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घूम आइए केरल, चूके तो 12 साल बाद देखने को मिलेगा ये अद्भुत नजारा

aajtak.in [Edited By: प्रज्ञा बाजपेयी]
13 July 2018
घूम आइए केरल, चूके तो 12 साल बाद देखने को मिलेगा ये अद्भुत नजारा
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किसी भी मौसम में घूमने का प्लान हो तो भारत में केरल सबसे अच्छी जगह है. यह नारियल, बेकवॉटर, संस्कृति और परंपराओं का गढ़ माना जाता है. केरल धरती पर सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है जो 'Gods Own Country' के नाम से भी फेमस है. फैमिली हॉलीडे हो या हनीमून के लिए जाना हो केरल दुनिया में सबसे अच्छी जगहों में से एक है.
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अगर केरल घूमने के लिए आप बहुत दिनों से प्लान बना रहे हैं तो अब वक्त आ गया है कि आप तुरंत बिना सोचे अपना बैग पैक करिए और केरल का रुख कर लीजिए. जुलाई के दूसरे पखवाड़े से केरल के मुन्नार की अन्नामलाई पहाड़ियां नीले-बैंगनी रंग के फूलों से ढकी होंगी. 
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यहां की पहाड़ियां 12 साल में एक बार खिलने वाले नीलकुरिंजी फूलों से ढक जाएंगी और अक्टूबर के अंत तक देशी-विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहेगा.


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प्रकृति की खूबसूरती का अनुभव समेटना चाहते हैं तो केरल जाने के लिए यह सबसे बढ़िया समय है. मन्नार में पूरे देश भर में सबसे ज्यादा नीलकुरिंजी के पौधे हैं. ये पहाड़ियों के 3000 हेक्टयर क्षेत्र में फैले हुए हैं. हर पौधा अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार खिलता है और फूल खिलने के बाद खत्म हो जाता है. बीज को फिर से पौधा बनने में और 30-60 सेमी. तक बड़ा होने में करीब 12 वर्षों का लंबा वक्त लग जाता है.


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मुन्नार देश में सबसे फेमस हिल स्टेशन्स में से एक है. यहां की खूबसूरती पहाड़ी ढलानों से दिखती है. यहां चाय के बागान लगभग 80,000 मील की दूरी तक पहाड़ियों को कवर किए हुए हैं. मुन्नार में आमतौर पर ठंड होती है जो आपको आराम देगी और यह एक खास एहसास होगा.

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नीलकुरिंजी एशिया और ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है. यह स्ट्रोबिलैंथ्स प्रजाति का पौधा है. पूरी दुनिया में स्ट्रोबिलैंथ्स की 450 प्रजातियां पाई जाती हैं जिसमें से 146 भारत में मिलती हैं. अकेले केरल में ही इनकी 43 प्रजातियां पाई जाती हैं.
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मुन्नार के निवासी प्रसाद अम्बट्टु के मुताबिक, अन्नामलाई हिल्स में 12 वर्षों का यह साइकल चलता रहता है.  इससे पहले 2006 में नीलकुरिंजी का फूल खिला था और अब 2018 में खिलने जा रहा है.
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नीलकुरिंजी का फूल खिलते ही तितलियों और मधुमक्खियों का झुंड लग जाता है. नीलकुरिंजी का शहद बहुत खास होता है. यह 15 वर्षों तक खराब नहीं होता है. इस शहद में औषधीय गुण भी होते हैं.

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इस सीजन में मुन्नार में आने वाले पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त इजाफा होगा.
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यहां पर यूरोप और यूएस से करीब 10 लाख पर्यटक आने की उम्मीद जताई जा रही है. वैसे मुन्नार के अलावा कर्नाटक के वेस्टर्न घाट और तमिलनाडु के नीलगिरी पर्वत पर भी हर 12 साल में नीलकुरिंजिनी के फूल खिलते हैं.
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