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बीते डेढ़ महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 17 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. 

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    इस हफ्ते बाजार की नजर देश में मॉनसून की प्रगति पर होगी. वहीं, औद्योगिक उत्पादन और महंगाई के आंकड़े, अमेरिका-चीन ट्रेड वार और कच्चे तेल की कीमत खास तौर से इस सप्ताह बाजार को प्रभावित कर सकते हैं.
    कच्चे तेल की कीमत फिर बढ़ने लगी है. ब्रेंट क्रूड का भाव 75 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है और इस बात की आशंका है कि यह 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकता है. यूपीए सरकार के दौर में कच्चे तेल के भाव की इसी ऊंचाई की वजह से महंगाई काफी बढ़ गई थी. 
    ईरान से तेल आयात पर अमेरिका द्वारा प्रतिबंध में मिली छूट खत्म हो जाने के बाद भारत के लिए कच्चे तेल की लागत तीन से पांच फीसदी बढ़ जाने की आशंका है. इससे महंगाई बढ़ सकती है और रुपये में गिरावट आ सकती है.
    भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को इस वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा जारी की है. इसमें जहां केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में चाैथाई फीसदी की कटौती कर जनता को राहत दी है, वहीं जीडीपी में ग्राेथ के अनुमान को घटा दिया गया है.
    Modi government मोदी सरकार के जाते हुए दौर में कुछ परेशान करने वाली खबरें हैं. जनवरी महीने में औद्यो‍गिक उत्पादन में भारी गिरावट आई है, महंगाई दर भी थोड़ी बढ़ गई है, रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष के अंत तक जीडीपी में भी अनुमान से कम बढ़त होने के आसार जताए हैं.
    बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई.
    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन बढ़ोतरी हुई है.यह बढ़ोतरी कच्‍चेतेल की कीमतों में तेजी की वजह से हुई है.
    दो दिनों बाद एक बार‍ फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
    लगातार दूसरे दिन कच्‍चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं.

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