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भारत के इतिहास में 29 सितंबर को आतंकी कैंपों को तबाह करने के लिए उठाए गए कदम के गवाह के रूप में याद किया जाएगा. भारत ने 28-29 सितंबर 2016 की रात पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में घुसकर आतंकी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक की. इस स्ट्राइक में भारत ने कई आतंकी कैंपों को तबाह कर दिया.

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    परमाणु हथियारों के दौर में सेना ने चीन की सीमा पर एक नई-नवेली सामरिक योजना के साथ युद्धाभ्यास की तैयारी शुरू की, क्या एकीकृत युद्घक टुकड़ी की रणनीति भारतीय सेना को पहले से अधिक ताकतवर बना सकती
    जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म करने के भारत सरकार के फैसले पर पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. वहीं अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे पर कानूनी, राजनीतिक और राजनयिक प्रतिक्रिया तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनायी है.
    आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में व्यापक अनुभव रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह भारतीय सेना के अगले सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) होंगे. आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को इसकी जानकारी दी. लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान के उत्तराधिकारी के रूप में 15 अक्टूबर को नए डीजीएमओ का पदभार संभालेंगे.
    करगिल जंग में दुश्मन के सैनिकों के शवों से बरामद दस्तावेज दो दशक पहले पाकिस्तानी फौज के दुर्भाग्य की कहानी के साथ भारत की खुफिया चूक भी बयान करते हैं
    सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर इन दिनों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के बीच जारी जुबानी जंग के बीच इंडिया टुडे के पास आरटीआई के तहत रक्षा मंत्रालय से सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर मांगे गए सवाल का जवाब मौजूद है. रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसके पास सिर्फ एक ही सर्जिकल स्ट्राइक का डाटा मौजूद है जो 2016 में उत्तरी कश्मीर के उरी में आतंकी हमले के जवाब में 29 सितंबर को किया गया था.
    भारत ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री के बयान को गैरजिम्मेदाराना और बेतुका बता कर खारिज दिया. बता दें, पाकिस्तान विदेश मंत्री ने कहा था कि भारत पाकिस्तान पर फिर से हमला करेगा.
    सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगे जाने का मुद्दा भी बीजेपी ने जोर-शोर से उठाया था और चुनाव प्रचार में भी इसे बड़ा मुद्दा बनाया था. अब एक बार फिर जबकि लोकसभा चुनाव नजदीक है, विपक्ष ने एयरस्ट्राइक के भी सबूत मांग लिए हैं.
    बालाकोट में एयर स्ट्राइक के बाद सभी दल एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं. किसी भी नेता या दल ने सर्जिकल स्ट्राइक की तरह सबूत नहीं मांगे हैं. साथ ही सत्ताधारी बीजेपी की तरफ से भी सधे हुए बयान दिए जा रहे हैं.
    गफूर ने कहा कि 1971 से 1984 तक ऐसी समयावधि थी जिस दौरान हमारी सरहद पर किसी किस्म का कोई वाक्या नहीं हुआ. हालात बिल्कुल शांत रहे. सीजफायर का उल्लंघन भी नहीं हुआ. हमने एक तरह से दुबारा तरक्की की राह पर जाना शुरू किया लेकिन उसके बाद सियाचिन हो गया.

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