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Nirjala Ekadashi Vrat 2020: निर्जला एकादशी के दिन निर्जल रहकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है. यह व्रत रखने से साल की सभी एकादशी का व्रत फल मिलता है साथ ही धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति भी होती है.

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    इस वर्ष निर्जला एकादशी 2 जून (मंगलवार) को पड़ रही है. इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करते हैं. इसके बाद निर्जला एकदाशी की आरती उतारी जाती है.
    इस वर्ष 1 जून यानी आज गंगा दशहरा मनाया जा रहा है. देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान यदि आप घर में रहकर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें तो भी मां गंगा की कृपा हो सकती है.
    भगवान विष्णु ने इस दिन अपने भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए आधे नर और आधे सिंह के रूप में नरसिंह अवतार लिया था.
    गृह मंत्रालय की एडवाइजरी के तहत कोरोना वायरस के खतरे से बचने लिए लॉकडाउन आने वाली 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है.
    मान्यता है कि इस दिन व्रत-पूजन करने से अधूरी मनोकामनाएं विष्णु भगवान पूरी करते है. इसलिए इसे फलदा एकादशी या कामदा एकादशी भी कहा जाता है.
    राम नवमी के दिन मंदिरों में कई तरह के विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होता है लेकिन इस बार कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से सभी धार्मिक स्थल बंद हैं. लोग अपने घरों में ही पूजा कर रहे हैं.
    विक्रमादित्य के समय में शुरू हुआ कैलेंडर विक्रम संवत भी कहा जाता है. जानें- क्या होता है विक्रम संवत, इसकी शुरुआत कैसे हुई और दूसरे कैलेंडर से क‍ितना अलग है.
    नवरात्रि के प्रथम दिन देवी के शैलपुत्री स्वरुप की उपासना की जाती है. इनकी उपासना से देवी की कृपा तो मिलती ही है. साथ में सूर्य भी काफी मजबूत होता होता है.
    ज्योतिष शास्त्र में होली से आठ दिन पूर्व शुभ कार्यों के करने की मनाही होती है. धार्मिक ग्रंथ और शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के दिनों में किए गए व्रत और किए गए दान से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है और ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है.

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