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भोपाल में कांग्रेस सेवादल के कैम्प में सावरकर पर विवादित साहित्य बांटने को लेकर देश भर में छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई ने कहा है कि सावरकर पर कांग्रेस ने कुछ भी गलत नहीं बांटा है, बल्कि ये तो वो साहित्य है जो पहले से सार्वजनिक है.

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    दिसंबर जा रहा है, और दिल्ली के आसमान में सूरज का अता-पता नहीं. पर धूप अब भी खिलती है. पहाड़ों और नदियों पर, पेड़ों व खेतों में, कामगार, नामदार और दामदार, सबके लिए. पढ़ें साहित्य आजतक के लिए लिखा गया यह गीत
    उषा प्रियम्वदा के जन्मदिन पर साहित्य आजतक पर पढ़िए उनके उपन्यास ‘अल्प विराम’ का अंश. उनका यह उपन्यास मृत्यु के कगार पर खड़े परिपक्व व्यक्ति की अपने से उम्र में आधी युवती के प्यार में आकंठ डूब जाने की कहानी है, तो...
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    लमही हिंदी की साहित्य की महत्त्वपूर्ण पत्रिका है. आज जब लिखित शब्द पर 'संकट' मंडराते हुए दिख रहे हैं, ऐसे में किसी भी लघु पत्रिका का प्रकाशन एक कठिन कार्य है. युवा लेखक विपिन शर्मा ने इस पत्रिका की समीक्षा साहित्य आजतक के लिए लिखी है.
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    हरिवंश राय बच्चन हालावाद के प्रतिनिधि कवि थे, पर उनका लेखन इससे विशद था. आज उनकी जयंती पर 'बच्चन रचनावली' से ली गईं उनकी चुनी हुई कविताएं
    उनका असली नाम शिव किशन बिस्‍सा है, पर जब वह शायरी लिखने लगे तो उर्दू में शीन काफ़ निज़ाम से इस कदर मशहूर हुए कि उनका असली नाम लोग भूल गए. निज़ाम साहब के ग़ज़ल संग्रह 'दश्त में दरिया' से ली गईं चुनिंदा गज़लें

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