह अपनी प्रतिद्वंद्वियों की परवाह नहीं करती. हर दौड़ में उसका लक्ष्य बेहतर समय के साथ सर्वश्रेष्ठ को हरा देना है.'
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हिमा अप्रैल में गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों की 400 मीटर स्पर्धा में तत्कालीन भारतीय अंडर 20 रिकॉर्ड 51.32 सेकेंड के समय के साथ छठे स्थान पर रही थीं. इसके बाद गुवाहाटी में हाल में राष्ट्रीय अंतर राज्य चैंपियनशिप में उन्होंने 51.13 सेकेंड के साथ अपने इस रिकॉर्ड में सुधार किया था.
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हिमा दौड़ के 35वें सेकेंड तक शीर्ष तीन खिलाड़ियों में भी नहीं थीं, लेकिन बाद में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और इतिहास बना लिया. आख‍िरी 100 मीटर में हिमा ऐसे दौड़ीं जैसे वह 100 मीटर की रेस में भाग रही हों.
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आपको बता दें कि रेस जीतने के बाद जब हिना ने गोल्ड मेडल लिया और सबके सामने राष्ट्रगान बजा तो उनकी आंखों से आंसूं छलक पड़े.
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