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पलायन और बदहवासी के दौर में भी जिंदा है इंसान और कुत्ते का प्यार

गणेश का कहना है कि जब शेरू बच्चा था, तबसे साथ है. अब इसको कैसे छोड़ दूं? उन्होंने बताया कि सहयात्रियों ने भी शेरू को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई. रास्ते में जब यात्रियों ने दोनों का प्यार देखा, तो किसी ने रोक-टोक तक नहीं की.

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aajtak.in
कुमार अभिषेक लखनऊ, 30 March 2020
पलायन और बदहवासी के दौर में भी जिंदा है इंसान और कुत्ते का प्यार अपने कुत्ते शेरू के साथ गणेश

  • फरीदाबाद से कुत्ते को साथ लेकर अंबेडकर नगर को रवाना हुआ शख्स
  • कुत्ते ने अपने मालिक गणेश का नहीं छोड़ा साथ, कई किलोमीटर तक दौड़ा

कोरोना वायरस को हराने के लिए मोदी सरकार ने 21 दिन के लिए देशव्यापी लॉकडाउन कर दिया है. इसके चलते लोगों का कामकाज ठप हो गया है और लोग अपने घरों की ओर तेजी से पलायन कर रहे हैं. कोरोना के आफत भरे इस माहौल में जब इंसान भाग रहा है, तब लखनऊ की सड़क पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पलायन के दौर में इंसान और जानवर के रिश्ते की मिसाल पेश कर दी.

यह कहानी हरियाणा के फरीदाबाद से चले गणेश की है, जिसने अपने पालतू कुत्ते शेरू को एक हजार किलोमीटर की यात्रा में भी नहीं छोड़ा. फरीदाबाद से दिल्ली, लखनऊ होते हुए अंबेडकर नगर पहुंचे गणेश के साथ शेरू पूरे रास्ते भर रहा.

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6 महीने का शेरू उसका पालतू कुत्ता है, जिसको गणेश ने गली से उठाया था. बस, लोरी और ट्रैक्टर में सफर के दौरान गणेश ने शेरू को अपने साथ रखा. जहां गणेश बैठा, उसने शेरू को भी वहां बैठाया. जब गणेश के साथ कुत्ते को देखा गया, तो उनसे बात करने की कोशिश की, तब जाकर पता चला कि गणेश ने पहले शेरू को छोड़ने की कोशिश की, लेकिन शेरू ने गणेश को नहीं छोड़ा.

गणेश ने शेरू को पाला, अब बने हमसफर

गणेश ने बताया कि शेरू उनके पीछे-पीछे कई किलोमीटर तक चला आया. ऐसे में उन्होंने भी उसे छोड़ने का प्लान त्याग दिया. साथ ही शेरू को लेकर हरियाणा से एक हजार किलोमीटर दूर अपने गांव अकबरपुर के लिए निकल गया.

गणेश अपने शेरू को गांव ले जा रहे हैं. शेरू के गले में पट्टा है, जिसकी डोर गणेश के हाथ में है. गणेश का कहना है कि ये जब बच्चा था, तबसे यह साथ रहा, तो अब इसको कैसे छोड़ दूं? उन्होंने बताया कि सहयात्रियों ने भी शेरू को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई. रास्ते में जब यात्रियों ने दोनों का प्यार देखा, तो किसी ने रोक-टोक तक नहीं की.

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गणेश का कहना है कि अब शेरू को नहीं छोड़ूंगा. हम दोनों रास्ते में साथ-साथ जाएंगे और जब मंजिल पहुंचेंगे, तो दोनों एक साथ पहुंचेंगे. आजतक से बात करने के बाद वाहन खोजते हुए गणेश आगे बढ़ गए. उनके साथ उनका शेरू भी चल दिया.

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