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चाल चक्र में आज हम आपको बताएंगे ज्योतिष में बृहस्पति के राजयोग की भूमिका के बारे में और इसका जीवन में शुभ फल हमें कैसे मिलता है. बृहस्पति, नवग्रहों में गुरु और मन्त्री है. यह ज्ञान का सबसे बड़ा ग्रह है. बृहस्पति, धनु और मीन राशि का स्वामी है. कर्क राशि, बृहस्पति की अत्यंत प्रिय राशि है. इसके कारण ज्ञान और विद्या का वरदान मिल जाता है. यह दैवीय कृपा की सूचना भी देता है. अगर बृहस्पति कुंडली में राजयोग दे तो व्यक्ति महान बन जाता है. सिर्फ बृहस्पति का मात्र एक राजयोग भी व्यक्ति को शीर्ष पर पहुंचा सकता है.

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    चाल चक्र में आज हम आपको जानकारी देंगे बुध ग्रह से जुड़े भद्र योग, बुधादित्य योग, लग्नस्थ बुध के बारे में. बुध नवग्रहों में मंत्रणा का स्वामी है. यह बुद्धि का सबसे बड़ा ग्रह है. बुध मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है. यह व्यक्ति को अत्यंत बुद्धिमान बनाता है. इसके कारण व्यक्ति, वाणी, अभिव्यक्ति और गणित में सफलता प्राप्त कर लेता है. बुध अगर कुंडली में राजयोग दे तो व्यक्ति को बुद्धि और धन, दोनों मिलता है. यह बुध का पंचमहापुरुष योग है. बुध जब कन्या या मिथुन राशी में हो तब "भद्र" योग बनता है. इससे व्यक्ति धनवान और अत्यंत बुद्धिमान बनता है. इससे व्यक्ति को खूबसूरती, वाणी, और बुद्धि का वरदान मिलता है. ऐसे लोग व्यक्ति वाणी और अभिव्यक्ति के क्षेत्र में सफल होते हैं. इस योग वाले लोग आर्थिक क्षेत्रों में भी उच्च पदों पर पाए जाते हैं. इन लोगों को अपनी बुद्धि का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए. दूसरों को मूर्ख बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
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    चाल चक्र में आज हम आपको बताएंगे मंगल की ज्योतिष में क्या भूमिका है. मंगल को ग्रहों का सेनापति कहा जाता है. यह सुरक्षा का सबसे बड़ा ग्रह है. मंगल मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है. यह व्यक्ति को साहस आत्मविश्वास और शक्ति देता है. यह व्यक्ति को जीवन में उतार चढ़ाव से बचाता है. मंगल अगर कुंडली में राजयोग दे तो व्यक्ति को जीवन में कम उम्र में ही सफलता मिल जाती है. मंगल का पहला राजयोग - रुचक योग.  यह मंगल का पंचमहापुरुष योग है. अगर कुंडली में मंगल मेष वृश्चिक या मकर राशि में हो तो यह योग बन जाता है. यह योग व्यक्ति को अत्यंत पराक्रमी बना देता है. इस योग से व्यक्ति सेना पुलिस या शक्ति के क्षेत्र में जाता है. इससे व्यक्ति इन क्षेत्रों में उच्चतम पदों तक पहुंचता है. इस योग के होने पर शक्ति का दुरूपयोग नहीं करना चाहिए. ज्यादा से ज्यादा लोगों की सहायता करनी चाहिए.
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    चाल चक्र में आज हम आपको बताएंगे चंद्रमा से बनने वाले राजयोग और शुभ योग के बारे में. चंद्रमा पृथ्वी पर सबसे ज्यादा असर डालने वाला ग्रह है. इसका सीधा असर व्यक्ति के मन और संस्कारों पर पड़ता है.  इसलिए चंद्रमा से बनने वाले एक-एक योग इतने ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं. चंद्रमा से तीन प्रकार के शुभ योग बनते हैं.  अनफा , सुनफा और दुरधरा.  इन तीनों में से एक योग भी अगर कुंडली में हो तो व्यक्ति को विशेष शक्ति मिलती है. अगर तीनों ही योग कुंडली में हों तो व्यक्ति जीवन में अद्भुत सफलता पाता है. जब चंद्रमा से पिछले भाव में कोई ग्रह हो तो अनफा योग बनता है. लेकिन चंद्रमा से पिछले भाव में सूर्य हो तो यह योग भंग हो जाता है.  इस योग के होने से व्यक्ति को जीवन में खूब सारी सुख सुविधा मिलती हैं. व्यक्ति खूब सारी यात्राएं करता है और अत्यंत व्यवहार कुशल होता है. अनफा योग के होने से व्यक्ति राजनीति में भी सफलता पा जाता है.
