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घर खरीदारों ने इस बार चुनावों में पजेशन के मुद्दे को अपनी मांग बनाया है. दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में इस संकट से परेशान लोगों की तादाद लाखों में है. एक प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देशभर में साढ़े 5 लाख से ज्यादा घरों के पजेशन में देरी है. ये सभी प्रोजेक्ट 2013 या उसके पहले लॉन्च हुए थे. इन घरों की कुल कीमत एनारॉक ने 4 लाख 51 हज़ार 750 करोड़ रुपए आंकी है. देखें ये रिपोर्ट.

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    19:46
    रियल एस्टेट सेक्टर में हमेशा से पुरुषों का दबदबा रहा है. शैक्षिक स्तर, कामकाज के तरीकों ने महिलाओं को प्रॉपर्टी मार्केट से दूर ही रखा है. अब रियल एस्टेट में महिलाओं की दखलंदाजी घर की खरीदारी से लेकर बिक्री तक लगातार बढ़ रही है. रियल एस्टेट सेक्टर को काम करने और घर खरीदने दोनों ही लिहाज से अबतक कुछ बरस पहले केवल पुरुषों का कार्यक्षेत्र ही समझा जाता था लेकिन अब वक्त बदल रहा है. रियल एस्टेट की तरक्की और रेरा जैसे कानून के बाद से ये क्षेत्र तो संगठित बन ही रहा है. साथ ही यहां पर काम करने वाली महिलाओं की तादाद भी तेजी से बढ़ रही है.
    15:34
    रियल एस्टेट में पजेशन की परेशानी तो अक्सर सुर्खियों में बनी रहती है लेकिन पजेशन मिलने की खबरें कम ही हेडलाइंस बन पाती हैं. लेकिन हम मार्च की शुरुआत में ही आपको बताएंगे मार्च के आखिर तक मिलने वाले पजेशन का पुख्ता आंकड़ा. प्रॉपटाइगर की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि एनसीआर में जनवरी-मार्च में 54 हज़ार घरों की चाबी घर खरीदारों को मिलने वाली है.
    16:16
    7 फरवरी को रेपो रेट में कमी के बावजूद बैंकों ने अबतक ब्याज दरों में कमी नहीं की है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों के साथ बैठक में इस मुद्दे को उठाया, लेकिन किसी बैंक ने अबतक ईएमआई में कमी करने के फैसले की तरफ कदम नहीं उठाए हैं. आपकी प्रॉपर्टी में बात करेंगे कि आखिर क्यों नहीं घटा रहे हैं ब्याज दरें और ईएमआई.
    20:25
    आपकी प्रॉपर्टी में हम आपको बताने जा रहे हैं किस तरह दिवालिया कानून ग्राहकों और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए मुसीबत बना हुआ है. मकान खरीदने वालों के लिये दिवालिया कानून चिंता का विषय बन चुका है. कई परियोजनाओं के मालिकों ने बैंकों कर्ज लिया हा मगर कर्जा न चुकाने के कारण वे दिवालिया होने के कगार पर हैं. बिल्डर और बैंकों की लड़ाई में ग्राहकों की चिंता बढ़ गई है. जानिए एक्सपर्ट्स से की दिवालिया कानून में क्या हैं खामियां.
    19:38
    आपकी प्रॉपर्टी में हम आपको बताने जा रहे हैं प्रॉपर्टी बाजार से जुड़े सप्ताह भर की तमाम हलचलें. आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती के बाद ब्याज दरों में कमी का रास्ता साफ़ कर दिया है. इस फ़ैसले के बाद एसबीआई ने मामूली राहत देते हुए होम लोन की ब्याज दरो में कमी की है. इस बार आरबीआई ने अगले 15 दिनों में बैंकों से बैठक करके ब्याज दरों में कमी का पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने की योजना बनाई है.
    21:15
    इस बार बजट भले ही अंतरिम था लेकिन रियल एस्टेट के लिए सौगातों की पोटली इस बार के बजट में सबसे भारी थी. घर खरीदारों और घर बेचने वालों को तो वित्त मंत्री ने सहूलियत देने का एलान किया ही, साथ ही डेवलपर्स की कई पुरानी मांगें एक झटके में मान ली गईं. घर खरीदार बरसों से पजेशन की आस में आंसू बहाने को मजबूर हैं. साफ नीयत वाले डेवलपर्स टैक्स का बोझ घटाने की मांग को लेकर सरकार से उम्मीदें लगाए बैठे थे. पजेशन के मोर्चे पर तो सरकार से ग्राहकों की नए फंड बनाने की उम्मीद पूरी नहीं हुई, लेकिन टैक्स के मामले में जरूर राहतों का पिटारा खोल दिया गया.
    19:47
    सरकार अपने कार्यकाल के आखिरी चरण में है और इस साल आम चुनाव होने हैं, लेकिन उससे पहले आने वाला है अंतरिम आम बजट. और हर साल की तरह रियल स्टेट बजट को भी इस बजट से बहुत उम्मीदें हैं. बजट से आखिर क्या चाहता है ये सेक्टर? जानें- क्या हैं उनकी मांगें, उम्मीदें और नजरिया जानते हैं. देखें- ये पूरा वीडियो.
    20:59
    होमबॉयर्स  कि शिकायत पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने 3 सी कंपनी की एक समूह फर्म ग्रेनाइट गेट प्रॉपर्टीज के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू करने की मंजूरी दी है. तीन होमबॉयर्स ने परियोजना को पूरा करने में फर्म की अक्षमता के बारे में शिकायत याचिका दर्ज की थी. तीन होमबॉयर्स की याचिका को स्वीकार करते हुए, एनसीएलटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एम एम कुमार की अगुवाई वाली पीठ ने ग्रेनाइट गेट प्रॉपर्टीज के खिलाफ दिवाला कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दी. कंपनी नोएडा में लोटस पनाचे आवासीय परियोजना तैयार कर रही है. क्या है पूरा मामला, जानने के लिये देखें यह वीडियो.
    उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा के अनुसार, इन्वेस्टर मीट के बाद तीन साल में केवल 124 एमओयू ही ऐसे रहे जिन पर काम हुआ. इससे राजस्थान को 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश मिला. लेकिन बड़ी कंपनियों ने काम शुरू तक नहीं किया. इस कारण उन्हें नोटिस दिए जाएंगे. नोटिस के बावजूद यदि काम नहीं शुरू हुआ तो एमओयू रद्द होंगे.

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