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वाराणसी (Varanasi) मे गंगा दशहरे (Ganga Dussehra) के मौके पर खास गंगा आरती (Gangal Aarti) का आयोजन किया गया. यहां पर इस खास मौके पर श्रद्धालुओं ने गंगा आरती में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.  गंगा घाट (Ganga Ghat) को खास तरह से सजाया गया था.  भारी भीड़ के बीच पहले मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने गंगा आरती की उसके बाद घाट के पुजारियों ने विधिवत पूजा पाठ के साथ गंगा आरती की.

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    देश, दुनिया, महानगर, खेल, आर्थिक और बॉलीवुड में क्‍या कुछ हुआ. जानने के लिए यहां पढ़ें समय के साथ साथ खबरों का लाइव अपडेशन.
    गंगा दशहरा के मौके पर गंगा घाटों पर हजारों लोगों ने गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई है. इस मौके पर कानपुर में लोगों ने मां गंगा से अपने और अपने परिवार के लिए मंगलकामना की दुआ मांगी.
    गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाता है. माना जाता है कि, इसी दिन गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था. इस दिन गंगा स्नान, गंगा जल का प्रयोग, और दान करना विशेष लाभकारी होता है.
    गंगा की धारा इतनी तेज थी कि उनके सीधे धरती पर आने का मतलब था तबाही. तब भागीरथ ने एक बार फिर तपस्या कर भगवान शिव से मदद की गुहार लगाई.
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    कल कल बहती गंगा... वो गंगा जिसके हर एक बूंद में समाहित है अमृत. उस निर्मल गंगा की धारा कल और अधिक चमत्कारी हो जाएगी. भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हो जाएगी. क्योंकि कल है गंगा दशहरा और कल ही के दिन मां गंगा साक्षात धरती पर आईं थीं. मोक्षदायिनी गंगा के धरती पर अवतरण के पीछे क्या पौराणिक महत्व है और क्या है इसके पीछे की कहानी. देखिए इस वीडियो में.
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    चाल चक्र में आज हम बात करेंगे गंगा दशहरा पर मिलने वाले पुण्य की. माना जाता है कि गंगा श्री विष्णु के चरणों में रहती थीं. भागीरथ की तपस्या से, शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया.  फिर शिव जी ने अपनी जटाओं को सात धाराओं में विभाजित कर दिया. ये धाराएं हैं - नलिनी, हृदिनी, पावनी, सीता, चक्षुष, सिंधु और भागीरथी.  भागीरथी ही गंगा हुईं और हिन्दू धर्म में मोक्षदायिनी मानी गईं.  इन्हें कहीं कहीं पर पार्वती की बहन कहा जाता है और भगवान शिव की अर्धांगिनी भी माना जाता है. शिव की जटाओं में इनका वास है.
    गंगा में स्नान करने से लोगों को न सिर्फ मन की शांति मिलती है, बल्कि इस दिन दान करने का भी खास महत्व होता है. अगर गंगा के किसी लोकप्रिय घाट तक पहुंचने में असमर्थ हैं तो आप घर के शीतल जल से भी स्नान कर सकते हैं.
    यूं तो हर दिन इसके पूजन और स्नान के लिए घाट पर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन गंगा मां आराधना के लिए भी एक विशेष दिन होता है. वह दिन है ज्येष्ठ शुक्ल दशमी.
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