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जानें, सरोगेसी बिल क्या है और अब कौन बन पाएंगी सरोगेट मां?

कमर्शियल सरोगेसी का मतलब है- सरोगेसी मां को चिकित्सा खर्च के अलावा पैसों का भुगतान किया जाना. सरोगेसी बिल में कमर्शियल सरोगेसी पर ही बैन लगा है.

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aajtak.in [Edited By: प्रज्ञा बाजपेयी]नई दिल्ली, 20 December 2018
जानें, सरोगेसी बिल क्या है और अब कौन बन पाएंगी सरोगेट मां? सरोगेसी बिल लोकसभा में पास, कमर्शियल सरोगेसी पर बैन

लोकसभा में बुधवार को ‘सरोगेसी विधेयक को मंजूरी मिल गई है. इसमें देश में कॉमर्शियल सरोगेसी पर रोक लगाने, सरोगेसी का दुरुपयोग रोके जाने की बात कही गई है. हालांकि, इस विधेयक में ऐसे प्रावधान भी किए गए हैं जिससे नि:संतान दंपती सरोगेसी का सहारा ले सकेंगे. विधेयक में सरोगेसी के संदर्भ में ‘मां’ को परिभाषित किया गया है और यह भी तय किया गया है कि कौन लोग सरोगेसी की सेवा ले सकते हैं. यह विधेयक महिलाओं का शोषण रोकने की दिशा में अहम साबित होगा.

क्या है सरोगेसी?

सरोगेसी उस अरेंजमेंट को कहा जाता है जिसमें कोई भी शादीशुदा कपल बच्चे पैदा करने के लिए किसी महिला की कोख किराए पर लेते हैं यानी महिला दूसरों की संतान के लिए प्रेग्नेंसी के लिए तैयार होती है. ये कई वजहों से हो सकता है. जैसे कि अगर जोड़ा बच्चे पैदा करने में अक्षम है, या फिर महिला को कंसीव करने से जान जाने का खतरा हो. किराए पर कोख देने वाली महिला को सरोगेट मदर कहा जाता है.

सबसे ज्यादा विवाद कमर्शियल सरोगेसी को लेकर रहा है. कमर्शियल सरोगेसी का मतलब है- सरोगेसी मां को चिकित्सा खर्च के अलावा पैसों का भुगतान किया जाना. सरोगेसी बिल में कमर्शियल सरोगेसी पर ही बैन लगा है. अल्ट्रूटिस्टिक सरोगेसी में महिला अपनी स्वेच्छा से दूसरों के लिए प्रेग्नेंसी के लिए राजी होती है और इसके लिए पैसे का भुगतान नहीं लेती है.

पिछले कुछ वर्षों में भारत कई देशों के दंपतियों के लिए सरोगेसी का केंद्र बनता जा रहा है. अनैतिक व्यवहार, सरोगेट मांओं के शोषण, सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे को छोड़ देने और मानव भ्रूणों के इम्पोर्ट के मामले सामने आए हैं. भारत के विधि आयोग ने अपनी 228वीं रिपोर्ट में कॉमर्शियल सरोगेसी पर रोक लगाने की सिफारिश की थी. सरोगेसी को विनियमित करने के लिए कानून की कमी के कारण सरोगेसी क्लिनिकों ने सरोगेसी का दुरूपयोग किया जिससे वाणिज्यिक सरोगेसी का खतरनाक रूप सामने आया है. सरोगेट माताओं के शोषण को रोकने के लिए और सरोगेसी के जरिए पैदा हुए बच्चों के अधिकारों के अधिकारों के संरक्षण के लिये विधान लाना अनिवार्य हो गया था.

अब क्या होंगी सरोगेट मदर बनने की शर्तें?

शादीशुदा जोड़े ही सरोगेट मदर से बच्चा करवा सकते हैं, सिंगल नहीं. दोनों की शादी को कम से कम पांच साल हो चुके होने चाहिए. उनमें से कम से कम कोई एक इन्फ़र्टाइल (बच्चे पैदा करने में अक्षम) होना चाहिए. उन्हें यह बात साबित करनी होगी कि वे मेडिकली बच्चा पैदा करने में अक्षम हैं.

सरोगेसी से बच्चा पैदा करने की कोशिश कर रहे जोड़े की उम्र 23 से 50 साल (स्त्री) और 26 से 55 साल (पुरुष) होनी चाहिए. जोड़े का भारतीय नागरिक होना जरूरी है.

सरोगेट मां जोड़े की नजदीकी रिश्तेदार ही होनी चाहिए. इसे कानून में यह परिभाषित नहीं किया गया है कि नजदीकी रिश्तेदारों में कौन-कौन आएंगे.

सरोगेट मां का भी विवाहित होना जरूरी है. उसका कम से कम अपना एक बच्चा पहले से होना चाहिए.

सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे का किसी भी स्थिति में परित्याग नहीं किया जाएगा और उसे जैविक रूप से उत्पन्न बालक के समान अधिकार होंगे.

सरोगेट माता को केवल एक बार सरोगेट मां बनने के लिए अनुमति दी जाएगी.

सरोगेट मां को प्रेग्नेंसी के दौरान अपना ध्यान रखने और मेडिकल जरूरतों के लायक पैसे ही दिए जा सकते हैं ताकि वो अपनी प्रेग्नेंसी का ख्याल रख सकें. इससे ज्यादा पैसे देना कमर्शियल सरोगेसी के अपराध में आ सकता है.

कोई व्यक्ति, संगठन, सरोगेसी क्लिनिक, प्रयोगशाला सरोगेसी के संबंध में विज्ञापन, सरोगेसी के माध्यम से उत्पन्न बालक का परित्याग, सरोगेट माता का शोषण, मानव भ्रूण का विक्रय या सरोगेसी के प्रयोजन के लिये मानव भ्रूण का निर्यात नहीं करेगा.

कानून का उल्लंघन करने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

हालांकि, इस कानून में कई कमियां भी हैं जिसकी तरफ लोगों ने ध्यान दिलाया है. सबसे ज्यादा विवाद सरोगेट मदर बनने के लिए रिश्तेदार की शर्त को लेकर है. एक यूजर ने लिखा-

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