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चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क साधने की समय सीमा समाप्त हो रही है. इसी बीच खबर आई है कि नासा के मून आर्बिटर ने चांद के उस क्षेत्र की तस्वीरें ली हैं जहां पहुंच चंद्रयान-2 से भारत का संपर्क टूट गया था.

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    चांद के दक्षिणी ध्रुव पर काली अंधेरी रात होने वाली है. इसके साथ ही विक्रम लैंडर से संपर्क करने का इसरो का सपना भी अंधेरे में गुम हो जाएगा. सिर्फ 3 घंटे बाद विक्रम उस अंधेरे में खो जाएगा, जहां से उससे न तो संपर्क होगा, न ही उसकी तस्वीर मिलेगी.
    अब लोग नॉर्थ पोल पर रह भी सकते हैं. क्योंकि, वहां बन रहा है लग्जरी होटल. आप इस पारदर्शी दीवारों वाले होटल में रात बिता सकते हैं. या फिर वहीं से नॉर्दर्न लाइट्स का नजारा देख सकते हैं. अब तक यहां होटल की सुविधा नहीं थी.
    18 सितंबर है, यानी चांद पर 20-21 सितंबर को होने वाली रात से करीब 3 घंटे पहले का वक्त. यानी, चांद पर शाम हो चुकी है. हमारे कैलेंडर में जब 20 और 21 सितंबर की तारीख होगी, तब चांद पर रात का अंधेरा छा चुका होगा.
    जिस समय विक्रम लैंडर चांद पर गिरा, उस समय वहां सुबह थी. यानी सूरज की रोशनी चांद पर पड़नी शुरू हुई थी. चांद सूरज की रोशनी वाला पूरा समय पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है. यानी 20 या 21 सितंबर को चांद पर रात हो जाएगी.
    डीआरडीओ की हरित क्रांति प्रयोगशाला में फूल गोभी, पत्ता गोभी और दूसरी ऐसी कई सब्जियां उगाई जा रही हैं जिनके पीछे आधुनिक तकनीक सैनिकों की जरूरत और लद्दाख के किसानों की बेहतर आय का लक्ष्य रखा गया.
    दुनिया में ऐसे बहुत से रहस्य है जो सदियों से अनसुलझे है. अंटार्कटिका एक ऐसा महाद्वीप जो पूरी तरह से बर्फ से घिरा हुआ हैं. यहां का तापमान हमेशा माइनस में रहता हैं. वैसे तो अंटार्कटिका में बहुत से बर्फ के ग्लेशियर हैं लेकिन एक ऐसा रहस्यमय ग्लेशियर भी है जिससे लाल रंग का पानी निकलता है.
    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के दूसरे मून मिशन Chandrayaan-2 की लॉन्चिंग तकनीकी कारणों से रोक दी गई है. लॉन्च से 56.24 मिनट पहले चंद्रयान-2 का काउंटडाउन रोक दिया गया. 15 जुलाई को तड़के 2.51 बजे चंद्रयान-2 को देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च किया जाना था. आइए जानते हैं कि अब इसरो चंद्रयान-2 को कब लॉन्च करेगा...
    12 पर्वतारोहियों के एक दल ने 13 मई को नंदादेवी की चोटी के लिए चढ़ाई शुरू की. इन्हें 26 मई तक वापस आना था, लेकिन इनमें 4 पर्वतारोही ही वापस आ सके. इन चारों ने 30 मई को प्रशासन को अपने बाकी 8 साथियों के बर्फीले तूफान में फंस जाने की सूचना दी.
    मानव इतिहास के दो बड़े अभियान जो 110 साल के अंतराल पर हो रहे हैं. 1909 में धरती के दक्षिणी ध्रुव पर पहला मानव पहुंचा था. इस मिशन का नाम निमरॉड एक्सपेडिशन था. इसे अर्नस्ट शैकेल्टन के नेतृत्व में किया गया था. वहीं, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-2 मिशन का नेतृत्व इसरो कर रहा है.

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