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बद्रीनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड टूट गया है. लोकसभा चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद मई महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बद्रीनाथ धाम पहुंचे थे और भगवान बद्री की पूजा अर्चना की थी.

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    श्राद्ध का अर्थ अपने देवताओं, पितरों और वंश के प्रति श्रद्धा प्रकट करना होता है.
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    उत्तराखंड में भारी बारिश के साथ लैंडस्लाइड की घटनाएं जारी, रास्ते में फंसे बद्रीनाथ जाने वाले श्रद्धालु. लगातार बारिश से बढ़ने लगा है अलकनंदा का जलस्तर, चमोली में यलो अलर्ट की चेतवानी जारी. बद्रीनाथ रूट पर लामबगड़ में लगातार गिर रहे हैं पत्थर,दिखने लगी है बड़ी-बड़ी दरारें. पैदल यात्रियों के लिए भी मुसीबत, पत्थरों के गिरने के खतरों के बीच पार कर रहे हैं ये रास्ता. रुद्रप्रयाग में सड़क पर आ गया फ्लैश फ्लड, बीच में फंस गई गाड़ी.
    बद्रीनाथ जाने वाले श्रद्धालु रास्ते में फंस गए हैं. चमोली में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है. इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भी भूस्खलन हुआ है.
    मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने कहा कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है, जिसके तहत सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है.
    भोपाल में नेशनल हाईवे 12 पर पानी आ गया है. भोपाल को जयपुर और जबलपुर से जोड़ने वाली सड़क पर पानी आने से संपर्क टूट गया है. इसके अलावा सागर में भारी बारिश के कारण घरों में पानी घुस गया है.
    आजतक की टीम किसी तरह से पैदल चल कर लामबगड़ के उस छोर तक पहुंची, जिस तरफ से यात्रा मार्ग पहले ही बंद किया जा चुका था. तमाम ऐसे हिस्से जो एक तरफ अलकनंदा का रौद्र रूप देख रहे थे तो दूसरी तरफ भूस्खलन की मार झेल रहे थे.
    उत्तराखंड में बारिश और बाढ़ की वजह से 35 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है. इस बीच, राज्य के कई जिलों के स्कूलों में सोमवार को छुट्टी का ऐलान किया गया है.
    पहाड़ से लेकर मैदान तक बारिश और बाढ़ का कहर जारी है. उत्तराखंड के चमोली जिले में रातभर मूसलाधार बारिश हुई. बारिश के चलते पहाड़ दरक रहे हैं और जगह-जगह भूस्खलन हो रहे हैं.
    नदी से 15 मीटर की दूरी पर बनी मशहूर शिव प्रतिमा के कंधे तक अलकनंदा नदी का पानी बह रहा है. मतलब सीधा सा है कि घाटों के ऊपर बनी 20 फीट मूर्ति पानी के अंदर है. उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले का नाम दरअसल भगवान शिव के रौद्र रूप पर पड़ा है. शिव के क्रोध के तौर पर ही इस प्रयाग को पहचान मिली है जो एकदम सही भी लगती दिखाई देती है.

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