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महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर 18 दिन तक चले खींचतान के बाद मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया. बीजेपी और शिवसेना के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था, लेकिन उससे पहले ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया.

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    झारखंड में सत्ता में वापसी की कोशिशों में लगी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 'अपनों' से ही जोर का झटका लगा है. झारखंड में पहले बीजेपी की सहयोगी पार्टी आजसू ने अपने तेवर तीखे किए तो वहीं मंगलवार को अप्रत्याशित रूप से लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने भी राज्य में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.
    हम आपको यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन किन परिस्थितयों में लगता है और इसके क्या प्रावधान होते हैं. महाराष्ट्र की बात करें तो यहां राष्ट्रपति शासन इसलिए लगाया गया है क्योंकि चुनावों में किसी भी दल या गठबंधन के पास बहुमत नहीं है.
    महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसकी मंजूरी दे दी है. हालांकि महाराष्ट्र में सरकार बनाने का विकल्प अभी खत्म नहीं हुआ है. इसके लिए राजनीतिक दलों को राज्यपाल को विश्वास दिलाना होगा कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा है.
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    महाराष्ट्र में आज रात तक हट जाएगा सरकार से सस्पेंस, एनसीपी को रात साढ़े 8 बजे तक पेश करना है दावा. एनसीपी को कांग्रेस के समर्थन पत्र का इंतजार, अभी तक कांग्रेस आलाकमान ने नहीं दी है हरी झंडी. एनसीपी नेता अजीत पवार का बयान, आज रात तक सरकार बनाने का दावा पेश करना मुश्किल. कांग्रेस पर फोड़ा देरी करने का ठीकरा. देखें 10 मिनट 50 खबरें.
    मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती शिवसेना नेता संजय राउत से मिलने बीजेपी के आशीष शेलार पहुंचे. दोनों के बीच औपचारिक मुलाकात हुई. करीबियों का कहना है कि दोनों की मुलाकात के दौरान कोई सियासी चर्चा नहीं हुई.
    अजित पवार ने दावा किया कि उनकी तरफ से कोई देरी नहीं हो रही है और सोमवार को उन्होंने पूरा दिन कांग्रेस के समर्थन पत्र का इंतजार किया. अजित के इस बयान के बाद कांग्रेस की तरफ से हैरान करने वाली जानकारी आई. कांग्रेस का मानना है कि शरद पवार रोटेशनल सीएम चाहते हैं, इसीलिए उनकी तरफ से देरी हो रही है.
    बीजेपी और शिवसेना के बाद अगर एनसीपी भी बहुमत के आंकड़े जुटाने की परीक्षा में फेल होती है तो महाराष्ट्र राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की चर्चा जोर पकड़ेगी. ऐसे में  संविधान विशेषज्ञ और राज्यसभा सदस्य सुभाष कश्यप के लिहाज से राज्‍यपाल के सामने महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रपति शासन लगाने के साथ-साथ कई और विकल्‍प भी मौजूद हैं.
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    महाराष्ट्र की राजनीति में इतनी हलचल शायद ही पहले कभी हुई हो, शायद ही कभी इतने ज्य़ादा कयास लगाए गए हों और शायद ही राजनीति के खिलाड़ियों ने एक साथ इतने दांव लगा दिए हो. सोमवार का दिन महाराष्ट्र की राजनीति में बेहद उठापटक वाला दिन रहा, दिनभर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस नेताओं की बैठकों और बयानबाजियों का दौर चलता रहा. देखें कैसा गुजरा सोमवार का दिन.
    सोमवार को शिवसेना ने सरकार गठन के लिए भरपूर कोशिश की और मोदी कैबिनेट से अपने मंत्री अरविंद सावंत का इस्तीफा तक दिला दिया, लेकिन कई राउंड की मीटिंग करने के बावजूद कांग्रेस और एनसीपी ने शिवसेना को समर्थन पर अंतिम निर्णय नहीं लिया और राज्यपाल ने रात के वक्त एनसीपी को ही सरकार बनाने का निमंत्रण दे दिया. इस तरह कई घंटों तक चला यह सियासी ड्रामा बेनतीजा रहा.

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