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पानी के साथ 1 हफ्ते में क्रेडिट कार्ड जितनी प्लास्टिक निगल रहे हैं आप: रिसर्च

रिपोर्ट के दावों की मानें तो 7 दिन के भीतर आपके शरीर में करीब 5 ग्राम प्लास्टिक जाता है. इसका सबसे बड़ा स्रोत बोतलबंद और नल से आने वाला वो पानी है.

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aajtak.in [Edited by: सुमित कुमार]नई दिल्ली, 14 June 2019
पानी के साथ 1 हफ्ते में क्रेडिट कार्ड जितनी प्लास्टिक निगल रहे हैं आप: रिसर्च प्रतीकात्मक तस्वीर

पानी के बिना इंसान के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पानी के जरिए आपके शरीर में हर हफ्ते एक क्रेडिट कार्ड जितना प्लास्टिक दाखिल हो रहा है. एक रिपोर्ट के दावों की मानें तो 7 दिन के भीतर आपके शरीर में करीब 5 ग्राम प्लास्टिक जाता है. इसका सबसे बड़ा स्रोत बोतलबंद और नल से आने वाला वो पानी भी है जिसमें प्लास्टिक के छोटे-छोटे कण पाए जाते हैं.

वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) में प्रकाशित एक रिपोर्ट में पानी में प्लास्टिक होने का दावा किया गया है. यह रिपोर्ट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूकैसल और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनियाभर में हुए 52 शोधों पर आधारित है. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की इंटरनेशनल डायरेक्टर जनरल मार्को लैंबरटिनी ने बताया कि प्लास्टिक से न सिर्फ महासागर बल्कि हम इंसान भी दूषित हो रहे हैं.

हर साल 250 ग्राम से ज्यादा प्लास्टिक-

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमारे शरीर में हर सप्ताह प्लास्टिक के करीब 2000 छोटे कण प्रवेश करते हैं. हर महीने हम करीब 21 ग्राम प्लास्टिक निगल जाते है. जबकि एक साल में करीब 250 ग्राम से ज्यादा प्लास्टिक हमारे शरीर में दाखिल हो रही है. बता दें कि पहली बार किसी रिपोर्ट में पानी में प्लास्टिक होने की बात सामने आई है.

इन वजहों से भी निगल रहे प्लास्टिक-

यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूकैसल और ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ता शरीर में प्लास्टिक जाने के पीछे कई और चीजों को भी जिम्मेदार मानते हैं. इनमें से एक वजह समुद्र में रहने वाली शैलफिश भी है, जिसे खाने की वजह से शरीर में प्लास्टिक जा रहा है. इसके अलावा बीयर और नमक में भी प्लास्टिक होने का दावा किया गया है.

अमेरिका में इतना प्लास्टिक खा रहे लोग-

शोध में बताया गया है कि अमेरिका में 130 माइक्रोंस से भी छोटे करीब 45000 पार्टिकल्स हर साल इंसान के शरीर में प्रवेश करते हैं. यहां नल के पानी में बहुत ज्यादा प्लास्टिक फाइबर होता है। हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट अंगालिया के प्रोफेसर ऐलेस्टर ग्रांट ने एजेंसी फ्रांस प्रेस से कहा, "पानी में प्लास्टिक होने की बात साबित हो चुकी है, लेकिन मुझे लगता है कि इससे इंसानों के स्वास्थ पर बहुत ज्यादा फर्क पड़ेगा."

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