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रविशंकर प्रसाद के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 में छात्र नेता के रूप में हुई. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

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    भिंड लोकसभा सीट से देवाशीष जरारिया कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. प्रमुख राजनीतिक दलों के हिसाब से देखा जाए तो इस बार के लोकसभा चुनाव में देश के सबसे युवा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया हैं. वहीं, बीजेपी की तेजस्वी सूर्या उनसे करीब 4 महीने बड़े हैं.
    भोपाल लोकसभा सीट की जंग को कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मुकाबिल भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने ‘धर्मयद्ध’ करार देकर विकास समेत विभिन्न मुद्दों को गौण बना दिया है
    भोपाल लोकसभा सीट की जंग को कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मुकाबिल भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने धर्मयद्ध’ करार देकर विकास समेत विभिन्न मुों को गौण बना दिया है.
    पिछले तीस वर्षों से अगर एक राजनेता ने सबसे ज्यादा सुर्खियां और सवाल बटोरे हैं तो वह लालू प्रसाद यादव हैं. आप उनके कायल हो सकते हैं, उनकी आलोचना या निंदा कर सकते हैं लेकिन नजर अंदाज नहीं कर सकते.  लालू की आत्मकथा अंग्रेजी में Gopalganj to Raisina- My Political Journey और हिंदी में 'गोपालगंज से रायसीना- मेरी राजनीतिक यात्रा' नाम से आई है.
    अपने बयानों के कारण विवादों में रहने वाले मोदी सरकार के मंत्री अनंत कुमार हेगड़े फिर मैदान में हैं. कर्नाटक की उत्तर कन्नड़ सीट से लगातार पांच बार से सांसद बन रहे अनंत कुमार हेगड़े ने अपना पहला चुनाव 1996 में लड़ा था.
    बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से कांग्रेस ने बीके हरिप्रसाद को मैदान में उतारा है.वह कांग्रेस से राज्यसभा सांसद हैं. इस बार उनकी लड़ाई बीजेपी के 28 साल के युवा प्रत्याशी तेजस्वी सूर्या से हैं. इस सीट पर 1991 से बीजेपी का कब्जा है.
    सीमित साधनों और मुफलिसी से संघर्ष करते हुए कई चेहरे देश की राजनीति में अपनी अहम जगह और पहचान कायम करने में कामयाब रहे हैं. इन्हीं में से एक नाम आता है हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का. जानिए कैसा रहा उनका निजी और सियासी सफर.
    लोकसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने जा रहे पहली बार मतदाता बने युवाओं तक पहुंचने और उन्हें अपनी ओर खींचने की रणनीतियां बनाने और संदेश देने में व्यस्त हैं राजनैतिक दल
    मौजूदा कृषि मंत्री राधामोहन सिंह आज भी अपना पेशा कृषि को ही मानते हैं. उनके लोगों से निरंतर मेल मिलाप और पार्टी की सांगठनिक निष्ठा को देखते हुए ही उन्हें कृषि मंत्री जैसा पद दिया.

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