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जगनमोहन रेड्डी ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में लोगों ने हम पर विश्वास करके वोट दिया है, लेकिन 2024 में उन्हें हमारे काम के आधार पर और भी प्रचंड बहुमत देना चाहिए.

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    आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में  हार के कारणों की समीक्षा कर दिल्ली के आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करने के लिए 26 मई को पंजाबी बाग क्लब में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई है.
    2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में 18 सीटें जीतीं. इस उभार से उत्साहित बीजेपी नेता समय से पहले चुनाव की बातें कहने लगे हैं. क्या ममता बनर्जी सरकार की स्थिरता पर संकट है?
    लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए ने 39 सीटों पर सफलता हासिल की है. जबकि एक सीट (किशनगंज) पर कांग्रेस को जीत मिली है वहीं पहली बार ऐसा हुआ कि आरजेडी के एक भी सांसद का खाता तक नहीं खुला. वहीं अगर विधानसभा के गणित में देखें तो विधानसभा की सिर्फ 18 सीटों पर महागठबंधन को बढ़त मिली है.
    चीन सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश की दो लोकसभा सीटों के अलावा विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने सभी पार्टियों को पीछे छोड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की है और जल्द ही सरकार बनाने का दावा पेश करेगी.
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    दिल्ली एनसीआर इस बार भगवा रंग में रंग चुका है. दिल्ली में भाजपा ने पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किये और लगातार दूसरी बार दिल्ली की सातों सीटों पर कब्जा जमाया है. दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का सूपड़ा साफ करने के बाद अब भाजपा की नजर दिल्ली विधानसभा पर लगी हुई है, जिसके चुनाव करीब 8 महीने बाद होने वाले हैं. मनोज तिवारी ने भी ट्वीट कर इसी मुद्दे को उठाया. देखिए वीडियो.
    कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गांधी ने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन उनके इस्तीफे को मंजूर नहीं किया गया. वहीं, गुलाम नबी आजाद ने कहा उनकी लीडरशीप पर किसी को कोई शंका नहीं है. राहुल गांधी ही पार्टी को लीड करेंगे. 
    देश, दुनिया, महानगर, खेल, आर्थिक और बॉलीवुड में क्‍या कुछ हुआ. जानने के लिए यहां पढ़ें समय के साथ साथ खबरों का लाइव अपडेशन.
    अखिलेश यादव के नेतृत्व सपा पहली बार 2014 के लोकसभा चुनाव के रण में उतरी थी, यूपी की सत्ता में रहते हुए भी वह महज 5 सीट ही जीता सके थे. ये सभी सीटें मुलायम कुनबे की रहीं. इसके बाद परिवार में कलह हुई और अखिलेश यादव ने अपने पिता और चाचा के खिलाफ बगावत का झंडा उठाया और पार्टी की बागडोर अपने हाथों में ले ली.
    हर्षवर्धन ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है. मुख्यमंत्री के पद पर होने के बावजूद भी जो व्यक्ति खुद को अराजक बताने में गर्व महसूस करता हो, उसके कार्यकाल में अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया, तो दिल्ली के हालात बेहद खराब हो सकते हैं.

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