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1947 के बाद पहली बार इस कॉलेज की प्रेसिडेंट बनी कोई लड़की, रचा इतिहास

पंजाब यूनिवर्सिटी के गर्ल्‍स हॉस्‍टल में लड़कियों को कहा जाता था सही कपड़े पहनने के बाद ही कमरे से बाहर आएं, प्रेसिडेंट बनीं कनुप्रिया ने तोड़ी ये प्रथा...

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aajtak.in [Edited by: प्रियंका शर्मा]नई दिल्ली, 13 September 2018
1947 के बाद पहली बार इस कॉलेज की प्रेसिडेंट बनी कोई लड़की, रचा इतिहास कनुप्रिया

पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में हुए छात्र संघ चुनाव 2018 में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई लड़की ने पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट काउंसिल परिषद (PUCSC) के चुनाव जीतकर प्रेसिडेंट बन गई हैं. बतादें, इससे पहले कभी भी पीयू में कोई भी लड़की प्रेसिडेंट नहीं बनी थी.

प्रेसिडेंट बनने वाली इस 22 साल की लड़की का नाम कनुप्रिया हैं. वह 'स्टूडेंट्स फॉर सोसाइटी' (SFS) की उम्मीदवार हैं जिसमें उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की है. इस चुनाव का परिणाम 6 सितंबर को घोषित कर दिया गया था. 

कनुप्रिया को 2802 वोट मिले और उन्होंने एबीवीपी के आशीष को हराया जिन्हें 2083 वोट ही मिले थे. यानी 719 वोट से जीत हासिल की. आपको बता दें, साल 1882 में लाहौर में पंजाब यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी, लेकिन आजादी के बाद  साल 1947 में  ये यूनिवर्सिटी स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आई थी. इसका मतलब ये कि आजादी के 71 साल बाद पहली बार इस यूनिवर्सिटी में कोई लड़की प्रेसिडेंट बनी हैं. कनुप्रिया पंजाब के पट्टी, तरनतारन की रहने वाली हैं और अभी एमएससी जूलॉजी की पढ़ाई कर रही हैं.

कनुप्रिया ने बताया- यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियों के लिए एक नोटिस लगाया गया जिसमें लिखा था कैसे कॉमन रूम डाइनिंग हॉल या फिर हॉस्टल ऑफिस में जाने से पहले लड़कियों को सही कपड़े पहनने चाहिए जिसके बाद ही वह कमरे से बाहर निकल सकती है. वहीं अगर लड़कियां ड्रेस कोड फॉलो नहीं करती है तो उन्हें चेतावनी दी जाती थी और कहा जाता था ऐसा करना अनुशासन के खिलाफ है और इस पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

जब कनुप्रिया ने यूनिवर्सिटी के सभी छात्रों और स्टाफ संबोधित किया तो उन्होंने नोटिस वापस लेने के लिए वार्डन और छात्र कल्याण (महिला) के डीन के सामने डिमांड रखी और कहा यदि ऐसा नहीं होता है छात्र खुद इसे हटा देंगे. जिसके बाद ये नोटिस वापस ले लिया.

कनुप्रिया ने बताया लड़कियों के लिए 'ड्रेस कोड, हॉस्टल समय और हर वक्त लड़कियों के लिए रोक- टोक करना अपमानजनक और पितृसत्तात्मक मानसिकता दिखाती है. ऐसे में पंजाब यूनिवर्सिटी में इस चीज के लिए कोई जगह नहीं है. कनुप्रिया ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया- 18 साल के लड़के को मैच्योर माना जाता है, ठीक उसी तरह 18 साल की लड़कियां भी समान रूप से मैच्योर हैं.

जीत हासिल करने के बाद जब एक इंटरव्यू में  कनुप्रिया से पूछा गया अब यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए आगे का क्या प्लान है, तो उन्होंने कहा- सोसाइटी का मॉडल यूनिवर्सिटी जनरल मीटिंग से चलेगा वहीं हमारा मॉडल है और उसी के आधार पर यूनिवर्सिटी की जो भी समस्याएं है उन्हें हल किया जाएगा. वहीं उन्होंने का जीत हासिल करने के बाद मैं तमाम छात्रों से कहना चाहती हूं कि इस वक्त हमारे कंधों पर एक अहम जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा- अब हमें निर्णय लेना है कि आगे हमारा समाज कैसा होगा इसलिए पढ़ाई के साथ- साथ समाजिक दिक्कतों पर भी ध्यान दें.

जब कनुप्रिया ने जीत हासिल की थी तब उन्होंने कहा पीयू छात्र संघ पर आरएसएस को कोई नियम नहीं चलेगा. उन्होंने कहा आरएसएस-बीजेपी  अन्य यूनिवर्सिटीज पर अपने नियम चला सकती है या उनके कामों में दखल दे सकती है, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी पर शासन नहीं कर सकती.

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