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जम्मू कश्मीर पुलिस के सूत्रों से पता चला है कि डीएसपी देवेंद्र सिंह का प्रमोशन पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर होने वाला था. उसका नाम उन अधिकारियों की लिस्ट में शामिल था, जो पदोन्नति पाने वाले थे. बता दें कि बीते शुक्रवार को डीएसपी देवेंद्र सिंह दो आतंकियों के साथ पकड़ा गया था.

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    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और उप-मुख्यमंत्री अजित पवार ने मंगलवार को दायर हलफनामे में कहा है कि अभी चल रही जांच सीबीआई या ईडी को हैंडओवर करने की आवश्यकता नहीं है. इससे पहले दिसंबर 2019 में महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल ने भी हाई कोर्ट में हलफनामा दायर किया था. इस हलफनामे में कहा गया था कि एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में अजित पवार की भागीदारी नहीं पाई गई है.
    संविधान में साफ लिखा है कि नागरिकता पर कानून संसद ही बनाएगी. अब संसद ने सीएए बना दिया तो उसका विरोध शुरू हुआ ये कहकर कि ये असंवैधानिक है. यह कानून अब एक ही सूरत में असंवैधानिक घोषित हो सकता है जब सुप्रीम कोर्ट इसे असंवैधानिक घोषित करते हुए खारिज कर दे और ऐसा 13 जनवरी 2020 तक हुआ नहीं है. सीएए को लागू करने की अधिसूचना भी जारी हो चुकी है
    हाल में विवाद हुआ कि जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय में पुलिस बिना इजाजत घुस गई थी. लेकिन तथ्य यह है कि पुलिस को विश्वविद्यालय कैंपस में घुसने पूरा का कानूनी अधिकार है और इसके लिए किसी से इजाजत लेने की कोई जरूरत नहीं
    राज्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात के बाद  DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा कि मतगणना के समापन के बाद भी रिजल्ट घोषित नहीं किए गए हैं. डीएमके जीत गई है, लेकिन रिजल्ट घोषित नहीं किए जा रहे हैं.
    अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में लाठीचार्ज और हंगामे के मामले में राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया.
    कॉलेजियम प्रणाली अपारदर्शी बनी हुई है और न्यायालय ने भारत की परिकल्पना (आइडिया ऑफ इंडिया) को ध्वस्त करने को आमादा एक शक्तिशाली और अतिमहत्वाकांक्षी सरकार को बेलगाम होने से रोकने की इच्छा नहीं दिखाई है. 2020 में अदालत खुद को एक चौराहे पर पाती है.
    आरटीआइ एक बेहतरीन कानून है लेकिन इसके अमल में आने के 14 साल बाद जो पेचीदगियां और दुश्वारियां सामने आई हैं, अब उनका समाधान देने का वक्त आ गया है
    द फॉरेनर्स एक्ट, 1946 के सेक्शन 3(2)(सी) के तहत केंद्र सरकार, भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को उनके देश भेजने का अधिकार रखता है. असम में साल 2012 में तीन जेलों के अंदर ही डिटेंशन सेंटर बनाया गया था. ये डिटेंशन सेंटर गोलपाड़ा, कोकराझार और सिलचर के ज़िला जेलों के अंदर बनाया गया था.
    असम के गोवालपारा जिले के मटिया में पहले डिटेंशन सेंटर का निर्माण कार्य चल रहा है. यहां बाकायदा इसका बोर्ड भी लगा हुआ. इस सेंटर का करीब 65 फीसदी हिस्सा अब तक बनकर तैयार हो चुका है.

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