एडवांस्ड सर्च

छवियों और बातों में समाई है यहां गंगा की एक अंतहीन यात्रा

लेखक चंचल कुमार घोष ने भारत में अपनी यात्रा के दौरान गंगा नदी से जुड़ी जो भी जानकारी हासिल की उसे अपनी किताब  'गंगा- एन एंडलेस जर्नी' के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया है.

Advertisement
aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 03 February 2020
छवियों और बातों में समाई है यहां गंगा की एक अंतहीन यात्रा इस पुस्तक में 190 से अधिक तस्वीरें गंगा के प्रति लेखक के गहरे प्रेम को उजागर करती हैं.

गंगा भारत की आत्मा है. हिमालय के गौमुख से निकलकर गंगासागर के संगम पर समुद्र में मिलने वाली 2,525 किलोमीटर लंबी नदी भारतीय सभ्यता का उद्गम स्थल है. अनगिनत शहर, गांव और मंदिर इसके किनारों पर बसे हुए हैं. गंगा अब एक तीर्थस्थल में परिवर्तित हो चुकी है.

लेखक चंचल कुमार घोष ने भारत में अपनी यात्रा के दौरान गंगा नदी से जुड़ी जो भी जानकारी हासिल की उसे अपनी किताब  'गंगा- एन एंडलेस जर्नी' के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया है. उनके इस अनुभव ने उन्हें भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक अस्तित्व और युगों से संपन्न गंगा के किनारों को समझने का मौका दिया है.

इस यात्रा के दौरान लेखक की मुलाकात जिन लोगों से हुई और उन्होंने जो किस्से यहां लोगों से सुने, उसने कहानी को अधिक समृद्ध बनाया है. आगरा के बद्रीनाथ जी जो सातवीं बार सागर द्वीप पर आए थे और गंगोत्री के एक गांव से ताल्लुक रखने वाले वर्षराम सेमवाल ऐसे ही कुछ लोगों में शुमार हैं. इन लोगों का कहना है कि गंगोत्री संभवत: पृथ्वी पर एकमात्र तीर्थस्थान है जहां कोई ईश्वर के विशाल स्वरूप को देख सकता है.

लेखक की तस्वीरों ने भारत की संस्कृति और विरासत को स्पष्ट रूप से अपने कैमरे में कैद किया. यह पुस्तक गंगा की आंतरिक भावना, निरंतरता की भावना, प्रेम और श्रद्धा की भावना का प्रमाण है. इस दृष्टिहीन पुस्तक में मौजूद 190 से अधिक तस्वीरें गंगा के प्रति लेखक के गहरे प्रेम को उजागर करती हैं.

कलकत्ता में जन्मे और दुर्गापुर में पले-बड़े चंचल कुमार घोष बंगाली साहित्य, यात्रा और बाल कथाओं के प्रमुख लेखक माने जाते हैं. उनके पहले उपन्यास 'जगन्नाथ तोमाके प्रणाम' ने काफी अवॉर्ड जीते थे. 'प्रबाहो' और 'चिड़ियाखाना' उनके ऐसे ही दो प्रमुख उपन्यास हैं. चीन के एक संन्यासी ह्यूएन त्सांग के जीवन पर लिखा 'अमृता पांथा' उपन्यास साल 2019 में ही प्रकाशित हुआ था.

चंचल कुमार घोष ने 'तुई किचु पेरिस ना' नाम का उपन्यास बच्चों के लिए लिखा है. इसके अलावा घोष ने कई लघु कथाएं भी लिखी हैं जिनका विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है.

घोष ने पवित्र नदी पर तीन महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं. इनमें 'भारतात्मा- रामकृष्ण मिशन', 'गंगा दर्सन' और 'प्रवहमान गंगा' जैसी किताबें शामिल हैं.

अंग्रेजी की रिटायर्ड प्रोफेसर सरबानी पुतातुंडा बड़ी लगन से रचनात्मक लेखन के पेश से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने भी कई किताबों की रचना की हैं. चंचल कुमार घोष की 'गंगा- एन एंडलेस जर्नी' का अंग्रेजी ट्रांसलेशन भी इन्होंने ही किया है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay