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गिरीश कर्नाड से बैंगलोर लिटरेचर फेस्टिवल में दो बार मुलाकात हुई थी. हालांकि श्याम बेनेगल और गुलज़ार साहब से बातचीत के दौरान गिरीश कर्नाड के बारे में उनके अभिनय को लेकर बातें होती रहीं थीं.

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    हिंदी फिल्मों में तवायफों को दीन-हीन और इकहरे किरदार के रूप में दिखाया जाता है, पर इतिहास गवाह है कि वे कहीं ज्यादा इंकलाबी और जोशीली हुआ करती थीं
    हिंदी साहित्य में गांवगिरांव की बात हो तो मुंशी प्रेमचंद के बाद सहज ही जिस कथाकार का नाम ध्यान आता है वह हैं, फणीश्‍वरनाथ रेणु. आज उनकी पुण्यतिथि पर साहित्य आजतक की ओर से नमन.
    अख़्तरी: सोज़ और साज़ का अफ़साना को लिख कर यतीन्द्र मिश्र एक बार फिर चर्चा में हैं. यतीन्द्र मिश्र के लेखन का फलक काफी व्यापक है. बहुविध विषयों के पारखी इस लेखक ने अपने शोधपरख लेखन की धाक केवल हिंदी में ही नहीं समूचे भारतीय साहित्य पर छोड़ी है.
    यतींद्र मिश्र ने हिंदी के एक बेहतरीन कवि, संपादक, संगीत और सिनेमा के बेहतर जानकार के रूप में अपनी पहचान खास पहचान बनाई है. लता मंगेशकर पर लिखी अपनी किताब 'लता सुर गाथा' के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक) के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है.
    साहित्य आजतक के मंच पर मशहूर गायिका मैथिली ठाकुर ने कई गाने गाए और उनकी आवाज पर दर्शक भी खुद को नहीं रोक पाए और वो झूम उठे.
    'साहित्य आजतक' का आयोजन दिल्ली के इंडिया गेट स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में 16, 17 और 18 नवंबर को होगा. यह महाकुंभ इस बार सौ के करीब सत्रों में बंटा है, जिसमें 200 से भी अधिक विद्वान, कवि, लेखक, संगीतकार, अभिनेता, प्रकाशक, कलाकार, व्यंग्यकार और समीक्षक हिस्सा ले रहे हैं. तीसरे दिन का आयोजन के आकर्षण होंगे जावेद अख्तर और चेतन भगत.
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    कवि, गीतकार और लेखक प्रसून जोशी ने साहित्य आजतक 2018 के दूसरे दिन के पहले सत्र 'रहना तू, है जैसा तू' में बेबाकी से अपनी रचनाओं पर बात की. इस दौरान उन्होंने अपने द्वारा रचित ठुमरी गाकर सुनाई. देखिए प्रसून की ठुमरी 'नजर तोरी'.To License Sahitya Aaj Tak Images & Videos visit www.indiacontent.in or contact syndicationsteam@intoday.com
    साहित्य आजतक 2018 कार्यक्रम का आज दूसरा दिन है. दूसरे दिन की शुरुआत प्रसून जोशी के साथ हुई. दूसरे दिन देश के कई जाने-माने लेखक-कवि इसमें हिस्सा लेंगे.
    साहित्य आजतक 2018 के मंच पर लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने लोकगीतों की छटा बिखेरी और अपने गीतों से समां बांध दिया.

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