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विश्लेषकों का मानना है कि अगर इसके कारण तेल की कीमतें बढ़ीं और लंबे समय तक ऊंची कीमत बनी रही तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा.

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    सऊदी में ड्रोन हमले के बाद सोमवार को जब बाजार खुले तो कच्चे तेल के दाम में करीब 20 फीसदी का उछाल आ गया. अब सबको इस बात को लेकर चिंता है कि आखिर इसका वैश्विक तेल आपूर्ति पर क्या असर होगा?
    राजधानी दिल्ली में पिछले एक महीने में पेट्रोल का दाम 78 पैसे प्रति लीटर और डीजल का दाम 25 पैसे लीटर कम हो गया है. उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस महीने कच्चे तेल के भाव में अब तक करीब आठ डॉलर प्रति बैरल की कमी चुकी है.
    भारतीय रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष यानी 2019-20 के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में बढ़त के अनुमान को घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है.
    सप्‍ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की बढ़त के साथ शुरुआत हुई. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्‍स 39 हजार 600 के स्‍तर पर पहुंच गया.
    बीते डेढ़ महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 17 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. 
    इस हफ्ते बाजार की नजर देश में मॉनसून की प्रगति पर होगी. वहीं, औद्योगिक उत्पादन और महंगाई के आंकड़े, अमेरिका-चीन ट्रेड वार और कच्चे तेल की कीमत खास तौर से इस सप्ताह बाजार को प्रभावित कर सकते हैं.
    कच्चे तेल की कीमत फिर बढ़ने लगी है. ब्रेंट क्रूड का भाव 75 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है और इस बात की आशंका है कि यह 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकता है. यूपीए सरकार के दौर में कच्चे तेल के भाव की इसी ऊंचाई की वजह से महंगाई काफी बढ़ गई थी. 
    ईरान से तेल आयात पर अमेरिका द्वारा प्रतिबंध में मिली छूट खत्म हो जाने के बाद भारत के लिए कच्चे तेल की लागत तीन से पांच फीसदी बढ़ जाने की आशंका है. इससे महंगाई बढ़ सकती है और रुपये में गिरावट आ सकती है.
    भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को इस वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा जारी की है. इसमें जहां केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में चाैथाई फीसदी की कटौती कर जनता को राहत दी है, वहीं जीडीपी में ग्राेथ के अनुमान को घटा दिया गया है.

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