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    चाल चक्र में आज हम आपको बताएंगे कुंडली के राजयोग का कैसे उठाएं लाभ और क्या है सूर्य का हमारे जीवन में महत्व. सूर्य को ज्योतिष में व्यक्ति की आत्मा माना जाता है. इसका ख़राब होना सारे जीवन को अस्त व्यस्त कर देता है. पिता , राज्य , राजकीय सेवा , मान सम्मान , वैभव से इसका संबंध होता है. शरीर में पाचन तंत्र , आंखें और हड्डियां सूर्य से ही संबंधित होती हैं. इसके मजबूत होने पर जीवन में वैभव और समृद्धि मिलती है. कमजोर होने पर दरिद्रता और ख़राब स्वास्थ्य का सामना करना पड़ता है. सूर्य से मुख्य रूप से तीन तरह के राजयोग बनते हैं जो व्यक्ति को अपार प्रतिष्ठा देते हैं.
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    चाल चक्र में आज हम आपको बताएंगे परीक्षा के समय, बच्चों के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. बच्चे का जीवन मुख्य रूप से चंद्रमा से संचालित होता है. इसके अलावा बच्चे पर कुछ प्रभाव बुध का भी होता है. बच्चे का स्वास्थ्य और एकाग्रता सूर्य से भी संबंध रखता है. कुल मिलाकर बच्चे पर चंद्र सूर्य और बुध गहरा असर डालते हैं. इसके अलावा बच्चे का खान पान और पारिवारिक माहौल भी बच्चे की शिक्षा पर असर डालता है. बच्चे के पढ़ने की एक ही जगह निश्चित कीजिए. वहां पर चंदन की सुगंध का प्रयोग करें. साथ ही वहां भगवान कृष्ण का चित्र भी लगाएं. बच्चे के पढ़ने के स्थान पर खूब प्रकाश का प्रयोग करें. बच्चे को पढ़ाते समय मन को शांत रखें.
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    चाल चक्र में आज हम आपको बताएंगे शहद के चमत्कारी प्रयोग के बारे में. शहद प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला चिपचिपा सा मीठा पदार्थ है. यह केवल मधुमक्खियों द्वारा ही बनाया जा सकता है. शहद का प्रयोग आदिकाल से औषधि और धार्मिक कार्यों के लिए किया जा रहा है. पंचकर्म में भी शहद का प्रयोग विशेष रूप से होता है. पूजा की सबसे महत्वपूर्ण चीज 'पंचामृत बिना शहद के बन ही नहीं सकती. ऐसा मानते हैं कि देवी ने महिषासुर का वध करते समय बार-बार शहद का पान किया था. ज्योतिष में शहद का संबंध बृहस्पति से होता है , कुछ हिस्सा सूर्य और मंगल का भी पाया जाता है.
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    चाल चक्र में आज हम आपको बताएंगे वो कौन से ग्रह हैं. जो हमारे आकर्षण के लिए जिम्मेदार होते हैं. हर ग्रह के अंदर एक विशेष तरह का आकर्षण होता है. कुछ ग्रह अच्छे लोगों को आकर्षित करते हैं और कुछ बुरे लोगों को  जिस तरह का ग्रह व्यक्ति की कुंडली में शक्तिशाली होता है उसी तरह का आकर्षण व्यक्ति के अंदर पाया जाता है. साथ ही जानिए राशियों का हाल.
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    किसी व्यक्ति के द्वारा किये किए गए दुष्कर्मों के कारण उसे एक अवधि‍ तक इसका फल भोगना पड़ता है. कभी- कभी यह फल इतना ज्यादा कठोर होता है कि जन्म-जन्मान्तर तक पीछा करता रहता है. जब किए गए दुष्कर्मों के फल के कारण और निवारण का पता न हो तो यह शाप होता है. चाल चक्र में आज हम आपको बताएंगे शाप होता क्या है? आम जीवन में इसे कैसे समझा जाएगा? साथ ही जानिए आज का पंंचांग और रा‍शियोंं का भवि‍ष्यफल.  
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    चाल चक्र में आज आपको बताएंगे कि शनि ग्रह जीवन में इतना महत्वपूर्ण क्यों है. शनि व्यक्ति के कर्म और उसके फल का स्वामी है. जीवन में हर कर्म के शुभ या अशुभ फल शनि ही प्रदान करता है. आम तौर पर शनि ही दंड देता है और व्यक्ति के दुख का कारण बनता है. अतः आम लोगों में इसको लेकर भय व्याप्त है. शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए जप, तप और दान करना हमेशा शुभ होता है. साथ ही जानेंगे कि शनि की वस्तुओं का दान किस व्यक्ति को देना चाहिए. सबसे पहले जानते हैं राशिफल.

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