एडवांस्ड सर्च

13:35

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने पंजाब, हरियाणा और यूपी में जलाई जाने वाली पराली को जिम्मेदार ठहराया है. उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पड़ोसी राज्यों में पराली जलाई जा रही है. अधिक जानकारी और दिल्ली की अन्य बड़ी खबरों के लिए देखेें वीडियो.

Speak Now



x
Languages:    हिन्दी    English
About 30374 results (4 seconds)
    दिल्ली-एनसीआर की हवा आज भी बेहद खराब बनी हुई है. कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 700 के पार पहुंच गया. दिल्ली के पटपड़गंज में एक्यूआई 565, ओखला में एक्यूआई 533, आरके पुरम में एक्यूआई 426 और मंदिर मार्ग में एक्यूआई 522 रिकॉर्ड किया गया.
    जहरीली धुंध में लिपटी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली बमुश्किल ही नजर आ रही है. और यह प्रलय की भविष्यवाणियां करती सुर्खियों तथा प्रलय के बाद की तस्वीरों की विषयवस्तु बन गई है
    दीवाली के बाद से पटाखों के धुएं, पंजाब-हरियाणा में जल रही पराली ने दिल्ली-NCR में धुंध को काफी बढ़ा दिया. अब एक आंकड़ा सामने आया है जो बताता है कि बीते दिनों उत्तर भारत की हवा दुनिया में सबसे खराब रही है.
    हैदराबाद और तेलंगाना के 3372 लोगों को शामिल किया गया. टीम ने उच्च आय वाले देशों में सीआईएमटी (कैरोटिड इंटिमा मीडिया थिकनेस) को मापा, ये बारीक कण 2.5 यूएम व्यास वाले थे.
    वायु प्रदूषण शिशुओं और छोटे बच्चों में मस्तिष्क के ऊतक को प्रभावित करता है और दिमाग के विकास को रोकता है जिसका खामियाजा वे पूरे जीवन भुगतते हैं.
    परियोजना के तहत 200 संयंत्र लगाने की योजना है, हर संयंत्र की क्षमता 5 मेगावाट है. इन संयंत्रों में कच्चे माल के रूप में पराली का प्रयोग किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हर संयंत्र एक मेजर सब-स्टेशन के पास स्थित होगा और इसके दायरे में 10 से 15 गांव रहेंगे.
    केवल जालंधर शहर में ही एक्यूआई का स्तर 217 दर्ज किया गया, जोकि खराब श्रेणी मानी जाती है. पंजाब व हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में भी एक्यूआई संतोषजनक श्रेणी के साथ 86 दर्ज किया गया.
    देश, दुनिया, खेल, बिजनेस और बॉलीवुड में क्‍या कुछ हुआ? जानने के लिए यहां पढ़ें, समय के साथ साथ खबरों का लाइव अपडेशन.
    हर साल की तरह इस बार भी सुप्रीम कोर्ट के सब्र का बांध टूटता दिखा. कोर्ट ने कहा, ‘‘10-15 दिन हर साल यही स्थिति बन जाती है. सभ्य देशों में ऐसा नहीं होना चाहिए.’’ आगे कोर्ट ने कहा, जीने का अधिकार सबसे अहम है, इस तरह से तो हम जी नहीं सकते. सुप्रीम कोर्ट ही नहीं बल्कि सब्र का बांध तो अब लोगों का भी टूटने लगा है. हाहाकार उस वक्त मच गया जब वायु की गुणवत्ता दीवाली की रात कई बार 999 के आंकड़े को पार कर गई.

    एडवांस्ड सर्च

    रिलेटेड स्टोरी

    No internet connection

    Okay