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सरहदों पर बहुत तनाव है क्या, कुछ पता करो कहीं चुनाव है क्या, फैसला जो कुछ भी हो मंजूर होना चाहिए, जंग हो या इश्क हो भरपूर होना चाहिए...नींद से जागो तो कुछ ख्वाब दिखाएंगे तुझे....जैसी उम्दा शायरी से साहित्य आजतक के मंच पर लोगों का दिल जीत लिया राहत इंदोरी ने. आप भी सुनें

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किसने दस्तक दी ये दिल पर कौन है, आप तो अंदर हैं बाहर कौन है...राज जो कुछ हो इशारों में बता भी देना, हाथ जब उससे मिलाना तो दबा भी देना......हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं, मोहब्बत की इसी मिटी को हिंदुस्तान कहते हैं सुनें साहित्य आजतक में नायाब शायर राहत इंदोरी की शायरी
साहित्य आजतक 2018 में सजे मंचों पर साहित्य और कलाप्रेमी शब्द, कला, कविता, संगीत, नाटक, सियासत और संस्कृति से जुड़ी बातों को देखेंगे और सुनेंगे. यहां मौजूद कई हस्तियां जिन्हें अबतक आपने सिर्फ पढ़ा है, या परदे पर देखा है. साहित्य आजतक पर इन हस्तियों से अब आप रूबरू होंगे.
इस साल भी साहित्य का महाकुंभ दिल्ली के इंडिया गेट स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित हो रहा है. साहित्य का यह महाकुंभ इस बार सौ के करीब सत्रों में बंटा है, जिसमें 200 से भी अधिक विद्वान, कवि, लेखक, संगीतकार, अभिनेता, प्रकाशक, कलाकार, व्यंग्यकार और समीक्षक हिस्सा ले रहे हैं.

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