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आम्रपाली के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने जेपी के प्रोजेक्ट्स को पूरे करने की जिम्मेदारी लेने के लिए नेशनल बिल्डिंग कंट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस में एनबीसीसी को ये बताने को कहा है कि क्या वो ये जिम्मेदारी निभाने को राजी है?

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    नोएडा और ग्रेटर नोएडा की 6 अलग-अलग परियोजनाओं के 6056 होम बॉयर्स की लिस्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को इन होम बॉयर्स के नाम पर उनके फ्लैट की रजिस्ट्री करनी है.
    आम्रपाली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और दिल्ली पुलिस को ऑडिटर्स रिपोर्ट की कॉपी देने का कहा है, ताकि इस मामले में जल्दी कार्रवाई की जा सके.
    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम कागजी शेर नहीं हैं. हम ठोस कार्रवाई करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा ऑथोरिटी को फटकार लगाई है और तुरंत रजिस्ट्री शुरू करने का आदेश दिया.
    हजारों खरीदारों को ठगने वाले आम्रपाली ग्रुप के कर्ताधर्ताओं ने 27 से ज्यादा कंपनियां चपरासी और निचले कर्मचारियों को बोर्ड में शामिल कर पैसा इधर से उधर करने के लिए बनाई थीं. इन कंपनियों का इस्तेमाल सिर्फ हेराफेरी के लिए होता था. इन्हें बनाने वालों में कंपनी के कर्ताधर्ता अनिल शर्मा, चंद्र वाधवा, अधिकारी और अनिल मित्तल शामिल हैं. नोटबंदी के दौरान कैश जमा करने में इन कंपनियों का इस्तेमाल किया गया.
    आम्रपाली की कंपनियों पर आयकर विभाग ने 9 सितंबर 2010 और 7 अगस्त 2013 को छापा मारा और तलाशी ली. आयकर विभाग ने पाया कि कंपनी ने बोगस सप्लायरों से सामान खरीद का सिर्फ ब्योरा दे रखा है जबकि कोई भी सामग्री खरीदी नहीं गई. ये फर्जी बिलिंग 842 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की थी.
    बड़े बिल्डर फर्म्स के अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर नेशनल बिल्डिंग कंट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) पर भरोसा जताया है. कोर्ट ने पिछले हफ्ते आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी देने का फैसला दिया था. सोमवार को कोर्ट ने यूनिटेक मामले में भी प्रोजेक्ट पूरे करने की जिम्मेदारी NBCC को ही देने की मंशा जताई है.
    आम्रपाली ग्रुप की ठगी की कहानी शुरू होती है 2007 से. उसने इसी साल 10 फीसदी रकम प्राधिकरण को देकर पहला प्लाट खरीदा. वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णन वेणुगोपाल ने फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लीज रेंट का भुगतान न करने के बावजूद प्राधिकरण के अधिकारी आम्रपाली को नए प्लाट का अलाटमेंट करते रहे.
    रीयल एस्टेट डेवलपर ने धोनी की ब्रांड वैल्यू का इस्तेमाल कर मकान खरीदारों और निवेशकों को आकर्षित किया. यह वह दौर था, जब धोनी अपने करियर के सर्वोच्च शिखर पर थे.
    विश्वकप के दौरान अपने धीमे खेल से आलोचकों के निशाने पर रहे धोनी अब आम्रपाली समूह के कारण विवादों में हैं. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) और आम्रपाली के फ्लैट खरीददारों की संस्था नेफोवा ने केंद्र सरकार के मंत्रियों को पत्र लिखकर धोनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

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