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जी सतीश रेड्डी: इंजीनियर से डीआरडीओ चेयरमैन बनने तक की कहानी

प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जी सतीश रेड्डी को दो साल के लिए डीआरडीओ चेयरमैन बनाया गया है. इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग से पढ़ाई करने वाले रेड्डी ने अग्नि वी प्रोजेक्ट में भी अहम भूमिका निभाई थी.

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aajtak.in
मोहित पारीक नई दिल्ली, 29 August 2018
जी सतीश रेड्डी: इंजीनियर से डीआरडीओ चेयरमैन बनने तक की कहानी जी सतीश रेड्डी (फोटो- फेसबुक)

प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जी सतीश रेड्डी को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. रेड्डी रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार हैं और अब डीआरडीओ के अध्यक्ष पद पर दो साल के लिए उनकी नियुक्ति की गई है. वह इस अवधि में डीओडीआरडी के सचिव भी होंगे. उन्हें रॉकेट मैन भी कहा जाता है.

जी रेड्डी का नौवहन और वैमानिकी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अहम योगदान रहा है. उन्होंने अनुसंधान केंद्र के निदेशक के रूप में कई अहम रक्षा परियोजनाओं में अहम भूमिका निभाई है. जी सतीस रेड्डी को मिसाइल सिस्टम में उनके शोध और विकास के लिए जाना जाता है और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों और उद्योगों के उन्नयन की दिशा में भी उन्होंने निरंतर योगदान दिया है. जी सतीश रेड्डी की अगुवाई में ही एवियनिक्स सिस्टम तैयार किया गया था.

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रेड्डी का जन्म महिमालुरू में हुआ था. रेड्डी ने आंध्र प्रदेश में जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (जेएनटीयू) से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक किया है. इसके साथ-साथ जी रेड्डी रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ नेविगेशन लंदन के साथ रॉयल एयरोनॉटिकल सोसाइटी में भी शामिल हो चुके हैं.

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अग्नि वी में था अहम योगदान

उन्होंने भारत के पहले इंटरकॉनिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल मिशन अग्नि-वी में अहम योगदान निभाया था. वे अभी एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स की अगुवाई कर रहे हैं, जो 'मिसाइल हब ऑफ इंडिया' के नाम से जानी जाता है. उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया है.

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