एडवांस्ड सर्च

पीएम मोदी ने ई-सिगरेट से किया सावधान, जानें- आम सिरगेट की तुलना में कितनी खतरनाक

पीएम मोदी ने कहा कि हाल ई-सिगरेट के खतरों को जानने के बाद हाल ही में इसे भारत में बैन किया गया है.

Advertisement
aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 29 September 2019
पीएम मोदी ने ई-सिगरेट से किया सावधान, जानें- आम सिरगेट की तुलना में कितनी खतरनाक प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में युवा पीढ़ी पर मंडरा रहे ई-सिगरेट के खतरे को लेकर चर्चा की. पीएम मोदी ने कहा कि हाल ई-सिगरेट के खतरों को जानने के बाद हाल ही में इसे भारत में बैन किया गया है. उन्होंने बताया कि आखिर कैसे पूरी दुनिया में ई-सिगरेट के नाम पर युवा गुमराह हो रहे हैं.

पीएम मोदी ने 'मन की बात' में कहा कि तंबाकू का सेवन सेहत के लिए हानिकारक होता है. इस लत से कैंसर, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. तंबाकू में मौजूद निकोटिन की वजह से नशा होता है. आज युवा सिगरेट की लत को छोड़ने के लिए ई-सिगरेट का सहारा लेने लगे हैं, जबकि ई-सिगरेट भी स्वास्थ्य के लिए उतनी ही खतरनाक है.

ई-सिगरेट को लेकर गलतफहमी-

सामान्य सिगरेट से अलग ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है. इसमें निकोटिनयुक्त तरल पदार्थ को गर्म करने से एक कैमिकल धुंआ बनता है. सामान्य सिगरेट के खतरे तो सभी जानते हैं, लेकिन ई-सिगरेट के बारे में एक गलत धारणा पैदा की गई है. ये भ्रांति फैलाई गई है कि इससे कोई खतरा नहीं है. युवाओं को भटकाने के लिए इसमें सुगंधित रसायन मिलाए जाते हैं.

ई-सिगरेट के खतरों से अंजान लोग-

घर में सिगरेट का सेवन करने वाला बुजुर्ग व्यक्ति भी अपने बच्चों को सिगरेट न छूने की सलाह देता है. लेकिन ई-सिगरेट को लेकर लोग बिल्कुल जागरूक नहीं है. घर मेंं छोटे-छोटे बच्चों के हाथ में इसे दे दिया जाता है. लोग इसके खतरों से अंजान हैं.

कितनी खतरनाक है ई-सिगरेट?

अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि साल 2013 में प्रचलन में आने के बाद से टैंक-स्टाइल इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के एरोसोल या वाष्प में लेड, निकल, आयरन और कॉपर जैसी कार्सिनोजेन धातुएं बढ़ी हैं. बता दें कि हाल ही में भारत सरकार ने भी ई-सिगरेट को बैन करने का फैसला किया था.

इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में बैटरी, एटॉमिजिंग यूनिट और फ्लूइड होता है, जिसे फिर से भरा जा सकता है. यह अब नए टैंक-स्टाइल डिजाइन में आता है जिसमें अधिक दमदार बैट्रियां होने के साथ-साथ रिफिल फ्लूइड जमा रखने के लिए अधिक क्षमता वाली टंकी बनी होती है.

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय रिवरसाइड के शोधकर्ताओं ने कहा कि नए स्टाइल में प्रयोग में लाए जाने वाली हाई-पावर की बैट्रियां और एटोमाइजर मेटल कंसंट्रेशन को बढ़ा सकता है जो एरोसोल में ट्रांसफर हो जाता है. एक पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता मोनिक विलियम्स के अनुसार, "टैंक स्टाइल ई-सिगरेट हाई वोल्टेज और पावर पर काम करती है. इस कारण एरोसोल में लेड, निकल, आयरन और कॉपर जैसी कार्सिनोजेन धातुओं की कंसंट्रेशन में वृद्धि होती है."

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay