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विपक्षी दलों का आरोप है कि पंजाब पुलिस अवैध शराब के कारोबार में कांग्रेस नेताओं की संलिप्तता के चलते उन पर हाथ डालने से डर रही है.

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    इकबाल सिंह ने एक 16 साल पुराने हुक्मनामा को उजागर करते हुए आरोप लगाया कि साल 2004 में अकाल तख्त में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मुखालफत को लेकर जो बयान जारी किया था वह पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के इशारे पर जारी हुआ था.
    MOTN के इस सर्वे में 2019 के लोकसभा चुनाव के नजरिए से देखें तो एनडीए को 353 जबकि बीजेपी को अपने दम पर 303 सीटें मिली थी. इस तरह से पिछले चुनाव की तुलना में एनडीए की 37 सीटें घटती दिख रही हैं तो बीजेपी को भी 20 सीटों का नुकसान होने की संभावना है.
    अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भूमि पूजन कार्यक्रम से किनारा करके पंजाब में नई सियासी बहस को जन्म दे दिया है.
    पंजाब सरकार के मंत्रियों ने जहरीली शराब कांड के पीड़ित परिवारों को दो लाख रुपए प्रति परिवार मुआवजे के चेक दिए और कहा कि राज्य सरकार जल्द ही एक्साइज एक्ट में संशोधन करके इसे और कड़ा करने जा रही है.
    प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो ने प्रत्यक्ष रूप से किसी कांग्रेसी नेता का नाम नहीं लिया है, लेकिन आरोप लगाया कि जहरीली शराब कांड में शामिल लोगों को राज्य सरकार का संरक्षण हासिल है.
    नेताओं के टूटकर जाने और सत्तारूढ़ भाजपा के हमलावर रुख से कांग्रेस आज से अधिक पस्त कभी नहीं दिखी, आखिर यह मर्ज है क्या? हमारे विशेषज्ञ पैनल और पार्टी दिग्गजों की राय.
    शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर बादल और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आमने-सामने हैं. साथ ही एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं और राज्य की सियासत गर्मा गई है.
    अकाली दल की बागडोर प्रकाश सिंह बादल के बेटे सुखबीर सिंह के हाथ में आने के बाद उन पर पार्टी को एक प्राइवेट कंपनी की तरह चलाने का आरोप है. अकाली दल से अलग होकर नई पार्टियां बनाने वाले नेताओं के मुताबिक कहने को अकाली दल में कई पदाधिकारी हैं लेकिन सारी शक्तियां बादल परिवार तक ही सीमित हैं.
    ढींडसा ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हार के बाद जब सुखबीर बादल से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगा गया तो वे नाराज हो गए. सुखबीर बादल से इस्तीफा मांगने वालों में खुद सुखदेव सिंह ढींडसा और अब अकाली दल टकसाली के प्रमुख रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा थे.

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