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समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और योगी सरकार अपराध को नियंत्रित करने में असफल रही है. बीजेपी सरकार ने जनता के विश्वास को तोड़ने का काम किया है.

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    वित्त वर्ष 2018-19 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का संग्रह बढ़कर 5.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह वित्त वर्ष 2017-18 के 2.91 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले बहुत ज्यादा है.
    छह विशेषज्ञ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पहले बजट की छानबीन कर रहे हैं और बता रहे हैं कि इसमें किए गए उपाय खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने के लिए काफी हैं या नहीं
    खर्च बढ़ाने की जोरदार मांग के बावजूद, बजट 2019 में राजकोषीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई
    आने वाले साल में सरकार खूब रुपये खर्च करने जा रही है. सरकार के बजट के मुताबिक इस बार करीब 27,863 अरब रुपये खर्च होने हैं, लेकिन इसमें आपके लिए क्या है? सरकार का कहना है कि 20 मंत्रालयों को फरवरी में पेश अंतरिम बजट से ज्यादा पैसा आवंटित किया गया है.
    मोदी सरकार 2.0 के पहले आम बजट में वित्त वर्ष 2019 के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्‍य को जीडीपी के 3.3 फीसदी पर रखा गया है.
    सरकार को इस बात की उम्‍मीद है कि कर्ज में डूबी एअर इंडिया की बिक्री दिवाली तक पूरी हो जाएगी.
    लोकसभा चुनाव के बाद पहले आम बजट में मोदी सरकार ने कंपनियों के विनिवेश की योजना के बारे में बताया है. इसके साथ ही विनिवेश के लक्ष्‍य को भी बढ़ा दिया गया है.
    वित्त मंत्री ने कहा कि सर्वाधिक कमाई करने वाले लोगों को देश के विकास के साथ-साथ राजस्‍व जुटाने में और ज्‍यादा योगदान करने की जरूरत है. 2 से 5 करोड़ रुपये तक सालाना कमाने वालों को 3 फीसदी अतिरिक्त सरचार्ज देना होगा.
    इस बजट में मोदी सरकार का जोर किस बात पर रहा है, ये बजट में इस्तेमाल हुए शब्दों से भी समझा जा सकता है.

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