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हिंदी दिवस पर चारों ओर हिंदी की बात हो रही है. 14 सितंबर हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. पर एक भाषा के रूप में हिंदी कहां है, इस कविता से जानें.

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    भारत का चंद्रयान-दो चंद्रमा पर है. कवि अब उतनी मासूमियत से चांद पर साहित्य नहीं गढ़ सकेंगे. ऐसे में साहित्य आजतक पर पढ़िए चांद पर लिखी गईं इब्न-ए-इंशा और परवीन शाकिर की ये दो बेहद लोकप्रिय रचनाएं.
    विश्वनाथ त्रिपाठी उन विरल शिक्षकों में से रहे हैं जो अपने विद्यार्थियों की खोज-खबर रखते थे. 'गुरुजी की खेती-बारी' में शामिल संस्मरणात्मक लेख उनके अध्यापन के दौरान के हैं. इन लेखों में वो विद्यार्थियों की चर्चा करते है.
    दुष्यंत कुमार हमारे दौर के वह ऐसे ग़ज़लकार हैं जिनकी बातें मुर्दों में भी जान भर दे. आज उनकी जयंती पर साहित्य आजतक पर पढ़ें उनकी ये चुनी हुईं पांच ग़ज़लें-
    मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम की आज जयंती है. वह पंजाबी के शीर्षस्थ कवियों और कथाकारों में रही हैं. उन की जयंती पर साहित्य आजतक पर पढ़िए प्यार, दोस्ती और राजनीति पर लिखी उनकी तीन चुनी हुई कविताएं.
    अमृता प्रीतम को साल 1980-81 में 'कागज और कैनवास' कविता संकलन के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
    फिल्मों के लिए लिखकर और कई बार फिल्म फेयर अवार्ड पाकर भी गीतकार शैलेंद्र का दिल हमेशा हिंदी साहित्य और कविता की ओर लगा रहा.  उन की जयंती पर साहित्य आजतक पर पढ़िए उनकी दो चुनी हुईं कविताएं. जिनमें से एक उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिए लिखी थी.
    मानवीय संबंधों पर गज़ब की पकड़ रखने वाले उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा की जयंती पर पढ़िए उनके उपन्यास रेखा का एक अंश.
    हमारे दौर के चर्चित अपराध कथा लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा का दूसरा भाग 'हम नहीं चंगे, बुरा न कोय' नाम से अभी-अभी राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. साहित्य आजतक पर पढ़िए उसका एक रोचक अंश
    हरिशंकर परसाई देश में सियासत पर व्यंग्य के जागरुक प्रहरी रहे हैं. वे केवल विनोद या परिहास के लिए नहीं लिखते. उनकी जयंती पर साहित्य आजतक पर पढ़िए संग्रह 'पगडंडियों का ज़माना' से उनका यह चुटीला व्यंग्य

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