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वीर सावरकर के नाम पर असहिष्णुता की बहस गर्म हो गई है. मामला है मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का. मध्य प्रदेश में राष्ट्रपति से सम्मानित एक स्कूल प्रिंसिपल को सिर्फ इसलिए निलंबित कर दिया गया क्योंकि एक एनजीओ ने मुफ्त में स्कूली बच्चों को जो कॉपियां बांटी थीं उन पर सावरकर की फोटो थी. तो मुंबई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर योगेश सोमन को सावरकर पर राहुल गांधी के बयान का विरोध महंगा पड़ा. उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी हमेशा से मोदी सरकार में अभिव्यक्ति की आजादी नहीं होने का आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन दोनों मामलों के बाद सवाल उठ खड़ा हुआ है, कि क्या औरों को नसीहत, खुद की फजीहत? इस पर दंगल में देखें बड़ी बहस.

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    आमिर खान के असहिष्णुता वाले बयान के बाद माना जा रहा है कि कई ब्रैंड्स के साथ करार करने वाली दीपिका के लिए भी आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं.
    भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता ने पश्चिम बंगाल की विश्व भारती विश्वविद्यालय में तृणमूल कांग्रेस की छात्र ईकाई और एसएफआई के छात्रों द्वारा बंधक बनाए जाने के बाद आजतक से खुलकर बात की. साथ ही उन्होंने कहा कि दीपिका पादुकोण अपने विचारों को लिए स्वतंत्र हैं.
    इस्लामाबाद में नेशनल असेंबली (NA) को संबोधित करते हुए कुरैशी ने कहा कि जेएनयू के टीचर्स और स्टूडेंट्स पर हमला, भारत में बढ़ती असहिष्णुता की याद दिलाता है.
    अखिलेश यादव ने कहा कि एक ही रंग और एक ही कपड़े पहने लोग सभी जगह हमला कर रहे हैं. जेएनयू पर हमला सुनियोजित था. बीजेपी के लोग लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं को बर्बाद कर रहे हैं.
    विजयन ने कहा कि छात्रों पर हमला असहिष्णुता का नतीजा है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों और शिक्षकों पर नाजी शैली में हमला उन लोगों ने किया है, जो देश में अशांति और हिंसा का माहौल पैदा करना चाहते हैं.
    लेखकों, समीक्षकों की राय और अपनी किताबों के बारे में प्रकाशकों के उत्साह के आधार पर 2019 की कुछ प्रमुख किताबों के बारे में धारणा स्पष्ट हो जाती है. इनमें कथा, कविता और कथेतर गद्य तथा लोकप्रिय धारा का वह साहित्य भी शामिल है, जिसे पन्नों पर लाने में सोशल मीडिया ने खास रोल अदा किया है.
    आजतक से खास बातचीत में केरल के राज्यपाल आरिफ मोम्मद खान ने कहा कि संसद से तीन तलाक के पक्ष में पारित कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्री पद से 35 साल की उम्र में इस्तीफा देने वाले आरिफ मोहम्मद खान से आज ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वो 68 साल की उम्र में राज्यपाल पद के लिए संसद के किसी भी कानून का समर्थन कर देगा.
    केरल के कन्नूर में आयोजित भारतीय इतिहास कांग्रेस कार्यक्रम में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को विरोध का सामना करना पड़ा. उन्होंने जैसे ही CAA पर हुए विरोध प्रदर्शन पर बोलना शुरू किया तो इतिहासकार इरफान हबीब स्टेज पर पहुंचे और उन्हें रोकने की कोशिश की.
    प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक का सबसे प्रचंड विरोझ झेलना पड़ रहा है. बीजेपी सरकार का ये विरोध CAA और NRC को लेकर हो रहा है. विपक्ष, छात्र और सिविल लिबर्टी पर काम करने वाली संस्थाओं ने नरेंद्र मोदी सरकार पर दो टूक आरोप लगाया है और कहा है कि सरकार संविधान के बुनियादी मूल्यों में हेर-फेर कर देश के सेकुलर ढांचे को नुकसान पहुंचाना चाहती है.

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